पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ 9009597101

इन दिनों मध्यप्रदेश में चुनावी रेवड़ियां बांटी जा रही हैं और जिनके पास बांटने को रेवड़ियां नहीं है, वे आश्वासन की रेवड़ियां बांट रहे हैं, गैस सिलेंडर पांच सौ रुपए में कर देंगे, जैसे इनके बाप का माल है। सीधे-सीधे वोट पाने के लिए लालच दिए जा रहे हैं और देश का चुनाव आयोग ना जाने कौन से पर्वत पर बैठकर राम धुन गा रहा है? इन दिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लाड़ली बहना योजना का ढिंढोरा पीट रखा है, जिसमें सारा मध्यप्रदेश फजीत हो रहा है, परेशान हो रहा है। प्रदेशभर की बहनें खाना-पीना, घर-बार, बच्चे, गृहस्थी सब छोड़कर, बैंक-बैंक भटक रही है,आन लाइन दुकानों पर डेरा जमाकर बैठी है, मुख्यमंत्री की इन बहनों के साथ वे बच्चे भी परेशान हो रहे हैं, जो बिना मां के घर पर नहीं रह सकते। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री की ये बहनें, बैंकों में दुत्कारी जा रही है, अपमानित की जा रही हैं, बैंक वाले भी क्या करें, बैंकों में मजमा ही इतना लगा हुआ है, वे किसे-किसे समझाए और कैसे समझाए? बैंक वालों का झल्लाना स्वाभाविक है, आखिर वे भी इंसान है। बैंकों की हालत यह है कि लाड़ली बहना योजना ने बैंकों के सारे कामकाज अस्त-व्यस्त कर दिए हैं, प्रभावित कर दिए हैं,जिन बहनों के खाते नहीं थे,वे खाते खुलवाने निकल पड़ी है,कुल मिलाकर कहा जाए तो बैंकों ने अपनी दैनिक दिनचर्या के कामकाज छोड़कर, लाड़ली बहना योजना को हाथ में ले लिया है। सरकारी अमले की यह हालत है कि वह मैदान में उतरकर मुख्यमंत्री की लाड़ली बहनों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में बैंक की ओर भेज रहा हैं। सरकारी अमले के लोग पहले ही काम से परहेज करते हैं, ऊपर से लाड़ली बहना योजना आ गई, उन्हें और बहाना मिल गया काम ना करने का। कुल मिलाकर कहा जाए तो इस समय सारा प्रदेश परेशान हैं मुख्यमंत्री की लाड़ली बहना योजना के चक्कर में। लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को सरकार पांच वर्ष तक एक-एक हजार रूपए महिना देगी और एक हजार रुपए महीना पाने के चक्कर में प्रदेशभर की महिलाएं खुद भी परेशान हो रही हैं और व्यवस्था को भी परेशान कर रही हैं। लाड़ली बहनों का ही पैसा लाड़ली बहनों को दिया जा रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ऐसा प्रदर्शित कर रहे हैं,मानो वे अपने बाप-दादा की जमा पूंजी प्रदेश की बहनों पर लुटा रहे हो? मुख्यमंत्री शिवराज, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ये सब चुनाव को धंधे में तब्दील करते जा रहे हैं, जनता को लालच दे रहे हैं और चुनाव आयोग चुप बैठा है, क्यों? क्या आचार संहिता लागू होने के बाद ही चुनाव आयोग मैदान संभालता है? बाकी समय चुनाव आयोग क्या करता है, जनता को पता तो चले? यदि ऐसा है तो आचार संहिता कम से कम चुनाव से छह महीने पहले लागू होना चाहिए, ताकि शिवराज कमलनाथ जैसे धंधेबाज नेताओं पर लगाम लग सके। इधर शिवराज ने महिलाओं को एक हजार रुपए महीना देने की जुगत भिड़ाई तो उधर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जनता को गैस सिलेंडर पांच सौ रुपए में कर देने का लालिपाप दे रहे हैं। यदि राजनीति के इन मठाधीशों को सरकार बनाने के लिए जनता को लालच देना पड़ रहा है तो जनता को समझ जाना चाहिए, ये अपनी विश्वसनीयता खो चुके हैं, जनता की नजरों से उतर चुके हैं। प्रदेशभर की बहनों को समझना चाहिए लाड़ली बहना योजना सिर्फ चुनावी रेवड़ी है और चुनाव के बाद यह रेवड़ी कब तक बंटेगी इसकी कोई गारंटी नहीं है? प्रदेश की भोलीभाली महिलाओं, लाड़ली बहना योजना अलोकप्रिय हो चुके मुख्यमंत्री का चुनावी हथकंडा है, यदि मुख्यमंत्री शिवराज आप लोगों के प्रति इमानदार होते तो मुख्यमंत्री बनते ही लाड़ली बहना योजना लागू कर देते, अभी तक बहनों को 36,000 रूपए एक हजार रुपए प्रति माह के हिसाब से मिल चुके होते। कड़वा सच तो यह है कि चुनावी हथकंडे के रूप में लाई गई मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने प्रदेशभर में बहनों को परेशान कर दिया है,फजीत कर दिया है। मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं प्रदेश की बहनें कितनी फजीत हो सकती हैं, बैंक वाले कितने परेशान हो सकते हैं और सरकारी अमला कैसे भागदौड़ करता है, शायद यही सब देखने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ये लाड़ली बहना योजना लेकर आए है? **************
