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Friday, April 17, 2026
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प्रदेश में प्रभावशाली ढंग से उभरेगी आम आदमी पार्टी, असंतुष्ट कांग्रेसी और भाजपाई उतावले बैठे हैं उसे मजबूत करने

*पंडित प्रदीप मोदी* _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ *9009597101*

अण्णा हजारे के अनशन से जन्मे अरविंद केजरीवाल और केजरीवाल से उपजी आम आदमी पार्टी, देश की राजनीति में तेजी से पांव पसारती जा रही हैं। हालांकि भाजपा और बिना मोल के भाजपा सोशल मीडिया प्रचारक, अभी भी प्राथमिकता के आधार पर राहुल गांधी एवं कांग्रेस को निशाने पर रखे हुए हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी देश की जनता का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती चली जा रही है, शायद इसका ध्यान भाजपा के मठाधीशों को नहीं है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की केजरीवाल सरकार ने सफल शासन देकर देश की राजनीति में नये आयाम स्थापित किए हैं और देश की जनता के सामने एक अच्छा, सेवाभावी राजनीतिक उदाहरण बनकर उपस्थित हुई है, राजनीतिक विकल्प बनकर उभरी हैं। विशेषकर केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों को प्रायवेट स्कूलों से बेहतर बनाकर जनता की नब्ज पर हाथ रख दिया है। देश की जनता योगी मोदी की तरह बेऔलाद नहीं है, बाल-बच्चेदार है और जनता को सबसे ज्यादा चिंता अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की ही होती हैं, पढ़े-लिखे केजरीवाल ने जनता के सबसे कोमल भाव को अपनी राजनीति का आधार बनाया तथा सफल हुए। दिल्ली के सरकारी स्कूल देशभर में आदर्श स्कूल बनकर चर्चित हुए हैं, आयकर आयुक्त रहे केजरीवाल ने बताया है कि सरकार में इच्छाशक्ति हो तो बर्बादी की कगार पर जा पहुंचे सरकारी स्कूलों को प्रायवेट स्कूलों से बेहतर बनाया जा सकता है। दिल्ली में सरकारी स्कूलों की बदली सूरत ने देश की जनता को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी, आम आदमी पार्टी पर ध्यान देने पर विवश किया है। अपनी राजनीति के प्रारंभिक दिनों में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा पर लगातार हमलावर रहे, वह भी इसलिए कि प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा उन्हें निशाने पर लेले, ताकि देश की राजनीति में उनका कद बढ़ जाए, लेकिन मोदी एवं भाजपा केजरीवाल तथा आम आदमी पार्टी को नजर अंदाज करके चलने की नीति पर चलते रहे। केजरीवाल मोदी एवं भाजपा पर हमलावर रहते हुए मुख्यमंत्री के तौर पर दिल्ली की जनता के दिल जीतने वाले काम भी करते रहे, परिणाम यह रहा कि दिल्ली का निकटतम राज्य पंजाब, दिल्ली सरकार के कामों से प्रभावित हुआ और पंजाब की जनता ने आम आदमी पार्टी के हाथ में प्रदेश की सत्ता सौंप दी। सही मायने में तो आम आदमी पार्टी और केजरीवाल को भाजपा एवं भाजपा के फोकटिए सोशल मीडिया प्रचारक पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बन जाने के बाद निशाने पर लेने लगे हैं। कड़वा सच तो यह है कि केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के सामने विश्व नेता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं भाजपा हीन भावना का शिकार हो जाते हैं, क्योंकि देश की राजधानी दिल्ली में ही भाजपा को पसंद करनेवाले लोग नहीं हैं। देशभर में अपने प्रभाव से सरकार बनवा देने का अहंकार रखने वाले प्रधानमंत्री, सीना ठोककर “एक अकेला, सब पे भारी” कहने वाले प्रधानमंत्री मोदी, देश की राजधानी दिल्ली की जनता के मन पर प्रभाव नहीं रखते हैं और हर महीने अपने मन की बात सुनाते हैं, दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार इस बात का प्रमाण है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्व में लोकप्रिय है और अपने देश की राजधानी दिल्ली में ही लोकप्रिय नहीं है, वहां विरोधी पार्टी आम आदमी पार्टी की सरकार है एवं केजरीवाल मुख्यमंत्री हैं, यह बात निश्चित तौर पर भाजपा सहित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हीन भावना का शिकार बनाती होगी? आम आदमी पार्टी के नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों का उपयोग भी कुछ ऐसी ही चुगली करता नजर आता है। देश की सत्ता पर आरूढ़ भाजपा का अचानक आम आदमी पार्टी पर आक्रामक हो जाना, इस पार्टी को ताकत प्रदान करता दिखाई देने लगा है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि नीचे से ऊपर चढ़ने में समय लगता है, ऊपर से नीचे फिसलने में समय नहीं लगता और केजरीवाल की आम आदमी पार्टी देश की राजधानी दिल्ली में शासन कर रही हैं। कांग्रेस को कांग्रेस के ही गुटबाज नेता खा गए और देश की जनता अब आम आदमी पार्टी को कांग्रेस की जगह रखकर देखने लगी है। चुनाव दर चुनाव, हर विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी प्रभावशाली प्रदर्शन करती चली जाएगी, क्योंकि चुनाव के समय कांग्रेस भाजपा का हर असंतुष्ट आम आदमी पार्टी को प्राथमिकता देने लगेगा, आम आदमी पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ने की जुगत भिड़ाने लगेगा। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव है और इस चुनाव में आम आदमी पार्टी के प्रभावशाली प्रदर्शन करने की पूरी संभावना है, क्योंकि भाजपा में वैचारिक विप्लव की स्थिति बनने वाली हैं, ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में आए कांग्रेसियों को सत्ता लोभ के चलते भाजपा क्षत्रपों द्वारा झेल लिया गया है, लेकिन चुनाव में झेलना मुश्किल है। ऐसी परिस्थितियों में जनता के बीच कांग्रेस भाजपा को सांपनाथ नागनाथ की संज्ञा मिलने लगी है, ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता आम आदमी पार्टी को गंभीरता से लेले तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए, उसकी झोली में दस बारह विधायक डाल दे तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए, क्योंकि कांग्रेस भाजपा के असंतुष्ट प्रदेश में आम आदमी पार्टी को मजबूत करने को उतावले बैठे हैं। *****************

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