पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)9009597101

पिछले दिनों देवास कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने किसान नेताओं को एफआईआर की धमकी दे दी और किसान नेता यह कहते हुए लौट आए कि जब कलेक्टर इस तरह बात करेंगे तो उनके अधिनस्थ अधिकारी हमसे कैसी बात करेंगे? किसानों का कहना सही है,यह तो कलेक्टर का अधिनस्थ अधिकारियों को किसानों के प्रति उपेक्षित रवैया अपनाने को प्रेरित करनेवाला व्यवहार रहा। किसानों की मांगों को भी गलत नहीं कहा जा सकता, किसानों का शोषण करने वाले लोग सारे तंत्र पर हावी है और कलेक्टर की समस्या यह है कि उन्हें सत्ता के बगलगीर इन किसान शोषक प्रभावशाली लोगों से समन्वय स्थापित करके कलेक्टर के रूप में काम करना है। किसान अपनी उपज जिस कांटे पर तुलवाकर बेचना चाहता है, नियमानुसार प्रशासन ने उस कांटे पर तुलवाकर किसान की उपज खरीदी करने की व्यवस्था करना चाहिए,ना कि उन्हें एफआईआर कराने की धमकी दी जाना चाहिए। प्रायः देखा गया है कलेक्टर ऋषभ गुप्ता शांत चित्त व्यक्तित्व के स्वामी हैं, आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को वे धैर्य से सुनते हैं, उसकी समस्या का निराकरण करने की कोशिश करते हैं, बावजूद उन्होंने किसानों के प्रतिनिधियों को एफआईआर करा देने की धमकी दे दी, जिसके कारण सारे ही क्षेत्रों में आश्चर्य व्यक्त किया गया है। ऋषभ गुप्ता समझते हैं कि नीचे नहीं सुनी जाती, तब ही लोग कलेक्टर तक पहुंचते हैं और कलेक्टर उम्मीद लेकर आने वाले लोगों को धमकी देकर डराने लगेंगे तो कैसे काम चलेगा? इसमें कोई दो मत की बात नहीं कि ऋषभ गुप्ता कांटों का ताज पहनकर कर्तव्य का निर्वाह कर रहे हैं। देवास जिले के तमाम नेता सिर्फ अपनी सोचते हैं, अपने पट्ठों के बारे में सोचते हैं,आम जन के बारे में सोचने वाला कोई नहीं है, यही कारण है कि अलग अलग वर्गों को अपने प्रतिनिधियों के नेतृत्व में अपनी समस्याओं के लिए आवाज उठाना पड़ती हैं और ऐसे में ऋषभ गुप्ता जैसा शांत चित्त कलेक्टर एफआईआर की धमकी देगा तो कैसे काम चलेगा?लोग यदि अपनी समस्या लेकर कलेक्टर तक पहुंच रहे हैं तो इसका सीधा सा मतलब है कि नीचे के अधिकारी इमानदारी से अपने कर्तव्य का निर्वाह नहीं कर रहे हैं और अपने निकम्मे अधिनस्थों की झल्लाहट कलेक्टर द्वारा किसानों पर उतारना ठीक नहीं कहा जा सकता। झुंझलाहट में कलेक्टर ने एफआईआर की धमकी किसानों को दे तो दी, बाद में वे भी अपने व्यवहार को लेकर अपने आप पर झल्लाए होंगे ? ऋषभ गुप्ता भी क्या करें, पूर्व कलेक्टर चंद्रमौली शुक्ला उनके लिए विरासत में प्रशासनिक कबाड़खाना छोड़कर गए हैं, वे कबाड़ से जुगाड़ करें तो कितना? आखिर उनकी झल्लाहट, झुंझलाहट कहीं तो निकलेगी,सो किसानों पर निकल गई। कलेक्टर द्वारा किसानों को दी गई एफआईआर की धमकी को परेशान कलेक्टर की झल्लाहट, झुंझलाहट समझकर किसानों ने खारिज कर देना चाहिए। *****************”
