✍️पंडित प्रदीप मोदी, साहित्यकार व स्वतंत्र पत्रकार 9009597101
अधिकार की बात करना कांग्रेस में अनुशासनहीनता है, कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के निकटतम कुछ भी करें, कैसी भी घोषणा करें अनुशासनहीनता नहीं है, लेकिन पार्टी निष्ठ कोई कांग्रेसी इन गैरवाजिब, अनाधिकृत घोषणाओं पर आपत्ति दर्ज करा दे तो वह अनुशासनहीनता है। हाटपीपल्या विधानसभा क्षेत्र से पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा द्वारा राजवीर सिंह बघेल को उम्मीदवार घोषित कर देना अनुशासनहीनता नहीं है, लेकिन विश्वजीत सिंह चौहान जैसा युवा कांग्रेसी सवाल करता है कि सज्जन वर्मा किस अधिकार से उम्मीदवार घोषित कर रहे हैं तो अनुशासनहीनता हो जाती हैं, सज्जन वर्मा को ही कांग्रेस मानने वाले उनके अंधभक्त देवास कांग्रेस अध्यक्ष मनोज राजानी आगबबूला हो जाते हैं और सवाल करने वाले विश्वजीत सिंह चौहान को संगठन के दायित्व से मुक्त कर दिया जाता है। कमलनाथ ऐसे दोहरे मापदंड अपनाकर संगठन नहीं चला करते, अनुशासनहीनता तो सज्जन वर्मा ने की है, सज्जन वर्मा कोई दूध पीते बच्चे नहीं है, पूर्व केबिनेट मंत्री रहे हैं, उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के अधिकार अपने हाथ में कैसे ले लिए? किस अधिकार से उन्होंने हाटपीपल्या विधानसभा क्षेत्र से राजवीर सिंह बघेल को उम्मीदवार घोषित कर दिया? विश्वजीत सिंह चौहान ने तो आपत्ति दर्ज कराकर, कांग्रेस में लोकतंत्र को कायम रखने की जिम्मेदारी निभाई है, विश्वजीत सिंह को दंड नहीं, ईनाम मिलना चाहिए। ऐसे दोहरे मापदण्डों के कारण ही कांग्रेस की दुर्गति हुई है। राजवीर सिंह बघेल को हाटपीपल्या विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार घोषित करके सज्जन वर्मा ने अनुशासनहीनता ही नहीं की, अपितु प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का अपमान भी किया है, उन्होंने सार्वजनिक रूप से संदेश दिया है कि सज्जन वर्मा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को जेब में रखता है।
