✍️पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101
खातेगांव-कन्नौद विधानसभा क्षेत्र विधायक आशीष शर्मा से क्षेत्र का ब्राह्मण तबका भी निराश हुआ है, चूंकि खातेगांव कन्नौद विधानसभा क्षेत्र ब्राह्मण बाहुल्य क्षेत्र है, इसलिए भाजपा का ब्राह्मण उम्मीदवार अथवा वैश्य उम्मीदवार पर ही ध्यान केन्द्रित रहा है। वर्तमान विधायक आशीष शर्मा दो बार के विधायक हैं और भाजपा पुनः उन्हें टिकट देती है तो वे तीसरी बार क्षेत्र की जनता से जनादेश मांगने जाएंगे, वैसे क्षेत्र में माना जा रहा है कि यदि भाजपा आशीष शर्मा को पुनः टिकट देती है तो वह अपनी पारंपरिक सीट खातेगांव कन्नौद, खो देगी। क्षेत्र की जनता में जितनी नाराजगी विधायक आशीष शर्मा से नहीं है, उससे कहीं ज्यादा नाराजगी, उनके आसपास बिखरे लोगों और उनके अनुज रूपेश शर्मा के सत्ताजनित अहंकार से है। खातेगांव कन्नौद विधानसभा क्षेत्र में अधिकारियों का आम जनता से मुंह मोड़कर, विधायक के इर्द-गिर्द घूमते लोगों एवं विधायक के भाई के प्रति समर्पित हो जाना, नाराजगी का मोटा कारण रहा है। विधायक के आसपास रहने वाले लोग और उनके भाई ने अधिकारियों के अधिकारों का मनमाने ढंग से उपयोग किया है तथा आम आदमी को तला है। विधायक आशीष शर्मा के इस कार्यकाल में कुछ काण्ड ऐसे हो गए हैं, जिनसे विधायक आशीष शर्मा की जनता के बीच बनी छवि को मोटा नुकसान पहुंचा है। एक उनके विधानसभा क्षेत्र में आदिवासी परिवार को मारकर जमीन में गाड़ देना और लगभग पचास दिन बाद उस परिवार के कंकालों का जमीन के उपर आना। इस लोमहर्षक घटनाक्रम से सारा प्रदेश सिहर उठा था, सारा आदिवासी वर्ग आन्दोलित हो उठा था, उस परिवार की बची बेटी आज भी सोशल मीडिया पर कराहती नजर आ जाती हैं। इस घटना ने एक बहुत बड़े आदिवासी वर्ग को भाजपा से दूर किया, कारण रहा विधायक आशीष शर्मा ने पुलिस प्रशासन के सूचना तंत्र के फेल हो जाने पर पुलिस अधिकारियों को कटघरे में खड़ा नहीं किया। दूसरी घटना मरते हुए युवक का विधायक के भाई पर जहर दिलवाने का आरोप लगाना, ये दो घटनाक्रम ऐसे थे, जो जनता के सामने थे, जिससे चारों तरफ यह संदेश संप्रेषित हुआ कि विधायक के आसपास रहने वाले लोग और उनके भाई सत्ता के मद में मदांध हो गए हैं, बाकी मां नर्मदा की छाती छलनी करके रेत के कारोबार को लेकर तो रोज ही सोशल मीडिया पर रोने रोए जाते हैं, लेकिन इस पर विधायक का मौन भी जनता की नाराजगी का कारण बना हुआ है। रही बात क्षेत्र के बहुसंख्यक ब्राह्मण समाज की तो वह विवेकशील विश्वास का स्वामी होता है, अंधा विश्वास करना ब्राह्मण समाज का स्वभाव ही नहीं होता। खातेगांव कन्नौद विधानसभा क्षेत्र का बहुसंख्यक ब्राह्मण समाज भी विधायक आशीष शर्मा से निराश हुआ है। इस वर्ग का मानना है कि हर वर्ग के लिए राजनीति में आरक्षण है, लेकिन सामान्य वर्ग के लिए पद आरक्षण कभी-कभी मिलता है तो उसे उसका हक मिलना चाहिए। कन्नौद नगरीय निकाय चुनाव में सामान्य वर्ग की, विशेषकर ब्राह्मण वर्ग की महिला को अध्यक्ष बनाने के लिए प्रयास ना कर विधायक आशीष शर्मा ने ब्राह्मणों को निराश किया है, मर्यादा में बंधा ब्राह्मण मुखर नहीं होता, लेकिन अवसर आने पर वह अपनी निराशा का प्रदर्शन अवश्य करता है। विधायक आशीष शर्मा के विधानसभा क्षेत्र की ब्राह्मण चौपालों पर अब निराश ब्राह्मण, खातेगांव के नीलेश जोशी का नाम लेने लगे हैं, वे उनमें संभावना तलाशने लगे हैं, लेकिन एक बड़ा वर्ग यह भी स्वीकार करता है कि नीलेश जोशी में आशीष शर्मा के आगे आकर अपने आपको प्रस्तुत करने का साहस नहीं है और वैसे भी जिनके नाम जनता के बीच लिए जाने लगते है, भाजपा उनको टिकट नहीं देती? क्या नीलेश जोशी को संभावित उम्मीदवार मानकर उनका नाम चलाने की कोशिश की जा रही हैं, ताकि भाजपा के शीर्ष नेता उनके नाम पर विचार ही ना करें? क्योंकि कुछ समय से खातेगांव से उम्मीदवार बनाने की आवाज तेज हुई है और वर्तमान विधायक आशीष शर्मा कन्नौद से आते हैं। विधानसभा क्षेत्र को क्षेत्रफल की दृष्टि से देखें तो खातेगांव कन्नौद विधानसभा क्षेत्र का अधिकांशतः क्षेत्रफल खातेगांव के हिस्से में आता है, नीलेश जोशी की बनने वाली संभावना को क्षीण करने के लिए उनका नाम उछाला जा रहा है? आशीष शर्मा से दबे हुए नीलेश जोशी आगे नहीं आएंगे तो आशीष शर्मा का विकल्प कौन? क्या भाजपा एक बार फिर क्षेत्र के सम्मानित विधायक रहे वयोवृद्ध ब्रजमोहन धूत की ओर आकर्षित होगी और उनसे सलाह मशविरा करके किसी वैश्य युवा को आगामी चुनाव में प्रस्तुत करेगी?
