✍️पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ 9009597101

इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का वह बयान मीडिया तथा सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें कमलनाथ कांग्रेस के आंगन से उखड़कर भाजपा के खेत में स्थापित हो चुके राजनीति के वटवृक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया को कह रहे हैं कि सिंधिया कोई तोप नहीं है, यदि तोप होते तो ग्वालियर में भाजपा, नगर निगम का चुनाव नहीं हारती। कमलनाथ का बयान, किसी भी दृष्टि से परिपक्व नेता के मुंह से निकला बयान नहीं कहा जा सकता, एक मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस अध्यक्ष का बयान नहीं कहा जा सकता। कमलनाथ का बयान चुगली कर रहा है कि कमलनाथ एक रेडिमेड नेता हैं, जनभावना का उन्हें ज्ञान नहीं है, वे जमीनी राजनीति से परिचित नहीं हैं और प्रदेश में कांग्रेस की दुर्गति का मूल कारण कमलनाथ ही हैं। जैसे कमलनाथ छिंदवाड़ा में मजबूत है, वैसे ज्योतिरादित्य सिंधिया सिर्फ ग्वालियर तक सीमित नहीं हैं, सिर्फ ग्वालियर में ही मजबूत नहीं है, वे समूचे मध्यप्रदेश में असर रखने वाले नेता हैं, अतः ग्वालियर के स्थानीय निकाय चुनाव परिणाम से यह मान लेना कि सिंधिया तोप नहीं है, मूर्खता है, राजनीतिक अपरिपक्वता है। कमलनाथ अपनी आत्मा पर हाथ रखकर जवाब दे कि पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को प्रदेश की जनता ने सिंधिया के नाम बहुमत प्रदान किया था या नहीं? यदि कांग्रेस को सिंधिया के नाम पर सरकार बनाने का बहुमत मिला था तो कांग्रेस ने कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाकर प्रदेश की जनता का अपमान क्यों किया था? जनता के साथ छल क्यों किया था?कहा जा सकता है, जाने कहां से छींका टूटा, बन बैठे गुलफाम, वाली स्थिति में मुख्यमंत्री बन गए थे कमलनाथ, तब उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया का हक मारा था। कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया ऐसी राजनीतिक तोप है, जिसने कमलनाथ जैसे रेडिमेड नेता को मुख्यमंत्री बनने का अवसर उपलब्ध करा दिया था, सिंधिया ऐसी तोप है, जिसकी कांग्रेस ने कद्र नहीं की तो कमलनाथ की सरकार गिरा दी और सत्ता से वंचित भाजपा की सरकार बनवा दी, क्यों भाई कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया तोप क्यों नहीं है? आज की तारीख में राष्ट्रीय राजनीति में अधिकार पूर्वक दखल रखने वाले सिंधिया मध्यप्रदेश के जनप्रिय नेता हैं, कमलनाथ जन दृष्टि से देखेंगे तो उन्हें सिंधिया तोप नजर आएंगे और अपनी संकीर्ण एवं कुंठित दृष्टि से देखेंगे तो सिंधिया तोप क्या, तमंचा भी नजर नहीं आएंगे। सिंधिया के कांग्रेस छोड़ भाजपा में चले जाने से कांग्रेस ही फटेहाल हुई है, सिंधिया का कुछ नहीं गया, वे भाजपा में मजबूती के साथ स्थापित है, उनसे भाजपा के स्वार्थी क्षत्रप असुविधा महसूस करने लगे हैं। देखा जाए तो ज्योतिरादित्य सिंधिया से लोकप्रिय, जनप्रिय प्रदेश स्तरीय चेहरा, ना कांग्रेस के पास है, ना भाजपा के पास, शिवराज सिंह चौहान के अलोकप्रिय हो जाने के बाद तो ज्योतिरादित्य सिंधिया की उड़ के लगी है। हालांकि प्रदेश स्तरीय भाजपा में और भी नेता हैं, लेकिन उनकी राजनीति एवं पहचान क्षेत्रीय होकर दम तोड़ देती हैं, शिवराज सिंह चौहान के बाद भाजपा में प्रदेश स्तरीय पहचान रखने वाला, प्रदेश भर में असर रखने वाला कोई नेता है तो वह ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं। ऐसा नेता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को तोप नजर नहीं आ रहा तो कहना होगा कि प्रदेश में कांग्रेस ज्योतिरादित्य सिंधिया से बहुत डरी हुई है, उनके सामने अपराधबोध से ग्रस्त होकर हीन भावना का शिकार हो गई है। कमलनाथ ने सिंधिया के नाम का रोना रोकर स्पष्ट कर दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, भाजपा को दरकिनार करके मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ विधवा विलाप करने वाली हैं। *************
