पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ *9009597101*

हाल ही में देवास कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने एक पक्षीय आदेश जारी किया और अधिनस्थों को निर्देशित किया है कि ऐसे नलकूप, जिनकी मोटर निकाली जा चुकी है, जो दुर्घटना का कारण बन सकते हैं, जनहानि का कारण बन सकते हैं, कमजोर छज्जे,कुए-बावड़ियों पर बने निर्माण आदि की जानकारी एकत्रित की जाए और उनको लेकर विधि सम्मत कार्रवाई की जाए। उल्लेखनीय हैं कलेक्टर देवास ऋषभ गुप्ता ने यह आदेश इंदौर में हुए हादसे के बाद जारी किया हैं, जिसमें मंदिर के कुएं पर बने फर्श के टूट जाने से बेशकीमती 36 जानें चली गई, अर्थात इस जनहितैषी आदेश ने जारी होने के लिए हादसे का इंतजार किया है, तीन दर्जन लोगों के मरने का इंतजार किया है। जो निर्माण, लापरवाही , अतिक्रमण, संभावित दुर्घटना का कारण बन सकते है, उन्हें हटाने में प्रशासन को किसी प्रकार की कोई कोताही नहीं बरतना चाहिए। ऐसी कोई घटना-दुर्घटना घटित होते हैं तो इसका दण्ड प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारियों को ही भुगतना पड़ता है,हर घटना के बाद दंडित होते अधिकारी कर्मचारी उदाहरण है, प्रमाण है। घटना दुर्घटना के कारण, हमेशा नेताओं की सरपरस्ती में निर्मित होते हैं और अधिकारी, नेताओं को खुश करने के लिए इन दुर्घटना के कारणों को नजरंदाज करते रहते हैं और दुर्घटना घट जाती है तो नेता हाथ ऊंचे कर देते हैं,टसुए बहाने लगते हैं तथा कटघरे में अधिकारी ही खड़े होते आए हैं। यदि ऐसे कारण, जो दुर्घटना के कारण बन सकते हैं, जिसमें लोगों की जानें जा सकती हैं,उन कारणों का उन्मूलन करने को लेकर गंभीर क्यों नहीं होते अधिकारी? आसपास कोई गंभीर घटना घटित होती है तो सीमा से लगे जिलों के कलेक्टर, एसपी एकदम कर्तव्यनिष्ठ हो जाते हैं, आदेश जारी कर देते हैं, अधिनस्थों को निर्देशित कर देते हैं,दो-चार दिन जनहितैषी कर्तव्यनिष्ठता अपने चरम पर होती है और बाद में सब धीरे-धीरे सामान्य हो जाता है और अधिकारियों की कर्तव्यनिष्ठता, नए हादसे के इंतजार में अपने कार्यालय में कुर्सी तोड़ना प्रारंभ कर देती हैं। देवास की जनता ने अधिकारियों की ऐसी कर्तव्यनिष्ठता अनेक बार देखी है। आसपास दुर्घटना हो जाती है तो पुलिस विभाग, परिवहन विभाग कर्तव्यनिष्ठ होकर माथा उतारनी करने सड़क पर आ जाते है, अन्यथा इन विभागों के जिम्मेदार अपनी-अपनी जुगत में लगे रहते हैं और बेचारी जनता इनके निकम्मेपन का दंश झेलती रहती हैं। ज्यादा चिंताजनक स्थिति देवास में परिवहन विभाग की है, देवास में जया वसावा जिला परिवहन अधिकारी हैं, जो यहां बरसों से पदस्थ हैं, एक आध बार ट्रांसफर भी हुआ, लेकिन रूकवा लिया। देवास जैसा आरामदायक और लोभी, नासमझ नेताओं से भरा शहर दूसरा कोई नहीं, इसलिए अधिकारी देवास में आकर देवास से जाने का नाम नहीं, लेते। जिला आबकारी अधिकारी वंदना पांडे और जिला जनसंपर्क अधिकारी गुप्ता भी अनमने मन से देवास आए थे, लेकिन अब देवास के होकर रह गए हैं, परिवहन अधिकारी जानती है, देवास प्रशासनिक अधिकारियों का अभयारण्य है। यही कारण है कि कभी कोई दुर्घटना हो जाए,या ऊपर बैठे अधिकारियों को कुछ काम करके दिखाना हो, अथवा टारगेट पूरा करना हो तो ही परिवहन अधिकारी जया वसावा सड़क पर आती हैं, अन्यथा परिवहन विभाग में धूलधोए बाबू धूल उड़ाया करते हैं। पीछे जाकर देखें तो उज्जैन जिले में स्कूली वाहन की दुर्घटना हुई थी और फूल से कोमल बच्चें काल का ग्रास बन गए थे,तब मैडम जी अचानक कर्तव्यनिष्ठ हो गई थी, स्कूली वाहनों को चेक करने सड़क पर निकल पड़ी थी और उसी दौरान एक स्कूल के वाहन की चेकिंग करते हुए भाजपा नेता से बहस भी हुई थी। उस समय भाजपा नेता ने यह कहते हुए परिवहन अधिकारी को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी कि सड़कों पर अनगिनत वाहन सड़कों पर नियम विरुद्ध दौड़ रहे हैं, बिना टैक्स चुकाए दौड़ रहे हैं,उन पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती? मीडिया कैमरों के सामने कटघरे में खड़ी की गई परिवहन अधिकारी जवाब नहीं दे पाई थी। यह सही है देवास के परिवहन विभाग में बस आनरों का दबदबा है, एक तरह से देखा जाए तो कथित तौर पर देवास का परिवहन विभाग बस मालिकों की सुविधानुसार ही संचालित होता है और परिवहन अधिकारी ने अपने आपको इस व्यवस्था में ढाल लिया है। उस समय भाजपा नेता द्वारा उठाई गई बातें निराधार नहीं थी, देवास की जनता को उम्मीद थी कि सार्वजनिक रूप से परिवहन अधिकारी पर नजर अंदाजी, निष्क्रियता का आरोप लगा है, परिवहन अधिकारी इसे प्रतिष्ठा का बिंदु बनाएगी और नियम विरुद्ध दौड़ रही बसों पर कार्रवाई करेगी, लेकिन जनता निराश हुई। आज जब इंदौर की घटना के बाद देवास कलेक्टर ने जन हित में आदेश जारी किया है तो जिला परिवहन अधिकारी जया वसावा से यह प्रश्न प्रासंगिक हो जाता है कि उज्जैन जिले में हुई दुर्घटना के बाद आपने देवास में स्कूल वाहनों को लेकर चेकिंग अभियान चलाया था,वह भी भाजपा नेता से बहस के बाद बीच में छोड़ दिया था, क्या परिवहन अधिकारी और उनकी टीम ने उसके बाद स्कूल वाहनों पर ध्यान दिया? नहीं दिया तो क्यों नहीं दिया? भगवान ना करे खराब वाहनों के कारण कोई दुर्घटना घटित हुई तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? कहने का तात्पर्य इतना ही है कि प्रशासन में बैठे मठाधीशों को जनहित में निर्णय लेने के लिए हादसों का इंतजार नहीं करना चाहिए, नागरिकों के मरने का इंतजार नहीं करना चाहिए। कलेक्टर ने आदेश जारी कर दिया, धन्यवाद, लेकिन आदेश का अधिनस्थ कितनी गंभीरता से पालन करते और कराते हैं, यह देखना भी जरूरी है। ***************
