पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)9009597101

मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल धार जिले की कुक्षी तहसील की ग्राम पंचायत लोहारी, निसरपुर विकास खण्ड में आती हैं और इस विकास खण्ड के जनपद सीईओ माधवाचार्य हैं। इस जनपद सीईओ के संरक्षण में कहें, या मार्गदर्शन में कहें, ग्राम पंचायत लोहारी में एक से बढ़कर एक भ्रष्टाचार हुए, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं और शर्म की बात यह है कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री देश, प्रदेश के छिलंगे (शिखर) पर बैठकर इमानदारी के ढोल पीट रहे हैं। ग्राम पंचायत लोहारी में एक से अधिक बार ऐसा हुआ है कि विकास कार्य किए ही नहीं और सरपंच,पंचायत सचिव, ठेकेदार जनता के पैसे निकाल कर खा गए तथा निष्क्रिय जनपद सीईओ माधवाचार्य, आफिस में कुर्सी पर बैठकर बुदबुदाते रहे कि “जनता का नहीं,यह मेरे बाप माल है,खा जाओ भ्रष्टों भर-भर पेट”। जनपद सीईओ माधवाचार्य का क्या काम था और वे क्या करते रहे? जांच का विषय है। वैसे तो ग्राम पंचायत लोहारी में एक से एक कारनामें हुए और हर कारनामें में जनपद सीईओ माधवाचार्य की भूमिका संरक्षक वाली रही, लेकिन सांसद निधि से स्ट्रीट लाइट लगाने वाले मामले में तो इस अधिकारी ने बेशर्मी की हद पार कर दी, भ्रष्टों को बचाने के लिए ये अधिकारी सीएम हेल्पलाइन पर झूठ बोलने से भी बाज नहीं आया। दरअसल सन् 2018-19 में सांसद निधि से ग्राम पंचायत लोहारी में स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए 14,89,874 (चौदह लाख उनब्बे हजार आठ सौ चौहत्तर) रूपए स्वीकृत हुए, शिकायत है कि गांव में स्ट्रीट लाइट का काम किया ही नहीं और सरपंच श्रीमती सुंदरबाई डोडवा, सचिव मंसाराम पाटीदार, और ठेकेदार विक्रम चौयल ने पैसा निकाल लिया। ग्राम के ही जागरूक नागरिक ने मय प्रमाण सभी जिम्मेदारों को शिकायत की,पता नहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल में शिकायतों का क्या होता है? दिनांक 28 नवंबर 2022 को शिकायतकर्ता ने प्रमाण के साथ जनपद सीईओ को भी शिकायत की, लेकिन जनपद सीईओ ने शिकायत पर संज्ञान लेना जरूरी नहीं समझा। जनपद सीईओ माधवाचार्य भ्रष्टों को बचाने के लिए कितने दृढ़संकल्पित है, इससे पता चलता है कि एमपीईबी शिकायतकर्ता को आरटीआई के तहत 25 नवंबर 2022 को जानकारी देती हैं कि आज दिनांक तक ठेकेदार विक्रम चौयल की तुलसी कंस्ट्रक्शन कंपनी को कार्य पूर्ण होने का प्रमाण पत्र नहीं दिया गया है और 24 नवंबर 2022 को जनपद सीईओ माधवाचार्य सीएम हेल्पलाइन पर जवाब प्रस्तुत करते हैं कि एमपीईबी द्वारा प्रदान किए प्रमाण पत्र के आधार पर पंचायत ने ठेकेदार को भुगतान किया है। यदि एमपीईबी जनपद सीईओ द्वारा सीएम हेल्पलाइन पर जवाब देने के एक दिन बाद शिकायतकर्ता को आरटीआई में जानकारी दे रही है कि एमपीईबी ने आज दिनांक तक कार्य पूर्ण होने का प्रमाण पत्र नहीं दिया है तो पंचायत ने कौन से कूटरचित दस्तावेज देखकर पंचायत ने ठेकेदार को भुगतान कर दिया? जनपद सीईओ ने कूट रचित दस्तावेजों का परिक्षण करना क्यों जरूरी नहीं समझा? क्या कूट रचित दस्तावेज तैयार करने के अपराध में जनपद सीईओ की भी संलिप्तता है? इसका सीधा सा अर्थ है बिना काम करे पैसा खाने के लिए सरपंच श्रीमती सुंदरबाई डोडवा, सचिव मंसाराम पाटीदार और ठेकेदार विक्रम चौयल ने कूट रचित दस्तावेज बनाकर अपराध किया है और जनपद सीईओ माधवाचार्य ने जानबूझकर इस अपराध को नजरंदाज करके अपराध किया है। सांसद निधि भी आम जनता की ही निधि होती हैं और भ्रष्ट इसे लूट ले जाए तो सारी व्यवस्था को शर्मसार होने की आवश्यकता है, यहां तो जनपद सीईओ माधवाचार्य, भ्रष्टों के प्रधान आचार्य बनकर उन्हें बचाने का अपराध करते नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज के शासनकाल में ऐसे अधिकारियों के लिए कोई व्यवस्था है या नहीं? या मुख्यमंत्री शिवराज अमल से दूर मुंह में सिद्धांत रखते हैं, बिना काम का बेकार सा वृतांत रखते हैं?**********************
