पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101

मैं पंडित प्रदीप मोदी आज सीधे-सीधे खातेगांव-कन्नौद विधायक आशीष शर्मा के छोटे भाई रूपेश शर्मा से मुखातिब हूं, जिसने बिना अपना परिचय दिए वाट्सएप पर मुझसे चेटिंग की। मैं सीधे-सीधे इस बच्चे (रूपेश शर्मा) से मुखातिब नहीं होता, यदि यह छिछोरी शब्दावली के साथ मुझसे वाट्सएप चैट नहीं करता। हालांकि जिस नंबर से मुझसे चैट की गई, वह नंबर मेरे पास सेव नहीं था, उस नंबर की वाट्सएप डीपी पर देखो तो भगवन लिखा हुआ मिलता है। कन्नौद निवासी अपने शुभचिंतकों से जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि यह खातेगांव-कन्नौद विधायक आशीष शर्मा के भाई रूपेश शर्मा का नंबर है, इसीलिए मैं सीधे सीधे रूपेश शर्मा से मुखातिब हूं। वत्स रूपेश शर्मा, तुम्हारी अपनी कोई पहचान नहीं है, तुम खातेगांव-कन्नौद विधायक आशीष शर्मा के भाई हो, बस इतनी ही तुम्हारी पहचान है और तुम इस पहचान को आधार बनाकर खातेगांव कन्नौद विधानसभा क्षेत्र के बहुत बड़े वर्ग की नाराज़गी का कारण बने हुए हो। पीछे जो जनता के बीच तुम बीज बो कर आए हो ना, उन्होंने कांटेदार वृक्षों को जन्म दिया है और ये कांटेदार वृक्ष तुम्हारे अपने भाई की राजनीतिक लंगोटी उछालने वाले तो है ही, भाजपा को भी जनता के बीच लज्जित करने वाले साबित हो रहे हैं। उस पर बेटा तू मुझ जैसे खजूर छाप पत्रकार से मुंहजोरी कर रहा है, ठिठोली कर रहा है, मैं पूछ रहा हूं आप कौन हैं और “आका” शब्द का उपयोग आपने किसके लिए किया है? तो जवाब देता है आप अंतर्यामी है, मैंने लिखा भाई मैं साधारण इंसान हूं, तू फोकट की चकल्लस मत कर और ये बता कि तू है कौन और तूने आका शब्द का उपयोग किसके संदर्भ में किया तो बंदे ने सोशल मीडिया के एक दो कमेंट्स के स्क्रीन शॉट डाल दिए। जब पता चला कि वाट्सएप पर विधायक का भाई रूपेश शर्मा था तो फिर मैंने सीधे सीधे जनता के बीच इससे मुखातिब होना ही बेहतर समझा, क्योंकि मैंने अपने व्यक्तित्व का विकास सड़कों पर किया है, दुनिया को युनिवर्सिटी और मिलने वाले हर आदमी को प्रोफेसर माना है, जो कुछ न कुछ ज्ञान देकर ही गया है, इसलिए जन व्यक्तित्वों से जनता के बीच ही बात करना पसंद करता हूं। बताता चलूं कन्नौद के प्रखर पत्रकार चंचल भारतीय को जिला बदर किए जाने के बाद से ही मैं कन्नौद के अनेक पत्रकार, बुद्धिजीवियों से जुड़ा हुआ हूं, संपर्क में हूं। मुझे बताया गया कि हनुमान जयंती पर ग्राम डोकाकुई की शोभा यात्रा को विधायक के भाई की हठधर्मिता का शिकार होना पड़ा, शोभा यात्रा में शामिल नन्ही-नन्ही बच्चियों को और महिलाओं को नंगे पैर घंटे, दो घंटे धूप में परेशान होना पड़ा तथा यह सब रूपेश शर्मा ने जानबूझकर किया, ताकि लोग परेशान होकर शोमा यात्रा से चले जाएं और शोभा यात्रा उपस्थिति की दृष्टि से असफल हो जाए, अर्थात छिछोरे रूपेश की छिछोरी सोच। डोकाकुईं के लोग शोभा यात्रा में श्रद्धा के सुमन अर्पित कर रहे हैं, हनुमान जी के प्रति अपनी तन्मयता, अपना प्रेम अर्पित कर रहे हैं और यह मूर्ख हनुमान जी की शोभा यात्रा को राजनीतिक नजरिए से देख रहा है, उसमें अड़ंगे डालने की कोशिश कर रहा है, उसे असफल करने की कोशिश कर रहा है। मैंने पूछा यह इस शोभा यात्रा के साथ ऐसा क्यों कर रहा है तो एक नेता का नाम मुझे बताया और बताया कि उनकी पत्नी जनपद अध्यक्ष है, वे ही शोभा यात्रा निकालते हैं, रूपेश को ऐसा लगता है कि वे शोभा यात्रा निकालकर विधानसभा का टिकट ना मांग ले, छिछोरे रूपेश की छिछोरी सोच। इन्हीं सब बातों को लेकर मैंने टिप्पणी लिखी थी, जिससे बौखलाकर रूपेश मेरे सामने वाट्सएप पर आया था और शोभा यात्रा निकालने वाले डोकाकुईं के उस नेता को मेरा आका बताने का दुस्साहस कर रहा था, उस नेता से पूछना कि क्या उसमें पंडित प्रदीप मोदी का आका बनने की क्षमता और हैसियत है? रूपेश तेरे विधायक भाई ने तुझ पर अवलंबित होकर अपनी राजनीति की दुर्गति करा ली है और तू अपरिपक्व है, छिछोरा है, सत्ता के मद में मदहोश हैं, तुझे ज्ञान ही नहीं है कि तू अपने भाई की राजनीति का कितना नुकसान कर रहा है? राजनीति में गंभीरता की आवश्यकता होती है, वह तुझ में है ही नहीं और तेरे पीछे जो मैं रूपेश हूं, मैं रूपेश हूं कहकर घूम रहे हैं, ये जिधर दम, उधर हम के सिद्धांत पर चलनेवाले लुंगाड़े है, जो तुझे चने के झाड़ से नीचे नहीं उतरने दे रहे हैं। वो डोकाकुईं का नेता मेरा आका नहीं है बेटा रूपेश, मेरा आका एक ही हैं, वो है संझा लोकस्वामी वाले जीतू भाई सोनी, जो दबंग पत्रकारिता का दण्ड जेल में भोग रहे हैं, मैं उनके बुरे वक्त में उनके लिए लिखने वाला अनोखा पत्रकार हूं और आज भी उनकी प्रतीक्षा कर रहा हूं। मैं अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करता, आज के बाद मेरे जैसे खजूर छाप पत्रकार से वाट्सएप चैट करें तो पहले परिचय देना और छिछोरपंथी तो बिल्कुल करना ही नहीं, क्योंकि नेताओं के बीच कहा जाता है, मोदी जी से वाट्सएप चैट करना खजूर से पीठ रगड़ना है, इतना पढ़ने के बाद बच्चे तुझे भी कहना पड़ रहा होगा कि मैंने गुरुदेव पंडित प्रदीप मोदी से वाट्सएप चैट करके, क्यों खजूर से पीठ रगड़ी? रूपेश अभी तू बच्चा है राजनीति में सूत से भी ज्यादा कच्चा है, इसलिए आज इतना ही, आगे तुझसे मुखातिब होता रहूंगा, क्योंकि सत्ता मद तुझे सकना बैठने नहीं देगा और तू मेरी कलम को आकर्षित करता रहेगा, लिखने को प्रेरित करता रहेगा। मैं तेरी तरफ से आने वाले प्रत्युत्तर के लिए प्रतीक्षारत रहूंगा। **************
