bebak azad - BebakAzad https://bebakazad.in Azad Khabar Sun, 14 May 2023 16:25:02 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://bebakazad.in/wp-content/uploads/2022/02/cropped-1643887222331-scaled-1-32x32.jpg bebak azad - BebakAzad https://bebakazad.in 32 32 भाजपा में रहते हुए तीन विधानसभा सीट प्रभावित कर सकते थे पूर्व मंत्री दीपक जोशी, कांग्रेस में जाकर तो वे खुद प्रभावित हुए हैं और मरणोपरांत पिता के नाम को प्रभावित कर रहे हैं https://bebakazad.in/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%8f-%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7/ https://bebakazad.in/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%8f-%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7/#respond Sun, 14 May 2023 16:25:01 +0000 https://bebakazad.in/?p=12261 पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101 देवास कांग्रेस कार्यालय में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कैलाश जोशी की तस्वीर लेकर पहुंचे उनके बेटे पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने हताशा के दौर से गुजर रहे कांग्रेस नेता कार्यकर्ताओं की हौसला अफजाई करते हुए कहा कि मैं खातेगांव-कन्नौद, बागली और हाटपीपल्या विधानसभा सीट जीताकर कांग्रेस को दूंगा। हताश कांग्रेसियों […]

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पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101

देवास कांग्रेस कार्यालय में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कैलाश जोशी की तस्वीर लेकर पहुंचे उनके बेटे पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने हताशा के दौर से गुजर रहे कांग्रेस नेता कार्यकर्ताओं की हौसला अफजाई करते हुए कहा कि मैं खातेगांव-कन्नौद, बागली और हाटपीपल्या विधानसभा सीट जीताकर कांग्रेस को दूंगा। हताश कांग्रेसियों की हौसला अफजाई करने के लिए दीपक जोशी का यह कहना दुरुस्त है, लेकिन वास्तविकता के धरातल पर देखें तो दीपक जोशी को खुद नहीं मालूम कि वे कहां आकर खड़े हो गए हैं? यदि कांग्रेस की सरकार नहीं बनी, उन्हें टिकट मिला और वे जीत नहीं पाए तो उनकी राजनीति का क्या होगा? कांग्रेसियों को ढांढस बंधाने से, उनकी हौसला अफजाई करने से फुरसत मिले तो दीपक जोशी को इस पर विचार करना चाहिए। भाजपा में रहते हुए दीपक जोशी जरूर तीन विधानसभा क्षेत्र को प्रभावित कर सकते थे, लेकिन कांग्रेसी होकर नहीं। इन विधानसभा क्षेत्रों के सरकार से नाराज, विधायकों के क्रिया-कलापों से नाराज, अफसरों के भ्रष्टाचार मनमानियों से नाराज, भाजपा नेता-कार्यकर्ता दीपक जोशी के साथ इसलिए थे कि दीपक जोशी खुद उपेक्षित होकर सरकार से नाराज चल रहे थे, वे भाजपा नेता कार्यकर्ता कांग्रेसी दीपक जोशी को महत्व थोड़ी देंगे, यदि दीपक जोशी सोचते हैं कि उन असंतुष्ट भाजपा नेता कार्यकर्ताओं का सहयोग लेकर वे खातेगांव-कन्नौद, बागली, हाटपीपल्या विधानसभा सीट कांग्रेस की झोली में डाल देंगे तो वे गलत सोचते हैं। भाजपा के असंतुष्ट, भाजपाई दीपक जोशी को महत्व दे सकते थे, कांग्रेसी दीपक जोशी को नहीं, क्योंकि हर भाजपा नेता कार्यकर्ता दीपक जोशी नहीं हो सकता। दीपक जोशी कांग्रेसी होकर राजनीतिक दृष्टि से रुग्ण हुए हैं, कमजोर हुए हैं, उनके द्वारा हैसियत से बढ़कर बोले जा रहे बोल, उन्हें हास्यास्पद बना रहे हैं, तीन सीट कांग्रेस को जीताकर दूंगा, दीपक जोशी के हैसियत से बढ़कर बोले गए बोल हैं। दीपक जोशी के इन बोलों पर एक बुद्धिजीवी कांग्रेसी ने अनौपचारिक चर्चा में चुटकी ली है, जो खुद अपने पिताजी की तस्वीर लेकर राजनीतिक गलियारों में भटक रहे हैं, वे तीन विधानसभा सीट जीताकर कांग्रेस को कैसे दे सकते हैं? कड़वा है, लेकिन सच है, राजनीति के संत कहे जाने वाले अपने पिता पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी की तस्वीर लेकर दीपक जोशी ऐसे घूम रहे हैं, मानो राजनीति में उनके पास पिता के नाम के अलावा और कुछ नहीं है, इसीलिए वे पिता की तस्वीर लिए कांग्रेस कार्यालय कार्यालय घूम रहे हैं। स्वर्गीय कैलाश जोशी में आस्था रखने वाले लोगों के मन की इबारत पढ़ने की कोशिश करो तो स्पष्ट लिखा मिलेगा कि दीपक जोशी जैसे अपने बेटे को भाजपा में छोड़ आए, वैसे ही अपने संत पिता को भी भाजपा में छोड़ आते। दीपक जोशी तो कांग्रेसी हो गए, लेकिन उन लोगों की निष्ठा को भाजपा संगठन की नजरों में संदिग्ध कर आए हैं, जो विधायकों के क्रिया कलापों एवं अफसरों की मनमानियों से नाराज होकर पिछले दिनों दीपक जोशी को सिर माथे पर लिए लिए घूम रहे थे। जो लोग भाजपा में दीपक जोशी के साथ घूमते रहे हैं, संभवतः संगठन सहजता से उन पर विश्वास नहीं कर पाएगा, दीपक जोशी ने उनमें विश्वास रखने वाले भाजपाइयों का उपयोग कर, उन्हें फेंकने का काम किया है। दीपक जोशी चाहे कांग्रेस में अपना मजमा जमाने के लिए बड़ी-बड़ी बातें करें, जबकि वास्तविकता यह है कि कांग्रेसियों के लिए दीपक जोशी, ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा दिए गए सरकार घातक घाव पर लगाने का मल्हम मात्र है। कांग्रेसियों के बीच दीपक जोशी के बड़बोलेपन को लेकर कानाफूसी हो रही है कि यदि तीन विधानसभा सीट जीताकर दीपक जोशी दे रहे हैं तो क्या जिलेभर के कांग्रेसियों ने सोनकच्छ और देवास पर ध्यान केन्द्रित कर देना चाहिए? क्या दीपक जोशी भाजपा के असंतुष्ट, विघ्नसंतोषी भाजपा नेताओं के साथ कोई गुप्त मंत्रणा करके भाजपा से कांग्रेस में आए हैं? कांग्रेसी, दीपक जोशी द्वारा किए गए दावे को लेकर कुछ इसी तरह विचार मंथन करते देखें जा रहे हैं । बरसों से देवास में जीत के लिए तरसते कांग्रेसियों के लिए नव कांग्रेसी दीपक जोशी का तीन सीट जीत कर देने का दावा, मनोबल बढ़ाने वाला है और उस पर कर्नाटक में कांग्रेस की जीत ने कांग्रेसियों का उत्साहवर्धन किया है। एक कांग्रेसी ने तो यहां तक कह दिया कि कांग्रेस में दीपक जोशी के कदम शुभ है, प्रमाण कर्नाटक की जीत है। एक कहावत है “नाई नाई कितने बाल,ठहर सब सामने आ रहे हैं” तो कांग्रेसी दीपक जोशी का क्या होना है, उनकी राजनीति का क्या होना है, समय के गर्भ में है। नेताओं का दल बदलना पहले शर्म की बात हुआ करती थी, वे दल बदलू कहलाने में शर्म महसूस किया करते थे, लेकिन आजकल दल बदल राजनीति में एक नीति हो गई है। राजनीति के संत पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय श्री कैलाश जोशी के बेटे दीपक जोशी ने उपेक्षा से तंग आकर दल बदल कर लिया, भाजपा से कांग्रेस में आ गए, कोई बात नहीं, राजनीति में चलता है, विचार मेल नहीं खाए, अन्य विचारधारा का दामन थाम लिया, लेकिन जन्मजात जनसंघी पिता की तस्वीर लेकर कांग्रेस कार्यालय में आमद देना, थोड़ा असहज कर देनेवाला है, राजनीति में पूजनीय स्थान रखनेवाले जनसंघी पिता को मरणोपरांत बेटे द्वारा कांग्रेसी बनाना, असहज कर देनेवाला है।

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सजने लगा, बनने लगा, संघ के सपनों का भारत, ना तो अब कोई रोक सकता है और ना ही कोई अवरोध उत्पन्न कर सकता है, चाहे देश के अंदर की शक्ति हो, या बाहर की, सब मिलकर भी विरोध करे तो संघ के सपने को साकार होने से नहीं रोका जा सकता https://bebakazad.in/%e0%a4%b8%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%98-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%aa/ https://bebakazad.in/%e0%a4%b8%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%98-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%aa/#respond Sat, 15 Apr 2023 04:21:13 +0000 https://bebakazad.in/?p=12163 पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ 9009597101 आजाद भारत की राजनीति में जो सबल स्थिति आज भारतीय जनता पार्टी की है,वह कभी कांग्रेस की हुआ करती थी, जैसे आज राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दल मिलकर भारतीय जनता पार्टी का सामना करने के लिए रणनीति बनाते नजर आ रहे हैं, योजना बनाते नजर आ रहे हैं,उसी तरह कभी […]

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पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ 9009597101

आजाद भारत की राजनीति में जो सबल स्थिति आज भारतीय जनता पार्टी की है,वह कभी कांग्रेस की हुआ करती थी, जैसे आज राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दल मिलकर भारतीय जनता पार्टी का सामना करने के लिए रणनीति बनाते नजर आ रहे हैं, योजना बनाते नजर आ रहे हैं,उसी तरह कभी कांग्रेस के खिलाफ सारे दल मिलकर रणनीति बनाया करते थे, योजना बनाया करते थे,उसमें जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी बनी संघ की राजनंदनी, भाजपा भी शामिल हुआ करती थी। चूंकि कांग्रेस कभी संगठन रही ही नहीं,बस सत्ता से चिपके लोगों की भीड़ थी, कांग्रेस सत्ता से अलग हुई तो सत्ता से चिपकी भीड़, सत्ता जाते ही कांग्रेस के आसपास से छट गई। महात्मा गांधी के अंधे आशीर्वाद से देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस का केंद्र रहे और आज का गांधी परिवार जवाहरलाल नेहरू का वंशज हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी की दादी, पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी के पिता थे। सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी को कांग्रेस विरासत में मिली है,इनको भ्रम है कि प्रत्येक कांग्रेसी के लिए ये देव तुल्य है, जबकि वास्तविकता यह है कि कांग्रेस के ढांचे को जिंदा दिखाई देने के लिए सत्ता लोभी चापलूसों को, नेहरू के वंशज गांधी परिवार के नाम की आवश्यकता है, इसलिए कांग्रेसियों के बीच गांधी परिवार को झेला जा रहा है,ढोया जा रहा है, अन्यथा गांधी परिवार के कुलदीपक राहुल गांधी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सार्थक करके बताया है कि “पूत सपूत तो क्यों धन संचय,पूत कपूत तो क्यों धन संचय”? कड़वा सच कहा जाए तो 15 अगस्त को सत्ता हस्तांतरण दिवस कहा जा सकता है, स्वतंत्रता दिवस नहीं और स्वतंत्रता दिवस कहा जाए तो कैसे? 15 अगस्त 1947 से ही कांग्रेस के पीछे उन लोगों की भीड़ बढ़ती गई, जो 15 अगस्त सत्ता हस्तांतरण दिवस को स्वतंत्रता दिवस मानकर सत्ता सुख भोगने की लालसा रखते थे, सत्ता हस्तांतरण दिवस को स्वतंत्रता दिवस के रूप में स्थापित करने की कोशिश करते रहे। लार्ड माउंटबेटन ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को देश की सत्ता सौंप दी थी,देश उसी को स्वतंत्रता कहता आया है, आजादी कहता आया है। सत्ता पाकर खुश हो जाने वाले लोगों से एक बहुत बड़ा विचारवान वर्ग नाराज रहा है, क्योंकि वह सत्ता हस्तांतरण के साथ-साथ देश को स्वतंत्र भी कराना चाहता था, आजाद भी कराना चाहता था। वह विचारवान वर्ग हमेशा से चाहता रहा कि भारत अपने पुराने वैभव के साथ विश्व बिरादरी में खड़ा हो, सदियों की गुलामी के बोझ से दबे दबे, दब्बू राष्ट्र के रूप में नहीं, लेकिन सत्ता लोभी नेताओं ने भारत को वैसे ही चलाया, जैसा देश छोड़कर जाने वाले अंग्रेज चाहते थे। सत्ता हस्तांतरण को स्वतंत्रता मानने वाले लोगों से असंतुष्ट एवं नाराज विचारवान लोग, जो भारत को उसके पुराने वैभव के साथ विश्व बिरादरी में स्थापित करना चाहते थे, चुप नहीं बैठे, वे धीरे-धीरे अपने स्तर पर अपने लक्ष्य की दिशा में काम करते रहे और आज वे इस स्थिति में आ गए हैं कि भारत को उसके पुराने वैभव के साथ स्थापित कर सके। जी हां यहां राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की बात की जा रही हैं, राष्ट्र चिंतन, अनुशासन के लिए प्रसिद्ध, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने इस स्थिति को प्राप्त करने के लिए दशकों अनुशासनात्मक रूप से साधना की है, संघर्ष किया है और धैर्य रखा है। आज देश के सारे सूत्र संघ के हाथ में हैं, संघ के संस्कारों से संस्कारित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथ में हैं। कांग्रेस सहित सारा विपक्ष हताश हैं और संघ अपनी राजनंदनी भाजपा के माध्यम से देश की राजनीति पर आच्छादित है। यदि कांग्रेस सहित विपक्ष सोच रहा है कि देश की सत्ता भाजपा से हासिल कर लेगा तो वह, खयाली पुलाव पका रहा है,मन के लड्डू खा रहा है। अब संघ भाजपा के हाथ से सत्ता छीन लेना आसान नहीं है, संघ एक दीर्घकालीन रणनीति और योजना लेकर चलने वाला, काम करने वाला, अनुशासन से अलंकृत संगठन है। संघ की दीर्घकालीन रणनीति में सिर्फ और सिर्फ उसके सपनों का भारत है, जिसका निर्माण सन् 2014 से नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के साथ ही प्रारंभ हो गया था। यदि संघ के आत्मविश्वास को परखना है तो सन् 2014 में मोदी सरकार बनते ही संघ नेता राम माधव द्वारा दिए गए उस बयान पर ध्यान दिया जाना चाहिए, जिसमें उन्होंने कहा था कि अब पचास साल तक अन्य राजनीतिक दल भूल जाए कि उनकी सरकार आएगी। सन् 2014 के अखबार खंगाले जाएंगे तो दीर्घकालीन रणनीति से उपजे आत्मविश्वास पर आधारित राम माधव का यह बयान मिल जाएगा। संघ, सेवा, अनुशासन, त्याग, समर्पण और राष्ट्र भक्ति का पर्याय है तथा भाजपा संघ के संरक्षण में ही सत्ता के खेल खेलती हैं,अब बताओ ऐसे संगठन से, वे राजनीतिक दल कैसे पार पा सकते है, जो शुद्ध रूप से सत्ता स्वार्थ के लिए एक जगह इकट्ठे हुए हो? ************

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बहनें कितनी फजीत हो सकती है, बैंक वाले कितने परेशान हो सकते हैं, सरकारी अमला कैसे दौड़ भाग करता है, शायद यही सब देखने के लिए लाए हैं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लाड़ली बहना योजना? https://bebakazad.in/%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%ab%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%a4-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b9/ https://bebakazad.in/%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%ab%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%a4-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b9/#respond Tue, 11 Apr 2023 09:05:47 +0000 https://bebakazad.in/?p=12159 पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ 9009597101 इन दिनों मध्यप्रदेश में चुनावी रेवड़ियां बांटी जा रही हैं और जिनके पास बांटने को रेवड़ियां नहीं है, वे आश्वासन की रेवड़ियां बांट रहे हैं, गैस सिलेंडर पांच सौ रुपए में कर देंगे, जैसे इनके बाप का माल है। सीधे-सीधे वोट पाने के लिए लालच दिए जा रहे हैं […]

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पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ 9009597101

इन दिनों मध्यप्रदेश में चुनावी रेवड़ियां बांटी जा रही हैं और जिनके पास बांटने को रेवड़ियां नहीं है, वे आश्वासन की रेवड़ियां बांट रहे हैं, गैस सिलेंडर पांच सौ रुपए में कर देंगे, जैसे इनके बाप का माल है। सीधे-सीधे वोट पाने के लिए लालच दिए जा रहे हैं और देश का चुनाव आयोग ना जाने कौन से पर्वत पर बैठकर राम धुन गा रहा है? इन दिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लाड़ली बहना योजना का ढिंढोरा पीट रखा है, जिसमें सारा मध्यप्रदेश फजीत हो रहा है, परेशान हो रहा है। प्रदेशभर की बहनें खाना-पीना, घर-बार, बच्चे, गृहस्थी सब छोड़कर, बैंक-बैंक भटक रही है,आन लाइन दुकानों पर डेरा जमाकर बैठी है, मुख्यमंत्री की इन बहनों के साथ वे बच्चे भी परेशान हो रहे हैं, जो बिना मां के घर पर नहीं रह सकते। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री की ये बहनें, बैंकों में दुत्कारी जा रही है, अपमानित की जा रही हैं, बैंक वाले भी क्या करें, बैंकों में मजमा ही इतना लगा हुआ है, वे किसे-किसे समझाए और कैसे समझाए? बैंक वालों का झल्लाना स्वाभाविक है, आखिर वे भी इंसान है। बैंकों की हालत यह है कि लाड़ली बहना योजना ने बैंकों के सारे कामकाज अस्त-व्यस्त कर दिए हैं, प्रभावित कर दिए हैं,जिन बहनों के खाते नहीं थे,वे खाते खुलवाने निकल पड़ी है,कुल मिलाकर कहा जाए तो बैंकों ने अपनी दैनिक दिनचर्या के कामकाज छोड़कर, लाड़ली बहना योजना को हाथ में ले लिया है। सरकारी अमले की यह हालत है कि वह मैदान में उतरकर मुख्यमंत्री की लाड़ली बहनों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में बैंक की ओर भेज रहा हैं। सरकारी अमले के लोग पहले ही काम से परहेज करते हैं, ऊपर से लाड़ली बहना योजना आ गई, उन्हें और बहाना मिल गया काम ना करने का। कुल मिलाकर कहा जाए तो इस समय सारा प्रदेश परेशान हैं मुख्यमंत्री की लाड़ली बहना योजना के चक्कर में। लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को सरकार पांच वर्ष तक एक-एक हजार रूपए महिना देगी और एक हजार रुपए महीना पाने के चक्कर में प्रदेशभर की महिलाएं खुद भी परेशान हो रही हैं और व्यवस्था को भी परेशान कर रही हैं। लाड़ली बहनों का ही पैसा लाड़ली बहनों को दिया जा रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ऐसा प्रदर्शित कर रहे हैं,मानो वे अपने बाप-दादा की जमा पूंजी प्रदेश की बहनों पर लुटा रहे हो? मुख्यमंत्री शिवराज, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ये सब चुनाव को धंधे में तब्दील करते जा रहे हैं, जनता को लालच दे रहे हैं और चुनाव आयोग चुप बैठा है, क्यों? क्या आचार संहिता लागू होने के बाद ही चुनाव आयोग मैदान संभालता है? बाकी समय चुनाव आयोग क्या करता है, जनता को पता तो चले? यदि ऐसा है तो आचार संहिता कम से कम चुनाव से छह महीने पहले लागू होना चाहिए, ताकि शिवराज कमलनाथ जैसे धंधेबाज नेताओं पर लगाम लग सके। इधर शिवराज ने महिलाओं को एक हजार रुपए महीना देने की जुगत भिड़ाई तो उधर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जनता को गैस सिलेंडर पांच सौ रुपए में कर देने का लालिपाप दे रहे हैं। यदि राजनीति के इन मठाधीशों को सरकार बनाने के लिए जनता को लालच देना पड़ रहा है तो जनता को समझ जाना चाहिए, ये अपनी विश्वसनीयता खो चुके हैं, जनता की नजरों से उतर चुके हैं। प्रदेशभर की बहनों को समझना चाहिए लाड़ली बहना योजना सिर्फ चुनावी रेवड़ी है और चुनाव के बाद यह रेवड़ी कब तक बंटेगी इसकी कोई गारंटी नहीं है? प्रदेश की भोलीभाली महिलाओं, लाड़ली बहना योजना अलोकप्रिय हो चुके मुख्यमंत्री का चुनावी हथकंडा है, यदि मुख्यमंत्री शिवराज आप लोगों के प्रति इमानदार होते तो मुख्यमंत्री बनते ही लाड़ली बहना योजना लागू कर देते, अभी तक बहनों को 36,000 रूपए एक हजार रुपए प्रति माह के हिसाब से मिल चुके होते। कड़वा सच तो यह है कि चुनावी हथकंडे के रूप में लाई गई मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने प्रदेशभर में बहनों को परेशान कर दिया है,फजीत कर दिया है। मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं प्रदेश की बहनें कितनी फजीत हो सकती हैं, बैंक वाले कितने परेशान हो सकते हैं और सरकारी अमला कैसे भागदौड़ करता है, शायद यही सब देखने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ये लाड़ली बहना योजना लेकर आए है? **************

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जन हितार्थ इमानदार कर्तव्य के लिए हादसों का इंतजार कब तक किया जाता रहेगा, लोगों के मरने के बाद ही प्रशासन में बैठे अधिकारी क्यों कर्तव्य निभाने सड़क पर आते हैं? https://bebakazad.in/%e0%a4%9c%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5-%e0%a4%87%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b5/ https://bebakazad.in/%e0%a4%9c%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5-%e0%a4%87%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b5/#respond Sat, 08 Apr 2023 18:07:04 +0000 https://bebakazad.in/?p=12151 पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ *9009597101* हाल ही में देवास कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने एक पक्षीय आदेश जारी किया और अधिनस्थों को निर्देशित किया है कि ऐसे नलकूप, जिनकी मोटर निकाली जा चुकी है, जो दुर्घटना का कारण बन सकते हैं, जनहानि का कारण बन सकते हैं, कमजोर छज्जे,कुए-बावड़ियों पर बने निर्माण आदि की जानकारी […]

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पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ *9009597101*

हाल ही में देवास कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने एक पक्षीय आदेश जारी किया और अधिनस्थों को निर्देशित किया है कि ऐसे नलकूप, जिनकी मोटर निकाली जा चुकी है, जो दुर्घटना का कारण बन सकते हैं, जनहानि का कारण बन सकते हैं, कमजोर छज्जे,कुए-बावड़ियों पर बने निर्माण आदि की जानकारी एकत्रित की जाए और उनको लेकर विधि सम्मत कार्रवाई की जाए। उल्लेखनीय हैं कलेक्टर देवास ऋषभ गुप्ता ने यह आदेश इंदौर में हुए हादसे के बाद जारी किया हैं, जिसमें मंदिर के कुएं पर बने फर्श के टूट जाने से बेशकीमती 36 जानें चली गई, अर्थात इस जनहितैषी आदेश ने जारी होने के लिए हादसे का इंतजार किया है, तीन दर्जन लोगों के मरने का इंतजार किया है। जो निर्माण, लापरवाही , अतिक्रमण, संभावित दुर्घटना का कारण बन सकते है, उन्हें हटाने में प्रशासन को किसी प्रकार की कोई कोताही नहीं बरतना चाहिए। ऐसी कोई घटना-दुर्घटना घटित होते हैं तो इसका दण्ड प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारियों को ही भुगतना पड़ता है,हर घटना के बाद दंडित होते अधिकारी कर्मचारी उदाहरण है, प्रमाण है। घटना दुर्घटना के कारण, हमेशा नेताओं की सरपरस्ती में निर्मित होते हैं और अधिकारी, नेताओं को खुश करने के लिए इन दुर्घटना के कारणों को नजरंदाज करते रहते हैं और दुर्घटना घट जाती है तो नेता हाथ ऊंचे कर देते हैं,टसुए बहाने लगते हैं तथा कटघरे में अधिकारी ही खड़े होते आए हैं। यदि ऐसे कारण, जो दुर्घटना के कारण बन सकते हैं, जिसमें लोगों की जानें जा सकती हैं,उन कारणों का उन्मूलन करने को लेकर गंभीर क्यों नहीं होते अधिकारी? आसपास कोई गंभीर घटना घटित होती है तो सीमा से लगे जिलों के कलेक्टर, एसपी एकदम कर्तव्यनिष्ठ हो जाते हैं, आदेश जारी कर देते हैं, अधिनस्थों को निर्देशित कर देते हैं,दो-चार दिन जनहितैषी कर्तव्यनिष्ठता अपने चरम पर होती है और बाद में सब धीरे-धीरे सामान्य हो जाता है और अधिकारियों की कर्तव्यनिष्ठता, नए हादसे के इंतजार में अपने कार्यालय में कुर्सी तोड़ना प्रारंभ कर देती हैं। देवास की जनता ने अधिकारियों की ऐसी कर्तव्यनिष्ठता अनेक बार देखी है। आसपास दुर्घटना हो जाती है तो पुलिस विभाग, परिवहन विभाग कर्तव्यनिष्ठ होकर माथा उतारनी करने सड़क पर आ जाते है, अन्यथा इन विभागों के जिम्मेदार अपनी-अपनी जुगत में लगे रहते हैं और बेचारी जनता इनके निकम्मेपन का दंश झेलती रहती हैं। ज्यादा चिंताजनक स्थिति देवास में परिवहन विभाग की है, देवास में जया वसावा जिला परिवहन अधिकारी हैं, जो यहां बरसों से पदस्थ हैं, एक आध बार ट्रांसफर भी हुआ, लेकिन रूकवा लिया। देवास जैसा आरामदायक और लोभी, नासमझ नेताओं से भरा शहर दूसरा कोई नहीं, इसलिए अधिकारी देवास में आकर देवास से जाने का नाम नहीं, लेते। जिला आबकारी अधिकारी वंदना पांडे और जिला जनसंपर्क अधिकारी गुप्ता भी अनमने मन से देवास आए थे, लेकिन अब देवास के होकर रह गए हैं, परिवहन अधिकारी जानती है, देवास प्रशासनिक अधिकारियों का अभयारण्य है। यही कारण है कि कभी कोई दुर्घटना हो जाए,या ऊपर बैठे अधिकारियों को कुछ काम करके दिखाना हो, अथवा टारगेट पूरा करना हो तो ही परिवहन अधिकारी जया वसावा सड़क पर आती हैं, अन्यथा परिवहन विभाग में धूलधोए बाबू धूल उड़ाया करते हैं। पीछे जाकर देखें तो उज्जैन जिले में स्कूली वाहन की दुर्घटना हुई थी और फूल से कोमल बच्चें काल का ग्रास बन गए थे,तब मैडम जी अचानक कर्तव्यनिष्ठ हो गई थी, स्कूली वाहनों को चेक करने सड़क पर निकल पड़ी थी और उसी दौरान एक स्कूल के वाहन की चेकिंग करते हुए भाजपा नेता से बहस भी हुई थी। उस समय भाजपा नेता ने यह कहते हुए परिवहन अधिकारी को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी कि सड़कों पर अनगिनत वाहन सड़कों पर नियम विरुद्ध दौड़ रहे हैं, बिना टैक्स चुकाए दौड़ रहे हैं,उन पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती? मीडिया कैमरों के सामने कटघरे में खड़ी की गई परिवहन अधिकारी जवाब नहीं दे पाई थी। यह सही है देवास के परिवहन विभाग में बस आनरों का दबदबा है, एक तरह से देखा जाए तो कथित तौर पर देवास का परिवहन विभाग बस मालिकों की सुविधानुसार ही संचालित होता है और परिवहन अधिकारी ने अपने आपको इस व्यवस्था में ढाल लिया है। उस समय भाजपा नेता द्वारा उठाई गई बातें निराधार नहीं थी, देवास की जनता को उम्मीद थी कि सार्वजनिक रूप से परिवहन अधिकारी पर नजर अंदाजी, निष्क्रियता का आरोप लगा है, परिवहन अधिकारी इसे प्रतिष्ठा का बिंदु बनाएगी और नियम विरुद्ध दौड़ रही बसों पर कार्रवाई करेगी, लेकिन जनता निराश हुई। आज जब इंदौर की घटना के बाद देवास कलेक्टर ने जन हित में आदेश जारी किया है तो जिला परिवहन अधिकारी जया वसावा से यह प्रश्न प्रासंगिक हो जाता है कि उज्जैन जिले में हुई दुर्घटना के बाद आपने देवास में स्कूल वाहनों को लेकर चेकिंग अभियान चलाया था,वह भी भाजपा नेता से बहस के बाद बीच में छोड़ दिया था, क्या परिवहन अधिकारी और उनकी टीम ने उसके बाद स्कूल वाहनों पर ध्यान दिया? नहीं दिया तो क्यों नहीं दिया? भगवान ना करे खराब वाहनों के कारण कोई दुर्घटना घटित हुई तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? कहने का तात्पर्य इतना ही है कि प्रशासन में बैठे मठाधीशों को जनहित में निर्णय लेने के लिए हादसों का इंतजार नहीं करना चाहिए, नागरिकों के मरने का इंतजार नहीं करना चाहिए। कलेक्टर ने आदेश जारी कर दिया, धन्यवाद, लेकिन आदेश का अधिनस्थ कितनी गंभीरता से पालन करते और कराते हैं, यह देखना भी जरूरी है। ***************

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किसानों को एफआईआर की धमकी दे देना कलेक्टर की झुंझलाहट, समझा जा सकता है देवास कलेक्टर ऋषभ गुप्ता किस प्रशासनिक दौर से गुजर रहे होंगे ? https://bebakazad.in/%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%8f%e0%a4%ab%e0%a4%86%e0%a4%88%e0%a4%86%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a7%e0%a4%ae%e0%a4%95%e0%a5%80/ https://bebakazad.in/%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%8f%e0%a4%ab%e0%a4%86%e0%a4%88%e0%a4%86%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a7%e0%a4%ae%e0%a4%95%e0%a5%80/#respond Thu, 06 Apr 2023 11:12:37 +0000 https://bebakazad.in/?p=12138 पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)9009597101 पिछले दिनों देवास कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने किसान नेताओं को एफआईआर की धमकी दे दी और किसान नेता यह कहते हुए लौट आए कि जब कलेक्टर इस तरह बात करेंगे तो उनके अधिनस्थ अधिकारी हमसे कैसी बात करेंगे? किसानों का कहना सही है,यह तो कलेक्टर का अधिनस्थ अधिकारियों को किसानों […]

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पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)9009597101

पिछले दिनों देवास कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने किसान नेताओं को एफआईआर की धमकी दे दी और किसान नेता यह कहते हुए लौट आए कि जब कलेक्टर इस तरह बात करेंगे तो उनके अधिनस्थ अधिकारी हमसे कैसी बात करेंगे? किसानों का कहना सही है,यह तो कलेक्टर का अधिनस्थ अधिकारियों को किसानों के प्रति उपेक्षित रवैया अपनाने को प्रेरित करनेवाला व्यवहार रहा। किसानों की मांगों को भी गलत नहीं कहा जा सकता, किसानों का शोषण करने वाले लोग सारे तंत्र पर हावी है और कलेक्टर की समस्या यह है कि उन्हें सत्ता के बगलगीर इन किसान शोषक प्रभावशाली लोगों से समन्वय स्थापित करके कलेक्टर के रूप में काम करना है। किसान अपनी उपज जिस कांटे पर तुलवाकर बेचना चाहता है, नियमानुसार प्रशासन ने उस कांटे पर तुलवाकर किसान की उपज खरीदी करने की व्यवस्था करना चाहिए,ना कि उन्हें एफआईआर कराने की धमकी दी जाना चाहिए। प्रायः देखा गया है कलेक्टर ऋषभ गुप्ता शांत चित्त व्यक्तित्व के स्वामी हैं, आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को वे धैर्य से सुनते हैं, उसकी समस्या का निराकरण करने की कोशिश करते हैं, बावजूद उन्होंने किसानों के प्रतिनिधियों को एफआईआर करा देने की धमकी दे दी, जिसके कारण सारे ही क्षेत्रों में आश्चर्य व्यक्त किया गया है। ऋषभ गुप्ता समझते हैं कि नीचे नहीं सुनी जाती, तब ही लोग कलेक्टर तक पहुंचते हैं और कलेक्टर उम्मीद लेकर आने वाले लोगों को धमकी देकर डराने लगेंगे तो कैसे काम चलेगा? इसमें कोई दो मत की बात नहीं कि ऋषभ गुप्ता कांटों का ताज पहनकर कर्तव्य का निर्वाह कर रहे हैं। देवास जिले के तमाम नेता सिर्फ अपनी सोचते हैं, अपने पट्ठों के बारे में सोचते हैं,आम जन के बारे में सोचने वाला कोई नहीं है, यही कारण है कि अलग अलग वर्गों को अपने प्रतिनिधियों के नेतृत्व में अपनी समस्याओं के लिए आवाज उठाना पड़ती हैं और ऐसे में ऋषभ गुप्ता जैसा शांत चित्त कलेक्टर एफआईआर की धमकी देगा तो कैसे काम चलेगा?लोग यदि अपनी समस्या लेकर कलेक्टर तक पहुंच रहे हैं तो इसका सीधा सा मतलब है कि नीचे के अधिकारी इमानदारी से अपने कर्तव्य का निर्वाह नहीं कर रहे हैं और अपने निकम्मे अधिनस्थों की झल्लाहट कलेक्टर द्वारा किसानों पर उतारना ठीक नहीं कहा जा सकता। झुंझलाहट में कलेक्टर ने एफआईआर की धमकी किसानों को दे तो दी, बाद में वे भी अपने व्यवहार को लेकर अपने आप पर झल्लाए होंगे ? ऋषभ गुप्ता भी क्या करें, पूर्व कलेक्टर चंद्रमौली शुक्ला उनके लिए विरासत में प्रशासनिक कबाड़खाना छोड़कर गए हैं, वे कबाड़ से जुगाड़ करें तो कितना? आखिर उनकी झल्लाहट, झुंझलाहट कहीं तो निकलेगी,सो किसानों पर निकल गई। कलेक्टर द्वारा किसानों को दी गई एफआईआर की धमकी को परेशान कलेक्टर की झल्लाहट, झुंझलाहट समझकर किसानों ने खारिज कर देना चाहिए। *****************”

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जन धन पर डाका डालने वाले भ्रष्टों के प्रधान आचार्य, जनपद सीईओ माधवाचार्य, इनके संरक्षण में निकलते रहे पैसे, बिना किए कार्य, ऐसे भ्रष्ट संरक्षक अधिकारी की देखरेख में कैसे हो गांवों का उद्धार? https://bebakazad.in/%e0%a4%9c%e0%a4%a8-%e0%a4%a7%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%a1%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a1%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a5%8d/ https://bebakazad.in/%e0%a4%9c%e0%a4%a8-%e0%a4%a7%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%a1%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a1%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a5%8d/#respond Sat, 01 Apr 2023 07:56:44 +0000 https://bebakazad.in/?p=12128 पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)9009597101 मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल धार जिले की कुक्षी तहसील की ग्राम पंचायत लोहारी, निसरपुर विकास खण्ड में आती हैं और इस विकास खण्ड के जनपद सीईओ माधवाचार्य हैं। इस जनपद सीईओ के संरक्षण में कहें, या मार्गदर्शन में कहें, ग्राम पंचायत लोहारी में एक से बढ़कर एक भ्रष्टाचार हुए, लेकिन […]

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पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)9009597101

मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल धार जिले की कुक्षी तहसील की ग्राम पंचायत लोहारी, निसरपुर विकास खण्ड में आती हैं और इस विकास खण्ड के जनपद सीईओ माधवाचार्य हैं। इस जनपद सीईओ के संरक्षण में कहें, या मार्गदर्शन में कहें, ग्राम पंचायत लोहारी में एक से बढ़कर एक भ्रष्टाचार हुए, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं और शर्म की बात यह है कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री देश, प्रदेश के छिलंगे (शिखर) पर बैठकर इमानदारी के ढोल पीट रहे हैं। ग्राम पंचायत लोहारी में एक से अधिक बार ऐसा हुआ है कि विकास कार्य किए ही नहीं और सरपंच,पंचायत सचिव, ठेकेदार जनता के पैसे निकाल कर खा गए तथा निष्क्रिय जनपद सीईओ माधवाचार्य, आफिस में कुर्सी पर बैठकर बुदबुदाते रहे कि “जनता का नहीं,यह मेरे बाप माल है,खा जाओ भ्रष्टों भर-भर पेट”। जनपद सीईओ माधवाचार्य का क्या काम था और वे क्या करते रहे? जांच का विषय है। वैसे तो ग्राम पंचायत लोहारी में एक से एक कारनामें हुए और हर कारनामें में जनपद सीईओ माधवाचार्य की भूमिका संरक्षक वाली रही, लेकिन सांसद निधि से स्ट्रीट लाइट लगाने वाले मामले में तो इस अधिकारी ने बेशर्मी की हद पार कर दी, भ्रष्टों को बचाने के लिए ये अधिकारी सीएम हेल्पलाइन पर झूठ बोलने से भी बाज नहीं आया। दरअसल सन् 2018-19 में सांसद निधि से ग्राम पंचायत लोहारी में स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए 14,89,874 (चौदह लाख उनब्बे हजार आठ सौ चौहत्तर) रूपए स्वीकृत हुए, शिकायत है कि गांव में स्ट्रीट लाइट का काम किया ही नहीं और सरपंच श्रीमती सुंदरबाई डोडवा, सचिव मंसाराम पाटीदार, और ठेकेदार विक्रम चौयल ने पैसा निकाल लिया। ग्राम के ही जागरूक नागरिक ने मय प्रमाण सभी जिम्मेदारों को शिकायत की,पता नहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल में शिकायतों का क्या होता है? दिनांक 28 नवंबर 2022 को शिकायतकर्ता ने प्रमाण के साथ जनपद सीईओ को भी शिकायत की, लेकिन जनपद सीईओ ने शिकायत पर संज्ञान लेना जरूरी नहीं समझा। जनपद सीईओ माधवाचार्य भ्रष्टों को बचाने के लिए कितने दृढ़संकल्पित है, इससे पता चलता है कि एमपीईबी शिकायतकर्ता को आरटीआई के तहत 25 नवंबर 2022 को जानकारी देती हैं कि आज दिनांक तक ठेकेदार विक्रम चौयल की तुलसी कंस्ट्रक्शन कंपनी को कार्य पूर्ण होने का प्रमाण पत्र नहीं दिया गया है और 24 नवंबर 2022 को जनपद सीईओ माधवाचार्य सीएम हेल्पलाइन पर जवाब प्रस्तुत करते हैं कि एमपीईबी द्वारा प्रदान किए प्रमाण पत्र के आधार पर पंचायत ने ठेकेदार को भुगतान किया है। यदि एमपीईबी जनपद सीईओ द्वारा सीएम हेल्पलाइन पर जवाब देने के एक दिन बाद शिकायतकर्ता को आरटीआई में जानकारी दे रही है कि एमपीईबी ने आज दिनांक तक कार्य पूर्ण होने का प्रमाण पत्र नहीं दिया है तो पंचायत ने कौन से कूटरचित दस्तावेज देखकर पंचायत ने ठेकेदार को भुगतान कर दिया? जनपद सीईओ ने कूट रचित दस्तावेजों का परिक्षण करना क्यों जरूरी नहीं समझा? क्या कूट रचित दस्तावेज तैयार करने के अपराध में जनपद सीईओ की भी संलिप्तता है? इसका सीधा सा अर्थ है बिना काम करे पैसा खाने के लिए सरपंच श्रीमती सुंदरबाई डोडवा, सचिव मंसाराम पाटीदार और ठेकेदार विक्रम चौयल ने कूट रचित दस्तावेज बनाकर अपराध किया है और जनपद सीईओ माधवाचार्य ने जानबूझकर इस अपराध को नजरंदाज करके अपराध किया है। सांसद निधि भी आम जनता की ही निधि होती हैं और भ्रष्ट इसे लूट ले जाए तो सारी व्यवस्था को शर्मसार होने की आवश्यकता है, यहां तो जनपद सीईओ माधवाचार्य, भ्रष्टों के प्रधान आचार्य बनकर उन्हें बचाने का अपराध करते नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज के शासनकाल में ऐसे अधिकारियों के लिए कोई व्यवस्था है या नहीं? या मुख्यमंत्री शिवराज अमल से दूर मुंह में सिद्धांत रखते हैं, बिना काम का बेकार सा वृतांत रखते हैं?**********************

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एकेवीएन की सड़क हजम कर जाने वाली देवास की आयशर कंपनी के श्रमिक शोषण पर कलेक्टर ध्यान दे,श्रम विभाग कंपनी का पालतू होकर, मजदूरों के लिए फालतू हो गया https://bebakazad.in/%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%95-%e0%a4%b9%e0%a4%9c%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8-2/ https://bebakazad.in/%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%95-%e0%a4%b9%e0%a4%9c%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8-2/#respond Fri, 03 Feb 2023 14:40:53 +0000 https://bebakazad.in/?p=11845 पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ *9009597101* महत्वपूर्ण वोटरों को डिस्पोजल समझने वाले जनप्रतिनिधियों से निराश हो चुका देवास का मजदूर तबका, देवास कलेक्टर ऋषव गुप्ता से उम्मीद करता है कि वे देवास में स्थापित औद्योगिक इकाइयों पर ध्यान दें, क्योंकि देवास का श्रम विभाग एवं इसके जिम्मेदार, औद्योगिक इकाइयों के पालतू बनकर, शोषित होते मजदूरों […]

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पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ *9009597101*

महत्वपूर्ण वोटरों को डिस्पोजल समझने वाले जनप्रतिनिधियों से निराश हो चुका देवास का मजदूर तबका, देवास कलेक्टर ऋषव गुप्ता से उम्मीद करता है कि वे देवास में स्थापित औद्योगिक इकाइयों पर ध्यान दें, क्योंकि देवास का श्रम विभाग एवं इसके जिम्मेदार, औद्योगिक इकाइयों के पालतू बनकर, शोषित होते मजदूरों के लिए फालतू हो गए हैं। देवास के जनप्रतिनिधियों ने औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले मजदूरों से सिर्फ वोट लेने तक का रिश्ता रखा है, मजदूरों के दुःख-दर्द, परेशानियों से कभी वास्ता नहीं रखा। देवास औद्योगिक क्षेत्र है और यहां मजदूर वर्ग ज्यादा निवास करता है, यह वर्ग जनप्रतिनिधियों को सत्ता सुख प्रदान करने में अहम भूमिका निभाता है, लेकिन जनप्रतिनिधि इस वर्ग को डिस्पोजल से ज्यादा कुछ नहीं समझते। जनप्रतिनिधियों ने औद्योगिक इकाइयों और उद्योगपतियों के हितों का तो ध्यान रखा है, लेकिन मजदूरों के लिए कभी चिंता नहीं पाली।

नवागत कलेक्टर को यह जानकर आश्चर्य होगा कि नगर निगम भी देवास की आबोहवा खराब कर लाखों करोड़ों रुपए कमाने वाली औद्योगिक इकाइयों से तो नाम मात्र का जल कर, सम्पत्ति कर लेता है और नागरिकों से जमकर, कर लेकर अपने खर्चों की भरपाई करता है, लेकिन कोई जनप्रतिनिधि नागरिकों की पीड़ा को समझने को तैयार नहीं हैं, इसलिए मजदूर तबका अधिकार संपन्न नवागत कलेक्टर से उम्मीद करता है कि वे मजदूर तबके सहित देवास के नागरिकों की पीड़ा को समझे और उसे दूर करने की दिशा में पहल करें।जाइंडियर कंपनी में तो देवास के मूल निवासियों को लिया ही नहीं जाता, जनप्रतिनिधियों ने कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया,कहने का तात्पर्य देवास के औद्योगिक क्षेत्र में ऐसी कईं अनियमितता और मनमानियां फैली है,जिन पर कभी ध्यान नहीं दिया गया। कलेक्टर श्रम विभाग को कर्तव्यनिष्ठ बनाएं तो मजदूरों का भला हो। श्रम विभाग के निकम्मेपन से वैसे तो देवास के हर औद्योगिक संस्थान में मजदूरों का शोषण हो रहा है, लेकिन देवास की आयशर कंपनी में श्रमिक शोषण अमानवीयता की हदों को पार कर रहा है और यहां का प्रबंधन राक्षस बना हुआ है। मजदूरों के अनुसार आयशर कंपनी में दुष्यंत जर्गर नामक अधिकारी गरीब मजदूरों की चाय में से भी कमीशन खाने की नीयत रखता है। आयशर कंपनी का मजदूर इतना डरा-सहमा है कि उसमें शोषण के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत ही नहीं, क्योंकि आवाज उठाने वाले को काम से बंद कर दिया जाता है। मजदूरों के नेता प्रबंधन का लालीपाप चूसकर शोषित होते मजदूरों को ठेंगा दिखाते हैं। प्रबंधन मजदूरों के नेताओं को कभी रामाश्रय होटल में पार्टी दे देता है, कभी केंटिन में फ्री खाने का लालच देकर अपना पालतू बना लेता है, हाल ही में एच. आर. मैनेजर आशीष एवं संजय चौधरी मजदूर नेताओं को मेंहदीपुर बालाजी घुमाने ले गए। इन छोटे छोटे प्रलोभनों से मजदूर नेता कंपनी के नजरिए से अपने मजदूर साथियों को देखना प्रारंभ कर देते हैं।

आयशर कंपनी में लगभग दो सौ मजदूर नियमित है और हजारों मजदूर ठेकेदारी प्रथा के अंतर्गत नाममात्र मजदूरी पर काम करते हैं। आयशर कंपनी में मजदूर उपलब्ध कराने वाले एक से अधिक ठेकेदार है, जो आसमान वेतन देकर मजदूरों का खून पी रहे हैं और इन ठेकेदारों पर कंपनी प्रबंधन के अधिकारी एवं श्रम विभाग का वरदहस्त है। दुष्यंत जर्गर नामक अधिकारी को मजदूर सबसे बड़ा अमानवीय बताते हैं, जो मजदूरों की चाय में से भी कमीशन खाने की नीयत रखता है। गेट पर ड्यूटी देने वाले गार्डों को चाय तक नहीं दी जाती हैं, जबकि उनके वेतन में से चाय के नाम पर ढाई सौ रुपए काटे जाते हैं। आयशर कंपनी एकेवीएन की पूरी सड़क हजम कर गई, लेकिन सारा प्रशासन दम साधे देखता रहा। कांग्रेस के एक नेता ने इस मामले को उठाया था, लेकिन बाद में उसने भी इस ओर से ध्यान हटा दिया। आयशर कंपनी में दुष्यंत जर्गर नामक अधिकारी नेताओं को खुश करने के लिए कंपनी में काम करने वाले मजदूरों को भीड़ के रूप में ले जाता और उनकी रैली जलसों को सफल बनाता है। डरे-सहमे शोषित, पीड़ित मजदूर कलेक्टर ऋषव गुप्ता से उम्मीद करते हैं कि वे आयशर कंपनी पर अपना ध्यान केंद्रित करें, कंपनी के जबड़े से एकेवीएन की सड़क निकाले और निकम्मे हो चुके श्रम विभाग को कर्तव्यनिष्ठ बनाएं। **************

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ग्राम पंचायत लोहारी में स्ट्रीट लाइट लगाई नहीं और लगभग पंद्रह लाख रुपए खा गए सब मिलकर, शिकायत के बाद जांच प्रभावित करने में जुटे भ्रष्ट, शिवराज के शासन में बेलगाम नौकरशाह जमकर कर रहे भ्रष्टाचार https://bebakazad.in/%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%aa%e0%a4%82%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a4-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8/ https://bebakazad.in/%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%aa%e0%a4%82%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a4-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8/#respond Thu, 02 Feb 2023 14:46:00 +0000 https://bebakazad.in/?p=11828 पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ 9009597101 आदिवासी बहुल धार जिले की कुक्षी तहसील की ग्राम पंचायत लोहारी इंच-इंच भ्रष्टाचार के पाप से सराबोर है, ऐसा लगता है, निसरपुर जनपद सीईओ माधवाचार्य ने भ्रष्टाचार का पूरा स्वेटर बुन दिया है और इस भ्रष्टाचार के स्वेटर का सिरा लोहारी का पंचायत सचिव मंसाराम पाटीदार है। जनपद सीईओ […]

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पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ 9009597101

आदिवासी बहुल धार जिले की कुक्षी तहसील की ग्राम पंचायत लोहारी इंच-इंच भ्रष्टाचार के पाप से सराबोर है, ऐसा लगता है, निसरपुर जनपद सीईओ माधवाचार्य ने भ्रष्टाचार का पूरा स्वेटर बुन दिया है और इस भ्रष्टाचार के स्वेटर का सिरा लोहारी का पंचायत सचिव मंसाराम पाटीदार है। जनपद सीईओ माधवाचार्य पंचायत सचिव मंसाराम पाटीदार को बचाने के लिए निसरपुर छोड़ने को तैयार नहीं हैं। उल्लेखनीय है जनपद सीईओ का स्थानांतरण हो गया था, लेकिन वे गए नहीं, क्षेत्र में कहा जा रहा है कि जनपद सीईओ माधवाचार्य सिर्फ पंचायत सचिव मंसाराम पाटीदार को बचाने के लिए निसरपुर नहीं छोड़ रहे हैं,

क्योंकि पंचायत सचिव जनपद सीईओ द्वारा बुने गए भ्रष्टाचार के स्वेटर का वह सिरा है, जिसके खींचते ही जनपद सीईओ का भ्रष्टाचार स्वेटर, उधड़ कर सामने आ जाएगा। ग्राम लोहारी के पंचायत सचिव मंसाराम पाटीदार ने जनपद सीईओ माधवाचार्य के संरक्षण में भ्रष्टाचार की ऐसी-ऐसी इबारत लिख दी है कि आंखें फटी की फटी रह जाए। ग्राम पंचायत लोहारी की यह हालत है कि खाता ना बही, जो मंसाराम कह दे, बस वही सही। पंचायत में कागज पानड़े कुछ नहीं है, पिछला रिकार्ड मांगों तो पंचायत सचिव मंसाराम पाटीदार हैं हैं करके खीसें निपोरने लगता है, सबकुछ सामने है, लेकिन जनपद सीईओ कार्रवाई करने को तैयार नहीं, इसका अर्थ क्या लगाया जाए? इससे तो यही अनुमान लगाया जा सकता है कि पंचायत सचिव मंसाराम पाटीदार ने जो भी भ्रष्टाचार किए हैं, जनपद सीईओ माधवाचार्य के संरक्षण में किए हैं। जनपद सीईओ पंचायत सचिव को बचाने के लिए इतने उतावले हैं कि वे सीएम हेल्पलाइन पर झूठी जानकारी देने से भी परहेज नहीं करते। वैसे तो धार जिले की कुक्षी तहसील की ग्राम पंचायत लोहारी में एक से एक अनियमितता, मनमानी, भ्रष्टाचार की इबारतें है, लेकिन यहां सन् 2018-19 में स्ट्रीट लाइट में हुए घोटाले की बात की जा रही हैं, जिसमें ठेकेदार ने काम किया ही नहीं और लगभग पंद्रह लाख रुपए का भुगतान प्राप्त कर लिया। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर फोर्थ लेवल पर पहुंचकर लम्बित हैं।

इस घोटाले को लेकर जिला स्तर पर कलेक्टर धार, जिला पंचायत सीईओ धार, एसडीएम कुक्षी, जन सुनवाई धार में भी शिकायत की गई, लेकिन सारी व्यवस्था मानो बिना काम किए भुगतान लेने वाले ठेकेदार को बचाने में जुटी हुई हैं। एमपीईबी नवंबर 2022 में जानकारी उपलब्ध कराती हैं कि ठेकेदार को कार्य का पूर्णता प्रमाण पत्र नहीं दिया गया है, वही एमपीईबी दिसंबर 2022 में जानकारी देती है कि ठेकेदार को कार्य का पूर्णता प्रमाण पत्र दे दिया गया, अर्थात मामला 2018-19 का, नवंबर 2022 में एमपीईबी कहती कार्य पूर्ण नहीं है और एक माह बाद दिसंबर 2022 में कार्य पूर्ण होने का प्रमाण पत्र दे देती हैं, जबकि ठेकेदार भुगतान कब का ही प्राप्त कर चुका, अब तो सिर्फ तमाम भ्रष्ट कागजों का पेट भरकर सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं, अपना गला बचाने का प्रयास कर रहे हैं।शिकायतकर्ता के पास एमपीईबी द्वारा उपलब्ध कराए गए दोनों जवाब उपलब्ध हैं। अब बताया जा रहा है, लोहारी का उजाला हजम कर जाने वाले, उजाले को चर जाने वाले ठेकेदार को बचाने के लिए वे लोग सक्रिय हो गए हैं, जो हमेशा संस्कार, संस्कृति, धर्म आधारित बात करते हैं, ईमानदार होने का ढोल पीटते हैं। वे उस ठेकेदार को सजा दिलाए, जिसने काम किए बिना भुगतान प्राप्त कर लिया, उस पंचायत सचिव को सजा दिलाए, जिसने बिना काम हुए ही भुगतान कर दिया, उस जनपद सीईओ को सजा दिलाए जो सबकुछ जानते हुए भी अंधा बना हुआ है तो समझ में आए वे ईमानदार है, संस्कारवान है, संस्कृति के संरक्षक है, लेकिन वे तो जन धन लूटने वाले ठेकेदार को बचाने के लिए अपनी ईमानदारी, अपने संस्कारों को ठेंगा दिखाते हुए नजर आ रहे हैं। शिवराज शासन में गांव-गांव भ्रष्टाचार फैला है, बेलगाम नौकरशाह भ्रष्टाचार की इबारतें लिख रहे हैं और मुख्यमंत्री बड़ी बड़ी बातें कर रहे हैं, पता नहीं ये नेता लोग इतनी बेशर्मी कहां से ले आते हैं? **************

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कमजोर कांग्रेस में दिग्विजय सिंह की खुद को मजबूत बताने की एकल कोशिश और दिग्विजय सिंह उसमें सफल हुए, राहुल गांधी का कतराना, दिग्विजय से भाजपा का पूरी ताकत से टकराना,प्रमाण है दिग्विजय सिंह सफल हुए https://bebakazad.in/%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b5/ Thu, 26 Jan 2023 06:07:44 +0000 https://bebakazad.in/?p=11742 पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार स्वतंत्र पत्रकार)_ 9009597101 अपने ही गुटबाज नेताओं द्वारा कमजोर कर दी गई कांग्रेस को पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मजबूती प्रदान करने के लिए भारत जोड़ो यात्रा निकाल रहे हैं और हाड़ कंपा देने वाली ठंड में मात्र टीशर्ट में पांव-पांव देश नाप रहे हैं। इसमें कोई दो मत की बात […]

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पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार स्वतंत्र पत्रकार)_ 9009597101

अपने ही गुटबाज नेताओं द्वारा कमजोर कर दी गई कांग्रेस को पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मजबूती प्रदान करने के लिए भारत जोड़ो यात्रा निकाल रहे हैं और हाड़ कंपा देने वाली ठंड में मात्र टीशर्ट में पांव-पांव देश नाप रहे हैं। इसमें कोई दो मत की बात नहीं कि राहुल गांधी शुद्ध रूप से वेंटीलेटर पर जा पहुंची कमजोर कांग्रेस को खड़ी करने का प्रयास कर रहे हैं और इस भारत जोड़ो यात्रा की आड़ में गुटबाजी से पीड़ित राजनीतिक दृष्टि से टीबी के मरीज हो चुके प्रादेशिक कांग्रेस नेता अपनी सेहत बनाने का जतन कर रहे हैं। यह यात्रा कांग्रेस को मजबूत करे या ना करे, लेकिन पप्पू करार दिए गए राहुल गांधी को अनुभव से परिपक्व कर जाएगी, ऐसा आम आदमी और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है। शीर्ष राजनीति करने वाले नेता के लिए जरूरी है कि वह देश की भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत से निकट से परिचित हो। राहुल की भारत जोड़ो पांव-पांव यात्रा से कांग्रेस को कितना लाभ हुआ, पता नहीं, लेकिन राहुल को लाभ हुआ है तथा इसका अनुभव निकट भविष्य में विरोधी भी महसूस करेंगे। कांग्रेस के अधिकांशतः नेताओं की राजनीति का आधार गांधी परिवार की चापलूसी रही हैं, लेकिन कांग्रेस में कुछ नेता ऐसे भी हैं, जो बिरले है, राजनीति के चितेरे है और कमजोर कांग्रेस में मजबूत है।

मध्यप्रदेश में ऐसे ही नेता हैं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, जो अपनी बोल वचन चतुरता से मजबूत बने हुए हैं। दिग्विजय सिंह अपने बयानों से चर्चा में रहते हैं और विरोधियों को और अपनी पार्टी के नेताओं को तिलमिलाने पर बाध्य कर देते हैं। एक बार फिर दिग्विजय सिंह ने उन प्रश्नों को उछाला है, जो जनमानस के बीच अनुत्तरित बने हुए हैं तथा कोई इनके जवाब भी नहीं देना चाहता, दिग्विजय सिंह ने उन प्रश्नों का सहारा लेकर कमजोर कांग्रेस में खुद को मजबूत नेता बताने की एकल कोशिश की है। हालांकि राहुल गांधी ने दिग्विजय सिंह के बयान से किनारा कर लिया है, क्योंकि राहुल को समझ में आ गया है कि सत्तारूढ़ पार्टी के नेता, धर्म का पड़ाव सफलतापूर्वक पार कर देश पर केंद्रित हो गए हैं और देश को लेकर, देश की सुरक्षा को लेकर किए गए सवालों पर ध्यान देना अपनी फजीहत कराना है, लेकिन दिग्विजय सिंह अलग मिट्टी के बने हुए हैं, उन्होंने सारी कांग्रेस को संदेश दे दिया कि उनमें सत्ता की आंख में आंख डालकर सवाल करने का साहस है। इस समय सारी भाजपा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर हमलावर हैं, जो प्रमाणित करता है कि दिग्विजय सिंह ने अनुत्तरित प्रश्न उछालकर भाजपा की दुखती नस पर हाथ रख दिया है। मध्यप्रदेश में दिग्विजय सिंह कार्यकर्ता के मामले में सबसे अमीर कांग्रेस नेता हैं, दस साल मुख्यमंत्री रहते हुए दिग्विजय सिंह ने कार्यकर्ता कमाएं हैं, जो प्रदेशभर में फेले है, मध्यप्रदेश में कार्यकर्ताओं के मामले में दिग्विजय सिंह से अमीर दूसरा कोई नेता नहीं। दिग्विजय सिंह कांग्रेस में कम और भाजपा में ज्यादा फेले है, यह दिग्विजयसिंह की राजनीतिक खासियत है कि उनका थाह विरोधी भी नहीं पा सकते।

कभी कभी तो ऐसा लगता है, मानो दिग्विजय सिंह कांग्रेस में रहकर भाजपा के लिए काम कर रहे हैं। हाल ही में दिग्विजय सिंह द्वारा उठाए गए सवालों ने कांग्रेस भाजपा दोनों को समान रूप से असहज किया है। दिग्विजय के बयान से राहुल गांधी का कतराना और भाजपा का दिग्विजय पर हमलावर हो जाना, चुगली कर रहा है कि वे अपने आपको मजबूत नेता बताने में सफल हुए हैं। **********

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कमलनाथ, राजनीतिक तोप ही है ज्योतिरादित्य सिंधिया, आपको मुख्यमंत्री बनवा दिया, आपने कद्र नहीं की तो भाजपा की सरकार बनवा दी, आपको और भाजपा दोनों को समान रूप से उपकृत किया है सिंधिया ने, सिंधिया तोप नहीं तो क्या है? https://bebakazad.in/%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%aa-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88/ https://bebakazad.in/%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%aa-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88/#respond Fri, 20 Jan 2023 15:55:40 +0000 https://bebakazad.in/?p=11729 ✍️पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ 9009597101 इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का वह बयान मीडिया तथा सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें कमलनाथ कांग्रेस के आंगन से उखड़कर भाजपा के खेत में स्थापित हो चुके राजनीति के वटवृक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया को कह रहे हैं कि सिंधिया कोई […]

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✍पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ 9009597101

इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का वह बयान मीडिया तथा सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें कमलनाथ कांग्रेस के आंगन से उखड़कर भाजपा के खेत में स्थापित हो चुके राजनीति के वटवृक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया को कह रहे हैं कि सिंधिया कोई तोप नहीं है, यदि तोप होते तो ग्वालियर में भाजपा, नगर निगम का चुनाव नहीं हारती। कमलनाथ का बयान, किसी भी दृष्टि से परिपक्व नेता के मुंह से निकला बयान नहीं कहा जा सकता, एक मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस अध्यक्ष का बयान नहीं कहा जा सकता। कमलनाथ का बयान चुगली कर रहा है कि कमलनाथ एक रेडिमेड नेता हैं, जनभावना का उन्हें ज्ञान नहीं है, वे जमीनी राजनीति से परिचित नहीं हैं और प्रदेश में कांग्रेस की दुर्गति का मूल कारण कमलनाथ ही हैं। जैसे कमलनाथ छिंदवाड़ा में मजबूत है, वैसे ज्योतिरादित्य सिंधिया सिर्फ ग्वालियर तक सीमित नहीं हैं, सिर्फ ग्वालियर में ही मजबूत नहीं है, वे समूचे मध्यप्रदेश में असर रखने वाले नेता हैं, अतः ग्वालियर के स्थानीय निकाय चुनाव परिणाम से यह मान लेना कि सिंधिया तोप नहीं है, मूर्खता है, राजनीतिक अपरिपक्वता है। कमलनाथ अपनी आत्मा पर हाथ रखकर जवाब दे कि पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को प्रदेश की जनता ने सिंधिया के नाम बहुमत प्रदान किया था या नहीं? यदि कांग्रेस को सिंधिया के नाम पर सरकार बनाने का बहुमत मिला था तो कांग्रेस ने कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाकर प्रदेश की जनता का अपमान क्यों किया था? जनता के साथ छल क्यों किया था?कहा जा सकता है, जाने कहां से छींका टूटा, बन बैठे गुलफाम, वाली स्थिति में मुख्यमंत्री बन गए थे कमलनाथ, तब उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया का हक मारा था। कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया ऐसी राजनीतिक तोप है, जिसने कमलनाथ जैसे रेडिमेड नेता को मुख्यमंत्री बनने का अवसर उपलब्ध करा दिया था, सिंधिया ऐसी तोप है, जिसकी कांग्रेस ने कद्र नहीं की तो कमलनाथ की सरकार गिरा दी और सत्ता से वंचित भाजपा की सरकार बनवा दी, क्यों भाई कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया तोप क्यों नहीं है? आज की तारीख में राष्ट्रीय राजनीति में अधिकार पूर्वक दखल रखने वाले सिंधिया मध्यप्रदेश के जनप्रिय नेता हैं, कमलनाथ जन दृष्टि से देखेंगे तो उन्हें सिंधिया तोप नजर आएंगे और अपनी संकीर्ण एवं कुंठित दृष्टि से देखेंगे तो सिंधिया तोप क्या, तमंचा भी नजर नहीं आएंगे। सिंधिया के कांग्रेस छोड़ भाजपा में चले जाने से कांग्रेस ही फटेहाल हुई है, सिंधिया का कुछ नहीं गया, वे भाजपा में मजबूती के साथ स्थापित है, उनसे भाजपा के स्वार्थी क्षत्रप असुविधा महसूस करने लगे हैं। देखा जाए तो ज्योतिरादित्य सिंधिया से लोकप्रिय, जनप्रिय प्रदेश स्तरीय चेहरा, ना कांग्रेस के पास है, ना भाजपा के पास, शिवराज सिंह चौहान के अलोकप्रिय हो जाने के बाद तो ज्योतिरादित्य सिंधिया की उड़ के लगी है। हालांकि प्रदेश स्तरीय भाजपा में और भी नेता हैं, लेकिन उनकी राजनीति एवं पहचान क्षेत्रीय होकर दम तोड़ देती हैं, शिवराज सिंह चौहान के बाद भाजपा में प्रदेश स्तरीय पहचान रखने वाला, प्रदेश भर में असर रखने वाला कोई नेता है तो वह ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं। ऐसा नेता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को तोप नजर नहीं आ रहा तो कहना होगा कि प्रदेश में कांग्रेस ज्योतिरादित्य सिंधिया से बहुत डरी हुई है, उनके सामने अपराधबोध से ग्रस्त होकर हीन भावना का शिकार हो गई है। कमलनाथ ने सिंधिया के नाम का रोना रोकर स्पष्ट कर दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, भाजपा को दरकिनार करके मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ विधवा विलाप करने वाली हैं। *************

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