पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101

ग्राम सरकार की परिकल्पना में ग्राम का विकास, ग्राम वासियों के हाथ हो, शामिल रहा हैं और इसके के लिए बाकायदा निर्वाचन प्रक्रिया सहित पूरा मंत्रालय बनाया गया, प्रशासनिक अमला खड़ा किया गया, जिसमें पंचायत सचिव, जनपद सीईओ, जिला पंचायत सीईओ जैसे पद निर्मित किए कि ये पंचायतों को मिलने वाले पैसे से गांवों में होने वाले विकास कार्यों को अपनी देखरेख में कराएंगे,चुने गए पंच, सरपंच, जनपद प्रतिनिधि, जिला पंचायत प्रतिनिधियों को मार्गदर्शन देंगे, समय-समय पर उनके कामकाजों का निरीक्षण करेंगे,लेकिन हो इसके विपरित रहा है, ये पद, अपनी जिम्मेदारी इमानदारी से नहीं निभा रहे हैं और गांवों का विकास भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है, ये पद जनप्रतिनिधियों से सांठगांठ कर ग्रामीण विकास को चरने का काम कर रहे हैं,जन धन को लूटने का काम कर रहे हैं। पहले कहा जाता था कि पटवारी प्रशासनिक भ्रष्टाचार की पहली सीढ़ी है, लेकिन ग्राम पंचायत सचिवों ने भ्रष्टाचार के सारे रिकार्ड ध्वस्त कर दिए हैं और भ्रष्टाचार के रिकार्ड ध्वस्त करने में ग्राम पंचायत सचिवों को जनपद सीईओ, जिला पंचायत सीईओ जैसे पद प्रोत्साहित करते नजर आ रहे हैं, संरक्षण प्रदान करते नजर आ रहे हैं। इन दिनों आदिवासी बहुल धार जिले की कुक्षी तहसील की ग्राम पंचायत लोहारी के भ्रष्टाचार चर्चा में बने हुए हैं। इस ग्राम पंचायत में विकास कार्य हुए ही नहीं और सचिव मंसाराम पाटीदार ने ठेकेदार को पैसा भुगतान कर दिया , ऐसा एक से अधिक मामलों में हुआ है, लेकिन जनपद सीईओ माधवाचार्य ने इस ग्राम पंचायत सचिव को कर्तव्य का पाठ कभी नहीं पढ़ाया। ग्राम पंचायत लोहारी के पंचायत सचिव द्वारा किए गए घपले, भ्रष्टाचार को लेकर जनपद सीईओ निसरपुर का मौन, सचिव से सीईओ की मिली भगत की ओर इशारा करता है। ग्राम लोहारी में सांसद निधि से स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए सन् 2018-19 में राशि स्वीकृत हुई थी, तत्कालीन सरपंच श्रीमती सुंदरबाई डोडवा, सचिव मंसाराम पाटीदार एवं ठेकेदार विक्रम चौयल ने गांव में स्ट्रीट लाइट लगाई नहीं और कूट रचित दस्तावेज तैयार कर, पैसा आहरण कर लिया,जिसकी शिकायत 28 नवंबर 2022 को जनपद पंचायत निसरपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को गई थी, लेकिन जनपद सीईओ माधवाचार्य ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया, क्योंकि पंचायत सचिव मंसाराम जनपद सीईओ का लाड़ला है। उल्लेखनीय है सरपंच सुंदरबाई डोडवा और सचिव मंसाराम पाटीदार ने दिनांक 6/09/2019 तथा 22/06/2020 इन दो तारीखों में संपूर्ण भुगतान विक्रम चौयल नामक ठेकेदार की तुलसी कंस्ट्रक्शन को कर दिया, जबकि काम हुआ ही नहीं था। एमपीईबी खुद लिख कर दे रही है कि ग्राम लोहारी में स्ट्रीट लाइट का काम पूरा नहीं हुआ है और एमपीईबी ने कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं दिया है। पैसा आहरण करने के लिए सचिव ठेकेदार ने कूट रचित दस्तावेज तैयार कर लिए, एमपीईबी के सील-ठप्पे लगा लिए और तो और ना जाने कहां का फोटो लगाकर बता दिया तथा पैसे निकाल लिए। सांसद निधि से श्मशान घाट के लिए स्वीकृत राशि भी बिना काम करे डकार ली गई। इन सब बातों का मीडिया एवं सोशल मीडिया में खूब हल्ला हुआ, लेकिन बिना काम किए जनता का पैसा डकार जाने वालों का बाल बांका नहीं हुआ, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिम्मेदार हर प्रशासनिक अधिकारी, नेता की टेबल पर इस आर्थिक अपराध की शिकायत पहुंची हैं, लेकिन कोई ध्यान देने को तैयार नहीं हैं। क्षेत्रीय नागरिकों के बीच चर्चा है कि ठेकेदार सत्ता से जुड़े किसी संत महात्मा का अनुयाई हैं, शिष्य हैं, इसलिए प्रशासन कार्रवाई करने से परहेज़ कर रहा हैं,कतरा रहा हैं। संत महात्मा बिना काम पूरा करें, पैसा खाने के लिए अपने अनुयाइयों को कभी प्रोत्साहित नहीं करते, यदि ठेकेदार अपने भ्रष्टाचार को संत की आड़ लेकर दबाने की कोशिश कर रहा है तो वह गलत कर रहा है,जिस भी संत महात्मा से जुड़ा है उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने का काम कर रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों को चाहिए कि वे जनता के साथ विश्वासघात करने वाले आर्थिक अपराध करने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करें, मामले की जांच करें, सही पाए जाने पर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने की अनुशंसा करें। अधिकारी को समझना चाहिए कि उन्हें इन सब कामों के लिए ही शासन से वेतन मिलता है।
*************
