पंडित प्रदीप मोदी_(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ 9009597101

देवास कांग्रेस की स्थिति बड़ी ही विचित्र है, दयनीय है, दया की पात्र है, हास्यास्पद है, हरल्लास्पद है, कांग्रेस हरल्लों की फौज है और यह सब कांग्रेसियों के कारण ही है। कांग्रेस में योग्य को तवज्जो नहीं दी जाती और अयोग्य चाटूकारों को माथे का मुकुट बना लिया जाता है, हालांकि भाजपा में भी यह बीमारी अपना घर बना चुकी है, लेकिन सत्ता की खुमारी में अभी भाजपा को इस बात का अहसास नहीं हो रहा है। चूंकि कांग्रेस सत्ता का वनवास काट रही हैं, इसलिए उसकी बीमारियां उभरकर सामने आ गई और लाइलाज नजर आने लगी है। देवास में कहने को कांग्रेस है, लेकिन उसके कर्ताधर्ताओं ने कांग्रेस को दशकों से पैलेस की “बी” टीम बनाकर रखा है। खानापूर्ति के लिए बिखरे-बिखरे कांग्रेसी चाहे आंदोलन कर ले, विपक्षी पार्टी के नेता होने का भ्रम पाल ले,
विचार विहीन मीडिया में अपना ही लिखा प्रेस नोट पढ़कर मन समझा ले, लेकिन जनता को तो यही लगता है कि देवास कांग्रेस का दशकों से संचालन पैलेस ही कर रहा है। कांग्रेस से विधानसभा चुनाव कौन लड़ेगा? इसका निर्धारण पैलेस करता है और पैलेस कांग्रेस के कमजोर नेता को टिकट दिलाता है तथा चुनाव जीत लेता है, इस प्रकार पैलेस ने देवास कांग्रेस में हरल्लों की फौज खड़ी कर दी है एवं कांग्रेस को हरल्लास्पद बना दिया है। जो कांग्रेसी पैलेस को नब्बे के कोण में झुककर सलाम बजाते हैं, वे चुनाव में कांग्रेस के लिए नहीं, पैलेस के लिए काम करते हैं और इस प्रकार की चर्चा अनौपचारिक बातचीत में कांग्रेसियों से ही सुनी जा सकती है। पैलेस जितना भाजपा में प्रभावशाली है, उतना ही कांग्रेस में भी प्रभावशाली है, क्योंकि राजे-महाराजे किसी भी पार्टी में रहे, ये पहले राजसी हितों को तवज्जो देते हैं, बाद में पार्टी को और कोई भी ऐसी राजनीतिक पार्टी नहीं है, जो राजा-महाराजा के प्रभाव से मुक्त हो, इसीलिए देवास में जनता के बीच कहा जा रहा है कि कांग्रेस का टिकट पैलेस ही निर्धारित करेगा।
देवास में कांग्रेस नेता हार-हारकर हताश हो गए हैं, बावजूद प्रदेश कांग्रेस महासचिव प्रदीप चौधरी कोरोना काल से ही विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर जनता के बीच सक्रिय हैं, बीते दो तीन वर्षों के अंदर चौधरी ने विधायक बनने के लिए जनता के बीच अच्छाखासा निवेश किया है, इस निवेश का प्रदीप चौधरी को प्रतिफल भी मिला है, जनता के बीच प्रदीप चौधरी पैलेस को टक्कर देने वाला कांग्रेस नेता बताया जा रहा है। यह सच भी है, जब कोरोना काल में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के नेताओं ने देवास की जनता को लावारिस छोड़ दिया था, तब कांग्रेस नेता प्रदीप चौधरी राहत का परवाना बनकर जनता पर मर मिटा था। जनता के मन में सवाल वही है कि क्या देवास की जनता के बीच गहरी पैठ बना चुके प्रदीप चौधरी को पैलेस टिकट लेने देगा? कमलनाथ और दिग्विजय सिंह पैलेस के हितों का ध्यान रखेंगे या प्रदीप चौधरी को तरजीह देंगे? उधर इंदौरी व्यवसाई प्रवेश अग्रवाल भी देवास से चुनाव लड़ने को उतावले नजर आ रहे हैं, उन्होंने देवास में धनबल के आधार पर अपना अच्छा-खासा प्रचार कर रखा है और यह भी प्रचारित कर रखा है कि वे पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की नाक के बाल है। प्रदीप चौधरी के टिकट को लेकर जनता के मन में इसलिए भी संदेह है कि एक समय पर पूर्व महापौर जयसिंह ठाकुर की लोकप्रियता चर्मोत्कर्ष पर थी, शायद उस समय जयसिंह ठाकुर को कांग्रेस टिकट दे देती तो महाराज श्रीमंत तुकोजीराव पवार की अपराजेय राजनीति पराजित हो जाती, तब जयसिंह ठाकुर का टिकट काटकर रतनलाल चौधरी को दे दिया था, रतनलाल चौधरी महज पांच हजार वोट से पराजित हुए थे। वह मेहनत जयसिंह ठाकुर की थी, लेकिन सबसे कम वोट से हारने का सम्मान मिला रतनलाल चौधरी को।
बाद में जयसिंह ठाकुर महापौर बने, धन कमाने में ऐसे मशगूल हुए कि अपनी लोकप्रियता का ह्रास कर लिया और बाद में चुनाव लड़े तो वे भी हार गए। अब प्रदीप चौधरी और प्रवेश अग्रवाल पैलेस के सामने चुनाव लड़ने के लिए व्यायाम करते दिखाई दे रहे हैं। इनके बीच में एक नेता ऐसा भी है, जिसका वैचारिक धरातल बेहद मजबूत है, वह लंबे समय से जनता के बीच कांग्रेस को प्रभावशाली ढंग से रख रहा है और वह नेता हैं पंडित रितेश त्रिपाठी। त्रिपाठी में वैचारिक प्रतिबद्धता है, कांग्रेस के प्रति निष्ठा है, लेकिन आत्मसम्मान ताक पर रखकर चाटुकारिता करना शायद इस नेता को नहीं आता। देवास कांग्रेस के सबसे प्रतिक्रियावादी नेता के रूप में रितेश त्रिपाठी की पहचान है, जिसके जनहितैषी मुद्दे जनता का ध्यान आकर्षित करते हैं। यदि पैलेस प्रदीप चौधरी को रोकने के लिए कांग्रेस में जमावट करें तो रितेश त्रिपाठी की लाटरी लग सकती है और विचार विहीन कांग्रेस में विचारवान नेता को प्राथमिकता मिल जाए। ****************
