back to top
Saturday, November 7, 2026
HomeAll Newsभाजपा में रहते हुए तीन विधानसभा सीट प्रभावित कर सकते थे पूर्व...

भाजपा में रहते हुए तीन विधानसभा सीट प्रभावित कर सकते थे पूर्व मंत्री दीपक जोशी, कांग्रेस में जाकर तो वे खुद प्रभावित हुए हैं और मरणोपरांत पिता के नाम को प्रभावित कर रहे हैं

पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101

देवास कांग्रेस कार्यालय में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कैलाश जोशी की तस्वीर लेकर पहुंचे उनके बेटे पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने हताशा के दौर से गुजर रहे कांग्रेस नेता कार्यकर्ताओं की हौसला अफजाई करते हुए कहा कि मैं खातेगांव-कन्नौद, बागली और हाटपीपल्या विधानसभा सीट जीताकर कांग्रेस को दूंगा। हताश कांग्रेसियों की हौसला अफजाई करने के लिए दीपक जोशी का यह कहना दुरुस्त है, लेकिन वास्तविकता के धरातल पर देखें तो दीपक जोशी को खुद नहीं मालूम कि वे कहां आकर खड़े हो गए हैं? यदि कांग्रेस की सरकार नहीं बनी, उन्हें टिकट मिला और वे जीत नहीं पाए तो उनकी राजनीति का क्या होगा? कांग्रेसियों को ढांढस बंधाने से, उनकी हौसला अफजाई करने से फुरसत मिले तो दीपक जोशी को इस पर विचार करना चाहिए। भाजपा में रहते हुए दीपक जोशी जरूर तीन विधानसभा क्षेत्र को प्रभावित कर सकते थे, लेकिन कांग्रेसी होकर नहीं। इन विधानसभा क्षेत्रों के सरकार से नाराज, विधायकों के क्रिया-कलापों से नाराज, अफसरों के भ्रष्टाचार मनमानियों से नाराज, भाजपा नेता-कार्यकर्ता दीपक जोशी के साथ इसलिए थे कि दीपक जोशी खुद उपेक्षित होकर सरकार से नाराज चल रहे थे, वे भाजपा नेता कार्यकर्ता कांग्रेसी दीपक जोशी को महत्व थोड़ी देंगे, यदि दीपक जोशी सोचते हैं कि उन असंतुष्ट भाजपा नेता कार्यकर्ताओं का सहयोग लेकर वे खातेगांव-कन्नौद, बागली, हाटपीपल्या विधानसभा सीट कांग्रेस की झोली में डाल देंगे तो वे गलत सोचते हैं। भाजपा के असंतुष्ट, भाजपाई दीपक जोशी को महत्व दे सकते थे, कांग्रेसी दीपक जोशी को नहीं, क्योंकि हर भाजपा नेता कार्यकर्ता दीपक जोशी नहीं हो सकता। दीपक जोशी कांग्रेसी होकर राजनीतिक दृष्टि से रुग्ण हुए हैं, कमजोर हुए हैं, उनके द्वारा हैसियत से बढ़कर बोले जा रहे बोल, उन्हें हास्यास्पद बना रहे हैं, तीन सीट कांग्रेस को जीताकर दूंगा, दीपक जोशी के हैसियत से बढ़कर बोले गए बोल हैं। दीपक जोशी के इन बोलों पर एक बुद्धिजीवी कांग्रेसी ने अनौपचारिक चर्चा में चुटकी ली है, जो खुद अपने पिताजी की तस्वीर लेकर राजनीतिक गलियारों में भटक रहे हैं, वे तीन विधानसभा सीट जीताकर कांग्रेस को कैसे दे सकते हैं? कड़वा है, लेकिन सच है, राजनीति के संत कहे जाने वाले अपने पिता पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी की तस्वीर लेकर दीपक जोशी ऐसे घूम रहे हैं, मानो राजनीति में उनके पास पिता के नाम के अलावा और कुछ नहीं है, इसीलिए वे पिता की तस्वीर लिए कांग्रेस कार्यालय कार्यालय घूम रहे हैं। स्वर्गीय कैलाश जोशी में आस्था रखने वाले लोगों के मन की इबारत पढ़ने की कोशिश करो तो स्पष्ट लिखा मिलेगा कि दीपक जोशी जैसे अपने बेटे को भाजपा में छोड़ आए, वैसे ही अपने संत पिता को भी भाजपा में छोड़ आते। दीपक जोशी तो कांग्रेसी हो गए, लेकिन उन लोगों की निष्ठा को भाजपा संगठन की नजरों में संदिग्ध कर आए हैं, जो विधायकों के क्रिया कलापों एवं अफसरों की मनमानियों से नाराज होकर पिछले दिनों दीपक जोशी को सिर माथे पर लिए लिए घूम रहे थे। जो लोग भाजपा में दीपक जोशी के साथ घूमते रहे हैं, संभवतः संगठन सहजता से उन पर विश्वास नहीं कर पाएगा, दीपक जोशी ने उनमें विश्वास रखने वाले भाजपाइयों का उपयोग कर, उन्हें फेंकने का काम किया है। दीपक जोशी चाहे कांग्रेस में अपना मजमा जमाने के लिए बड़ी-बड़ी बातें करें, जबकि वास्तविकता यह है कि कांग्रेसियों के लिए दीपक जोशी, ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा दिए गए सरकार घातक घाव पर लगाने का मल्हम मात्र है। कांग्रेसियों के बीच दीपक जोशी के बड़बोलेपन को लेकर कानाफूसी हो रही है कि यदि तीन विधानसभा सीट जीताकर दीपक जोशी दे रहे हैं तो क्या जिलेभर के कांग्रेसियों ने सोनकच्छ और देवास पर ध्यान केन्द्रित कर देना चाहिए? क्या दीपक जोशी भाजपा के असंतुष्ट, विघ्नसंतोषी भाजपा नेताओं के साथ कोई गुप्त मंत्रणा करके भाजपा से कांग्रेस में आए हैं? कांग्रेसी, दीपक जोशी द्वारा किए गए दावे को लेकर कुछ इसी तरह विचार मंथन करते देखें जा रहे हैं । बरसों से देवास में जीत के लिए तरसते कांग्रेसियों के लिए नव कांग्रेसी दीपक जोशी का तीन सीट जीत कर देने का दावा, मनोबल बढ़ाने वाला है और उस पर कर्नाटक में कांग्रेस की जीत ने कांग्रेसियों का उत्साहवर्धन किया है। एक कांग्रेसी ने तो यहां तक कह दिया कि कांग्रेस में दीपक जोशी के कदम शुभ है, प्रमाण कर्नाटक की जीत है। एक कहावत है “नाई नाई कितने बाल,ठहर सब सामने आ रहे हैं” तो कांग्रेसी दीपक जोशी का क्या होना है, उनकी राजनीति का क्या होना है, समय के गर्भ में है। नेताओं का दल बदलना पहले शर्म की बात हुआ करती थी, वे दल बदलू कहलाने में शर्म महसूस किया करते थे, लेकिन आजकल दल बदल राजनीति में एक नीति हो गई है। राजनीति के संत पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय श्री कैलाश जोशी के बेटे दीपक जोशी ने उपेक्षा से तंग आकर दल बदल कर लिया, भाजपा से कांग्रेस में आ गए, कोई बात नहीं, राजनीति में चलता है, विचार मेल नहीं खाए, अन्य विचारधारा का दामन थाम लिया, लेकिन जन्मजात जनसंघी पिता की तस्वीर लेकर कांग्रेस कार्यालय में आमद देना, थोड़ा असहज कर देनेवाला है, राजनीति में पूजनीय स्थान रखनेवाले जनसंघी पिता को मरणोपरांत बेटे द्वारा कांग्रेसी बनाना, असहज कर देनेवाला है।

********************

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments