✍️सरदार पाटीदार, सरदारपुर
ज्ञात हो कि नवम्बर माह में चाचा नेहरू के जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है जो कि 14 नवम्बर को आता है इस बाल दिवस के आयोजन को लेकर हर विद्यालय के बच्चो में बहुत ही उत्साह होता है। ऐसा ही उत्साह टप्पा तह. दसई के निजी विद्यालय स्वामी विवेकानंद हायर सेकेंडरी स्कूल में गत 26 नवम्बर को देखने को मिला इस मेले का सारा श्रेय संस्था प्रबन्धक को जाता है जो कि अशोक सिंह रघुवंशी है। श्री रघुवंशी के द्वरा बच्चो की पढ़ाई और कुशल व्यापार की नीति को विकसित करने के लिए वे हर वर्ष विद्यालय में मेले का आयोजन करवाते है जिससे बच्चे इस एक दिवसीय मेले में अपने जीवन जीने में सहायक अभिन्न अंग पैसे कमाने की जिज्ञासा को अपने अंदर जाग्रत कर एक दिन के व्यापारी बनने का सफल प्रयास करते है और जीवन मे व्यापारीक क्षेत्र में नफा नुकसानी के गणित को समझते है। साथ ही इस प्रकार के मेले के आयोजन से बच्चे खुल कर जीवन का आनंद लेते है। क्योकि यही वह मेला होता है जो दुनिया के अन्य मेलो की भीड़ से दूर अपने खुद के विद्यालय केम्पस में आयोजित होता है जहाँ कक्षा नर्सरी से लेकर अन्य बड़ी कक्षाओं तक अध्ययन करने वाला बच्चा अकेले भी अपने आप को सुरक्षित महसूस करता है। इसका दूसरा कारण यह भी है कि विद्यालय में लगने वाले मेलो में चाहे शिक्षित व्यक्ति आये या अशिक्षित सब मर्यादा में रह कर मेले का आनंद लेते है।
विभिन्न प्रकार की लगी दुकाने नन्हे बच्चे बने व्यापारी
स्वामी विवेकानंद विद्यालय में बच्चो शुध्द एवं पौष्टिक खाद्य सामग्री जैसे घर पर बने भजिये, पटेटो फ़्राय चिप्स, घर पर बने पानी पूरी, भेल, घरेलू मसालों से तैयार आलूबड़ा, समोसा, दही-पूरी, मसाला-छाछ आदि अन्य पोष्टिक खाद्य व्यजनों की दुकान लगी। उक्त दुकानों के व्यापार की खासियत यह रही है सारा सामान घर पर तैयार किया गया था जो कि अन्य बाजार के समान की तुलना में लजीज तो साथ ही मसालों की मात्रा को बच्चे पचा सके उन्हें सब हजम हो ऐसी रखी गई थी।
*बच्चे बने व्यापारी तो माता पिता ने भी खरीदा सामान*
जब व्यापार करने वाला साहस दिखाता है तो उनको देखने का आनंद ही अलग होता है। इसी आनन्द के नजारे विद्यालय में लगे बाल मेले में देखने को मिले जहां बच्चो के द्वारा लगाई गई दुकानों से बच्चो के माता पिता भी सामान खरीदने में पीछे नही हटे। उनके द्वारा खरीददारी करने पर बच्चो का उत्साह डबल हो गया क्योकि ग्राहकों की संख्या सीधी दुगुनी होने लगी। इधर मेले में कुछ चुनिन्दा दुकानों ने वास्तविक मेले जैसा माहौल बना दिया था उन दुकानों में ज्यादा वाहवाही बटोरने वाली दुकान गुरुकृपा गराडू सेंटर रही वही उसके साथ काश्मीरी कुल्फी ने भी बच्चो सहित अभिभावकों को अपनी ओर खींचा इसी के साथ बजरंगी निशाना पाइंट ने बाल मेले में बड़े मेले जैसी स्थिति को बनाये रखा।
*बच्चो ने मेले के अयोजन के बावजूद भी रखा नियमो को आगे*
ज्ञात हो कि स्वामी विवेकानंद संस्थान के बच्चे अनुशासन की बात में कभी पीछे नही हटते और विद्यालय में मेला आयोजित होने वाले दिन भी विद्यालय के यूनिफार्म में शामिल हुए और अपने आप को अनुशासित विद्यार्थी के रूप में दर्शाया। वही कुछ बच्चे विद्यालय के मेले में विद्यालय की यूनिफॉर्म होने के बाद भी मेले में बिल्कुल रईसी ठाठ में नजर आए।
