पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ *9009597101*

महत्वपूर्ण वोटरों को डिस्पोजल समझने वाले जनप्रतिनिधियों से निराश हो चुका देवास का मजदूर तबका, देवास कलेक्टर ऋषव गुप्ता से उम्मीद करता है कि वे देवास में स्थापित औद्योगिक इकाइयों पर ध्यान दें, क्योंकि देवास का श्रम विभाग एवं इसके जिम्मेदार, औद्योगिक इकाइयों के पालतू बनकर, शोषित होते मजदूरों के लिए फालतू हो गए हैं। देवास के जनप्रतिनिधियों ने औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले मजदूरों से सिर्फ वोट लेने तक का रिश्ता रखा है, मजदूरों के दुःख-दर्द, परेशानियों से कभी वास्ता नहीं रखा। देवास औद्योगिक क्षेत्र है और यहां मजदूर वर्ग ज्यादा निवास करता है, यह वर्ग जनप्रतिनिधियों को सत्ता सुख प्रदान करने में अहम भूमिका निभाता है, लेकिन जनप्रतिनिधि इस वर्ग को डिस्पोजल से ज्यादा कुछ नहीं समझते। जनप्रतिनिधियों ने औद्योगिक इकाइयों और उद्योगपतियों के हितों का तो ध्यान रखा है, लेकिन मजदूरों के लिए कभी चिंता नहीं पाली।
नवागत कलेक्टर को यह जानकर आश्चर्य होगा कि नगर निगम भी देवास की आबोहवा खराब कर लाखों करोड़ों रुपए कमाने वाली औद्योगिक इकाइयों से तो नाम मात्र का जल कर, सम्पत्ति कर लेता है और नागरिकों से जमकर, कर लेकर अपने खर्चों की भरपाई करता है, लेकिन कोई जनप्रतिनिधि नागरिकों की पीड़ा को समझने को तैयार नहीं हैं, इसलिए मजदूर तबका अधिकार संपन्न नवागत कलेक्टर से उम्मीद करता है कि वे मजदूर तबके सहित देवास के नागरिकों की पीड़ा को समझे और उसे दूर करने की दिशा में पहल करें।जाइंडियर कंपनी में तो देवास के मूल निवासियों को लिया ही नहीं जाता, जनप्रतिनिधियों ने कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया,कहने का तात्पर्य देवास के औद्योगिक क्षेत्र में ऐसी कईं अनियमितता और मनमानियां फैली है,जिन पर कभी ध्यान नहीं दिया गया। कलेक्टर श्रम विभाग को कर्तव्यनिष्ठ बनाएं तो मजदूरों का भला हो। श्रम विभाग के निकम्मेपन से वैसे तो देवास के हर औद्योगिक संस्थान में मजदूरों का शोषण हो रहा है, लेकिन देवास की आयशर कंपनी में श्रमिक शोषण अमानवीयता की हदों को पार कर रहा है और यहां का प्रबंधन राक्षस बना हुआ है। मजदूरों के अनुसार आयशर कंपनी में दुष्यंत जर्गर नामक अधिकारी गरीब मजदूरों की चाय में से भी कमीशन खाने की नीयत रखता है। आयशर कंपनी का मजदूर इतना डरा-सहमा है कि उसमें शोषण के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत ही नहीं, क्योंकि आवाज उठाने वाले को काम से बंद कर दिया जाता है। मजदूरों के नेता प्रबंधन का लालीपाप चूसकर शोषित होते मजदूरों को ठेंगा दिखाते हैं। प्रबंधन मजदूरों के नेताओं को कभी रामाश्रय होटल में पार्टी दे देता है, कभी केंटिन में फ्री खाने का लालच देकर अपना पालतू बना लेता है, हाल ही में एच. आर. मैनेजर आशीष एवं संजय चौधरी मजदूर नेताओं को मेंहदीपुर बालाजी घुमाने ले गए। इन छोटे छोटे प्रलोभनों से मजदूर नेता कंपनी के नजरिए से अपने मजदूर साथियों को देखना प्रारंभ कर देते हैं।
आयशर कंपनी में लगभग दो सौ मजदूर नियमित है और हजारों मजदूर ठेकेदारी प्रथा के अंतर्गत नाममात्र मजदूरी पर काम करते हैं। आयशर कंपनी में मजदूर उपलब्ध कराने वाले एक से अधिक ठेकेदार है, जो आसमान वेतन देकर मजदूरों का खून पी रहे हैं और इन ठेकेदारों पर कंपनी प्रबंधन के अधिकारी एवं श्रम विभाग का वरदहस्त है। दुष्यंत जर्गर नामक अधिकारी को मजदूर सबसे बड़ा अमानवीय बताते हैं, जो मजदूरों की चाय में से भी कमीशन खाने की नीयत रखता है। गेट पर ड्यूटी देने वाले गार्डों को चाय तक नहीं दी जाती हैं, जबकि उनके वेतन में से चाय के नाम पर ढाई सौ रुपए काटे जाते हैं। आयशर कंपनी एकेवीएन की पूरी सड़क हजम कर गई, लेकिन सारा प्रशासन दम साधे देखता रहा। कांग्रेस के एक नेता ने इस मामले को उठाया था, लेकिन बाद में उसने भी इस ओर से ध्यान हटा दिया। आयशर कंपनी में दुष्यंत जर्गर नामक अधिकारी नेताओं को खुश करने के लिए कंपनी में काम करने वाले मजदूरों को भीड़ के रूप में ले जाता और उनकी रैली जलसों को सफल बनाता है। डरे-सहमे शोषित, पीड़ित मजदूर कलेक्टर ऋषव गुप्ता से उम्मीद करते हैं कि वे आयशर कंपनी पर अपना ध्यान केंद्रित करें, कंपनी के जबड़े से एकेवीएन की सड़क निकाले और निकम्मे हो चुके श्रम विभाग को कर्तव्यनिष्ठ बनाएं। **************
