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Friday, April 17, 2026
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29 मार्च की दोपहर बाद मित्रों को किया ये अंतिम मैसेज ? हाय था या बाय बाय? फांसी के फंदे पर झूलते मिला पत्रकार का शव

✍️गोपाल मारू बरमण्डल

धार जिले के बरमण्डल में संदेहास्पद मामला प्रकाश में आया है, यहां सरस्वती ज्ञान मंदिर के प्रधानाचार्य व पत्रकार का शव अपने ही घर की रसोई घर में फाँसी के फंदे से लटका मिला है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामला जांच में लिया है। पत्रकार के शव के पास से पुलिस को एक सुसाईट नोट मिला है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सरदारपुर अनुविभाग के राजोद थाना अंतर्गत ग्राम बरमण्डल में सरस्वती ज्ञान मंदिर के प्रधानाचार्य व पत्रकार मनोज बुंदेला का शव अपने ही घर के रसोई घर मे फांसी के फंदे से लटका मिला है। इसकी जानकारी तब लगी जब 30 मार्च की शाम 7 बजे टिफिन सेंटर वाला रात्रि भोजन का पार्सल देने पत्रकार मनोज बुंदेला के घर गया, दरवाजा अंदर से बन्द देख व अंदर से कोई हलचल ना होते देख आस पड़ोस वालों को बताया, बाद लोगों ने थाना राजोद व 100 डायल को खबर करी। 100 डायल व राजोद थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने खिड़की की जाली तोड़ कर अंदर प्रवेश किया तो देखा कि मनोज बुंदेला का शव फांसी पर लटका हुआ था। शव को फंदे से नीचे उतार कर पंचनामा बनाया गया तथा रात्रि में ही पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरदारपुर भिजवाया गया जिनका पोस्टमार्टम आज शुक्रवार को किया जाकर शव परिजनों को सौंपा गया। इस दरमियान परिजन सुसाइट नोट देखने के लिए अड़ गए। बाद सुसाइड नोट देखने के लिए शव को सरदारपुर से राजोद थाने लाये। राजोद पुलिस ने दो परिजनों को सुसाइट नोट दिखा कर संतुष्ट किया इसके बाद आज शाम 4 बजे राजोद थाने से पत्रकार मनोज बुंदेला के शव को ले कर अंतिम संस्कार के लिए अपने पैतृक गांव, बुंदेलखंड चले गए। उल्लेखनीय है कि पत्रकार मनोज बुंदेला बरमण्डल में सरस्वती ज्ञान मंदिर में प्रधानाचार्य के पद कर कार्यरत थे। इनका पैतृक गांव बुंदेलखंड में है। साथ ही मनोज बुंदेला दैनिक अखबार राजएक्सप्रेस के स्थानीय प्रतिनिधि हो कर एक पत्रकार भी थे। पत्रकार मनोज बुंदेला के मामले में एक बात और सामने आई कि उनकी लाश पाई गई 30 मार्च को ओर उसके ठीक एक दिन पहले 29 मार्च को मनोज ने अपने कई मित्रों को वाट्सएप से इस प्रकार हाथ हिलाते ? मोनो भेजा था। आज बुंदेला की मौत के बाद ये सवाल तो पैदा होता है कि ये हाथ हिलाने वाला मोनो संदेश हाय था या बाय बाय था? पत्रकार ने आत्महत्या करि या उसकी किसी सडयंत्र के तहत हत्या हुई? यदि बुंदेला ने आत्महत्या करि तो उनकी ऐसी क्या मजबूरी रही होगी? पुलिस सुसाइट नोट में लिखी बातों को खुला क्यों नहीं कर रही है? ऐसे तमाम सवाल हैं जो पुलिस को ही खोजना है जिसके जवाब की हसरत पत्रकार बुंदेला से जुड़े लोगों को है। इस मामले में थाना राजोद के थाना प्रभारी रोहित कछावा ने बताया कि शरीर पर घाव या चोट के कोई निसान नहीं मिले हैं तथा एक सुसाइट नोट जरूर मिला है, प्रारंभिक जांच की जा रही है, जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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