
पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ 9009597101
देवास में कुछ समय से आबकारी विभाग के कामकाजों के बड़े चर्चे हैं। इधर नए ठेकेदारों के आ जाने से तथा विभाग में नए अधिकारी के आ जाने से पन्द्रह अगस्त पर पत्रकारों को दिए या दिलाए जाने वाले विज्ञापन की परंपरा टूट गई तो पत्रकार जगत आगबबूला हो गया और आबकारी विभाग के कामकाज जनता के बीच चर्चा के विषय बन गए। यदि पत्रकार,विभाग की छोटी-मोटी कार्रवाई को भी बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं तो कम-से-कम तीज-त्योहार को विज्ञापन की अपेक्षा तो कर ही सकते हैं। आबकारी विभाग ने इस 15 अगस्त के उपलक्ष्य में पत्रकारों को विज्ञापन की व्यवस्था नहीं कराई और संकट में आ गया।
आबकारी विभाग 15 अगस्त,26 जनवरी को विज्ञापन की व्यवस्था कराता आया है और पत्रकारों के लिए ये राष्ट्रीय त्योहार कुछ उपार्जन कर लेने के निमित्त बनकर आते हैं। उल्लेखनीय हैं,15 अगस्त से पहले देवास में पत्रकारों का आंदोलन चर्मोत्कर्ष पर था, लेकिन 15 अगस्त पर कुछ पा लेने के चक्कर में पत्रकारों ने अपमानजनक स्थिति में अपना आंदोलन समाप्त कर लिया था और आबकारी विभाग ने विज्ञापन तक की व्यवस्था नहीं कराई, उसे कोप का भाजन तो बनना ही था। 15 अगस्त पर आबकारी विभाग द्वारा पत्रकार इसलिए उपेक्षित हो गए कि शराब ठेकेदार नए और आबकारी विभाग की जिलाधिकारी भी नई, उन्हें नहीं मालूम कि मीडिया को भी साधकर चलना पड़ता है। जिनके हाथ में इस सारे कामकाज की जिम्मेदारी थी,वे अपनी जेब भरने में मस्त रहे, उनके विचार भी देवास के पत्रकारों के प्रति अच्छे नहीं रहे, उन्होंने गिने-चुने पत्रकारों से याराना गांठकर मान लिया कि सारे पत्रकार इनके गुलाम है। आबकारी विभाग में जिलाधिकारी नई आई है, उन्हें इन सब बातों का इल्म नहीं, उन्होंने मान लिया कि उनके अधिनस्थ सब ईमानदार हैं और व्यवस्थित काम करने वाले हैं।
अधिनस्थ छोटी-मोटी कार्रवाई कर जिलाधिकारी को संतुष्ट करते रहे,जिलाधिकारी इन्हीं कार्रवाईयों को बताकर अपने वरिष्ठाधिकारियों को संतुष्ट करती रही और समझती रही कि सबकुछ ठीक चल रहा है, जबकि इन छोटी-मोटी कार्रवाई को पत्रकार बड़ी बताकर पेश करते रहे हैं। वास्तविकता तो यह है कि इन छोटी-मोटी कार्रवाईयों की आड़ में आबकारी विभाग के बड़े-बड़े कारनामें छुपाने की कोशिश की जाती रही हैं। शासन द्वारा आवंटित दुकानों पर अंकित मूल्य से अधिक पर शराब बेची जाती रही हैं, किराना दुकानों पर, ढाबों पर धड़ल्ले से शराब बिकती रही हैं, उज्जैन रोड स्थित शराब की दुकान पर तो दो-तीन दिन एक के ऊपर एक फ्री का आफर चला है। इन सबको तो छोड़ो, आबकारी विभाग की नाक के नीचे अवैध रूप से अहाता संचालित होता रहा है और कहा जाता रहा है कि इस अवैध अहाते में आबकारी विभाग के किसी कनिष्ठ अधिकारी की भी साझेदारी है।
आबकारी विभाग छोटी-मोटी कार्रवाई कर इन बड़े कारनामों पर पर्दा डालता रहा है। मीडिया अपने वाली पर आ गया तो देवास के आबकारी विभाग को अहसास हुआ कि उसकी स्थिति अंधे जैसी है,जैसे अंधा जो करता है,उसे जमाना देखता है,लेकिन अंधा ये समझता है कि उसे कोई नहीं देख रहा है।यह अहसास होते ही आबकारी विभाग में एक अधिकारी को पीआरओ बना दिया गया है और अव्यवस्थाओं के लिए जिम्मेदार अधिकारी से प्रभार छिनकर अन्य अधिकारी को दे दिया है। डेमेज कंट्रोल के लिए उन कार्रवाईयों का ढिंढोरा पीटकर आबकारी विभाग अपनी पीठ खुद थपथपाने की कोशिश कर रहा है, जो आंशिक है, अपर्याप्त हैं और वरिष्ठाधिकारियों को समझाने के लिए की गई कार्रवाईयां है, उपलब्धियां हैं। आबकारी विभाग की ओर से अभी भी योग्य एवं सार्थक कार्रवाई नहीं की जा रही हैं। *************
