✍️जगदीश चौधरी खिलेडी
गणतन्त्र दिवस की बर्षगाँठ के अवसर पर समूचे ग्राम खिलेड़ी में देश भक्ति का रंग दिखाई दिया जहां एक और स्कूली बच्चो में तिरंगे को फ़हराने और वंदन को लेकर उत्साह था वही दूसरी और ग्रामीण जन में पंचायत, स्कूलों व अन्य शासकीय परिसरों में होने वाले झंडा वंदन कार्यक्रम में शामिल हो कर देश भक्ति के कार्यक्रम को देखने का भी उत्साह था। इसी उत्साह को दोगुना किया शासकीय हाई स्कूल खिलेड़ी के विद्यालय परिवार ने प्रभात फेरी निकाल कर देश भक्ति से ओतप्रोत नारो से ग्राम को देश भक्ति वाले भाव से भर दिया हर व्यक्ति प्रभात फेरी के दौरान नारो के साथ सुर से सुर मिला रहा था। विद्यालय में झंडा वंदन के दौरान विद्यार्थियों ने देश भक्ति से जुड़ी कविता, भाषण, आदि से ग्रामीणों का मन मोह लिया। वही विद्यार्थियों ने देश की संस्कृति को जीवित रखने वाले पारंपरिक गीतों पर नृत्य कर विद्यालय के इस कार्यक्रम के आनंद को हजार गुना बढ़ा दिया।
विद्यालय में ग्रामीणों के द्वारा की गई पहल रही सराहनीय
वैसे तो हर जगह कोई जनप्रतिनिधि या फिर प्राचार्य विद्यालय में झंडा वंदन की परम्परा का निरवहन करते है लेकिन इस ग्राम खिलेड़ी में ग्रामीणों द्वारा एक वृद्ध व्यक्ति से झंडा वंदन का कार्यक्रम सफल करवाया गया। जो कि ग्रामीणों को अचंभे में डालने के साथ साथ सराहनीय भी था। झंडा वंदन और समूचे कार्यक्रम के पश्चात मंच पर उन्ही वृद्ध व्यक्ति को सम्मानित भी किया गया।
क्यो हुई यह सम्मान की अनूठी पहल
के दौरान मंच संचालनकर्ता शिक्षक महिपाल सिंह राठौर ने ग्रामीणों को अवगत करवाते हुए कहा कि आज झंडा वंदन का कर्यक्रम ग्रामीणो के मंशा के आधार पर किया गया है और जिन बुजुर्ग व्यक्ति ने झंडा वंदन किया है वह एक दानी व्यक्ति है जिन्होंने विद्यालय निर्माण के लिए अपने हिस्से की कृषि भूमि करीब 40 से 50 वर्ष पूर्व दान कर दी थी। जिस पर आज एक सुंदर विद्यालय निर्मित होकर खड़ा है। जिसमे विद्यार्थियों द्वारा अध्ययन का कार्य होकर के मजबूत भारत के निर्माण की नींव रखी जा रही है। ग्रामीणों ने भी वृद्ध व्यक्ति बाबूलाल जी गामड़ के इस त्याग को काफी सराहा और उनके परिवार के सभी सदस्यों की प्रशंसा की। बता दे कि वृद्ध श्री गामड़ अपने परिवार में अपने उसी प्राचीन परिवेश के साथ जी रहे है। लेकिन उनका शिक्षा को बढ़ावा देने का उद्देश्य आज सार्थक नजर होता आ रहा है।
ग्रामीणों को हुआ आश्चर्य
जहाँ पुराने समय से लेकर आज तक इंच भर जमीन भी विवाद का कारण बन जाती थी वही ग्राम की आबादी से जुड़ी हुई कीमती जमीन को शिक्षा के विस्तार से दान करना और उस दान पर आज तक कोई घमण्ड नही कर सादा जीवन जीने वाले वृद्ध बाबूलाल जी गामड़ के इस कार्य से समूचे ग्राम के ग्रामीण आश्चर्य में रह गए। क्योकि जमीन के बारे में आज तक अधिकांश ग्रामीणों को पता ही नही था जबकि विद्यालय को निर्मित हुए भी करीब 10 वर्ष से भी अधिक हो चुके है।
ग्रामीण जन की ओर से हुआ दानी वृद्ध श्री गामड़ का सम्मान
खिलेड़ी के शिक्षा को विस्तृत करने हेतु अपनी जमीन दान करने वाले दानी श्री गामड़ का सम्मान पंचायत तथा ग्राम खिलेडी के जन प्रतिनिधि के द्वारा किया गया जिसमें उन्हें पुष्पमाला भेंट कर वस्त्र भी भेंट किये गये। जो कि हमारी भारतीय परम्परा के अनुसार उपकार के प्रति धन्यवाद को दर्शाता है।
