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Friday, April 17, 2026
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स्कूल बदलने के नाम पर माता-पिता अपने बच्चों की ग्रोथ एवं संवेदनशील भावनाओं से खिलवाड़ ना करें

✍️पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101

प्रायः देखने में आता है कि माता-पिता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के नाम पर उनके स्कूल बदल दिया करते हैं। बच्चा कुछ साल एक स्कूल में पढ़ता है और माता-पिता अच्छी शिक्षा दिलाने के नाम पर उसे दूसरे किसी अच्छे स्कूल में डालने का जतन करते हैं,अच्छे स्कूल से तात्पर्य महंगे स्कूल से। हो सकता है बच्चे को स्कूल में डालते समय माता-पिता की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं रही हो, कुछ समय बाद आर्थिक स्थिति सुधर जाती है तो वे बच्चे को अच्छे महंगे स्कूल में डालने की तैयारी करने लगते हैं, कहीं-कहीं माता-पिता को लगता है स्कूल में अच्छी पढ़ाई नहीं हो रही है, इसलिए वे बच्चे का स्कूल बदलने के विकल्प पर विचार करने लगते हैं, कहीं तो समाज में कालर ऊंची करने के चक्कर में, यह दिखाने के लिए कि हमारे बच्चे महंगे स्कूल में पढ़ते हैं, बच्चों के स्कूल बदल दिए जाते हैं, इसके दीगर और भी कारण हो सकते हैं बच्चों के स्कूल बदल देने के। माता-पिता बच्चे का स्कूल बदलने का निष्ठुर निर्णय, नवीन शिक्षा सत्र प्रारंभ होने पर लेते हैं और यह समय वही है, नवीन शिक्षा सत्र प्रारंभ हुआ ही है। माता-पिता द्वारा बच्चों का स्कूल बदलने का निर्णय, उनका अपना होता है, उसमें बच्चों की सहमति शामिल नहीं होती हैं। माता-पिता अपनी संतुष्टि के लिए, अपने बदलते जीवन स्तर को ध्यान में रखते हुए बच्चे का स्कूल बदल देते हैं, लेकिन इस बदलाव का बच्चे के कोमल मन पर क्या असर पड़ता हैं? इसका ध्यान नहीं रखते। जब बच्चे का स्कूल बदला जाता है तो बच्चे के मन की क्या स्थिति होती है, प्रतिस्पर्धा की हाय-बाप में आपा-धापी की हद तक विक्षप्त हो चुके माता-पिता समझने की कोशिश ही नहीं करते। स्कूल बदले जाने की स्थिति में बच्चे के मन में सैकड़ों शंका-कुशंका और भय, कुंडली मारकर बैठ जाते हैं। नया परिवेश, नया वातावरण, नए शिक्षक, नए मित्र और उस बच्चे की स्थिति की तो कल्पना करके मन सिहर उठता है, जिसे नया विद्यालय अपने शिक्षा स्तर को बनाए रखने के नाम पर एक दो क्लास नीचे एडमिशन देता है। विद्यालय शिक्षा की दुकानें हैं और दुकानों में संवेदनाओं की कोई जगह नहीं होती, बच्चों के प्रति संवेदनशील माता-पिता को ही होना पड़ेगा, बच्चों का मनोविज्ञान, बच्चों की भावनाओं को जितने अच्छे तरीके से माता-पिता समझ सकते हैं, विद्यालय नहीं। स्कूल के स्टेटस के नाम पर नीचे की क्लास में अवनत किया गया बच्चा हीन भावना का शिकार होता है तो वहीं कईं माता-पिता पैसे के दम पर अपने बच्चे को नए स्कूल में आगे की क्लास में दाखिला करा देते हैं, ऐसे बच्चे की शैक्षणिक बुनियाद कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है। नीचे की कक्षा में अवनत किया गया बच्चा और ऊपर की क्लास में पदोन्नत किया गया बच्चा, दोनों नए विद्यालय में असुविधा महसूस करते है, इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे अपने अहम को तुष्ट करने के लिए स्कूल बदलकर बच्चों की ग्रोथ, उनकी भावनाओं से खिलवाड़ करने की कोशिश ना करें।

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