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Friday, April 17, 2026
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देवास में कांग्रेस से टिकट तो प्रवेश को ही मिलेगा, प्रदीप टूंगते रह जाएंगे, प्रदीप चौधरी में राजनीतिक चपलता का अभाव, कंगाल कांग्रेस में प्रवेश के पास पैसे का प्रभाव

पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ 9009597101

देवास में कांग्रेस अस्सी के दशक के अंत से सत्ता का वनवास भोग रही हैं। पूर्व मंत्री चंद्रप्रभाष शेखर देवास मुख्यालय पर कांग्रेस के अंतिम विधायक रहे, उसके बाद भाजपा से स्वर्गीय महाराज श्रीमंत तुकोजीराव पवार युवराज के रूप में सामने आए और महाराज रहते हुए विधायक के रूप में लोकतांत्रिक तरीके से अपने पूर्वजों की देवास पर शासन करते रहे तथा मृत्यु पर्यन्त अपराजेय रहे। स्वर्गीय श्रीमंत महाराज जीवन पर्यन्त अपने विधानसभा क्षेत्र के होकर रहे और सारा विधानसभा क्षेत्र उनका होकर रहा, आज भी यदि विधायक के रूप में राजमाता श्रीमंत गायत्री राजे पवार राजनीतिक फसल काट रही हैं तो यह राजनीति के तेज पुंज, स्वर्गीय महाराज श्रीमंत तुकोजीराव पवार के पुण्य प्रभाव का ही प्रतिफल है। कुल मिलाकर कहा जाए तो स्वर्गीय महाराज के उदय ने देवास में कांग्रेस के सूर्य को अस्त कर दिया,तब से ही कांग्रेस देवास में एक अदद जीत को तरसती देखी जाती रही है। राजनीति के कुशल चितेरे महाराज श्रीमंत तुकोजीराव पवार का प्रभाव देवास मुख्यालय तक ही सीमित नहीं रहा, अपितु पूरे जिले में फैला है, अन्यथा पीछे जाकर देखें तो महज देवास के बागली में पूर्व मुख्यमंत्री स्व.कैलाश जोशी ने अपना मजमा जमा रखा था, वे लगातार बागली से विधायक बनते रहे, देवास जिले के अन्य हिस्सों में भाजपा का प्रभाव ना के बराबर हुआ करता था, लेकिन महाराज श्रीमंत तुकोजीराव पवार के उदय ने भाजपा को जिलेभर में आच्छादित कर दिया। आज भाजपामय देवास जिला नजर आता है तो इसके पीछे स्वर्गीय महाराज श्रीमंत तुकोजीराव पवार के प्रभाव का हाथ रहा है, आधार रहा है। महाराज श्रीमंत तुकोजीराव पवार प्रदेश व्यापी व्यक्तित्व के स्वामी थे, प्रदेश में सरकार किसी भी पार्टी की रही हो, महाराज श्रीमंत तुकोजीराव पवार पूरे राजनीतिक जीवन में अपने आप में एक सरकार रहे। देवास मुख्यालय पर तो स्वर्गीय महाराज ने कांग्रेस में हरल्लों का ढेर लगा दिया है,हर चुनाव में उन्होंने एक नए कांग्रेसी को हराया है और यह क्रम उनके जाने के बाद भी बना हुआ है, राजमाता गायत्री राजे पवार भी उप चुनाव एवं मुख्य चुनाव मिलाकर दो कांग्रेसियों को पराजित कर चुकी हैं। अब तो यह हालत है कि देवास का कोई भी कांग्रेसी राजपरिवार के सामने चुनाव लड़ने को ही तैयार नहीं होता हैं। देवास में कांग्रेसियों के हाव-भाव,लटके-झटके, आचार-व्यवहार पर दृष्टि डालें तो ऐसा लगता है, जिनके हाथों में कांग्रेस की बागडोर है, वे राजपरिवार के हाथों संचालित हो रहे हैं? कांग्रेस के जिम्मेदार देवास में कांग्रेस की जड़ खोदकर, उसमें मठ्ठा डालकर बरी-जिम्मे हो जाना चाहते हैं, देवास में जो कांग्रेस के कर्ताधर्ता बने हुए हैं, उनकी हरकतें कुछ इसी प्रकार की चुगली कर रही हैं। अंतिम कतार में खड़े देवास के नागरिक से पूछोगे कि भाजपा विधायक श्रीमंत राजमाता के सामने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से कौन सा नेता खड़ा होने की योग्यता एवं आधार रखता है तो नागरिक निर्विवाद रूप से कह देगा, कांग्रेस नेता प्रदीप चौधरी, पूछा जाए क्यों? तो नागरिक कहेगा, कोरोना काल में प्रदीप चौधरी एकमात्र ऐसा नेता था, जो देवास की डरी-सहमी जनता के साथ खड़ा था। कोरोना काल में प्रदीप चौधरी द्वारा की गई सेवाओं को देवास की जनता विस्मृत नहीं कर सकती, इसलिए नागरिक क्षेत्रों में कहा जा रहा है कि श्रीमंत राजमाता के सामने प्रदीप चौधरी कांग्रेस के प्रभावशाली उम्मीदवार साबित हो सकते हैं, लेकिन देवास में कांग्रेस की ओर से नया नाम दौड़ लगा रहा है प्रवेश अग्रवाल का। प्रवेश अग्रवाल को नगर निगम चुनाव से पहले तक देवास में कोई जानता तक नहीं था, लेकिन आजकल जिधर देखो,उधर प्रवेश अग्रवाल का नाम सुनाई देता है। प्रदीप चौधरी कांग्रेस के नक्कारखाने में तूती की आवाज होकर रह गए हैं। प्रवेश अग्रवाल इंदौर के धनपति है और उन्होंने देवास कांग्रेस में वह स्थान हासिल कर लिया है कि सोनकच्छ विधायक सज्जन वर्मा के बाद किसीको पूछा जा रहा है तो वह प्रवेश अग्रवाल हैं। देवास कांग्रेस में सारे नेता गौण हो गए हो गए हैं और प्रवेश अग्रवाल उभरकर सामने आ गए हैं,इसे प्रवेश अग्रवाल की प्रतिभा कहा जाए, प्रभाव कहा जाए,या फिर राजनीति में पैसे का योग्यतम मैनेजमेंट कहा जाए? विचारणीय है। क्या राजपरिवार के निर्देश पर देवास के जिम्मेदार कांग्रेसियों ने प्रदीप चौधरी के विकल्प के रूप में प्रवेश अग्रवाल को तैयार किया है? फिर प्रदीप चौधरी, जो देवास की जनता के दिलों में अपने लिए सम्मान रखता है, उसके पीछे क्यों नजर नहीं आए कांग्रेस और कांग्रेसी? प्रवेश अग्रवाल का उभार स्पष्ट कर देता है कि भाजपा गलियारों में भी प्रदीप चौधरी को भारी उम्मीदवार मान लिया गया है, शायद यही कारण है कि प्रदीप चौधरी की राजनीतिक लकीर छोटी करने के लिए प्रवेश अग्रवाल की लकीर बड़ी करने की कोशिश की जा रही हैं फूलछाप कांग्रेसियों द्वारा। प्रदीप चौधरी में राजनीतिक चपलता का अभाव है और वे सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भरोसे कांग्रेस में बैठे हैं, उन्हें लगता है कि आगामी चुनाव में दिग्विजय सिंह उन्हें टिकट दिलवा देंगे, लेकिन जनता के बीच कहा जा रहा है कि राघौगढ़ के राजा, देवास की राजमाता के सामने मजबूत लगने वाले उम्मीदवार की वकालत कैसे कर पाएंगे? उस पर कंगाल कांग्रेस में जो खर्च प्रवेश अग्रवाल कर सकते हैं,वह खर्च करने की प्रदीप चौधरी की ना हैसियत है और ना ही दम गुर्दे, इसलिए देवास में कहा जाने लगा है कि टिकट तो प्रवेश अग्रवाल ही लाएगा, बेचारा प्रदीप चौधरी टूंगता रह जाएगा। ************

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