✍️बेबाक आजाद 9993756976
गीत की लाइन है “पिंजरे के पंछी रे तेरा दर्द न जाने कोई” ये लाइन इन दिनों किसानों के ऊपर सटीक बैठ रही है। कहने को प्रदेश में भाजपा सरकार है और देश के कृषि मंत्री प्रदेश के पूर्व मुखिया शिवराजसिंह चौहान है लेकिन कृषि मंत्री किसान पुत्र होते हुए भी किसानों का दर्द नहीं समझ पा रहे हैं या समझना ही नहीं चाह रहे हैं। यूं तो किसानों की खाद को लेकर, फसलों के उचित दाम को लेकर समस्याएं कम नहीं हो रही वहीं दूसरी ओर जमीन अधिग्रहण एक बड़ी समस्या पैदा हो रही है। जिसमें सरकार मार्ग निर्माण के नाम पर मन मर्जी तरीके से किसान की भूमि का अधिग्रण कर रही है। जबकि बिना जमीन अधिग्रहण किए भी मार्ग निर्माण किया जा सकता है। यदि फिर भी सरकार को जमीन अधिग्रहण कर के ही मार्ग निकालना है तो किसानों को उनकी मर्जी का मुआवजा भी मिलना चाहिए। हम बात कर रहे हैं धार जिले के भैंसोला सेमलखेड़ा के किसानों की यहां पर बदनावर से गुजरात को जोड़ने वाला व्हाया भैंसोला से फोरलेन मार्ग निर्माण होना है जिसके लिए कई किसानों की जमीन अधिग्रहीत की सूचना है जिसपर क्षेत्र के किसानों ने कलेक्टर धार और एसडीएम बदनावर को अपनी समस्या से अवगत करवाया है। जिसमें उन्होंने मार्ग निकले से उनको होने वाली कठिनाइयों एवं उनके नुकसान से अवगत करवाया है। किसानों का कहना है कि पूर्व में जो मार्ग निकला है उसी पर फोरलेन निर्माण करवाया जाए तो किसी का कोई नुकसान नहीं होगा और यदि नई जगह प्रस्तावित मार्ग निकाला गया तो किसानों को अपूरणीय क्षति होगी। इस मार्ग निर्माण में बड़ी संख्या में किसान प्रभावित होंगे। जिसमें हजारों फिट की सिंचाई की पाइप लाइन, चार कुएं, छः हॉल, पांच मकान, दस बगीचे तहस नहस होंगे साथ ही पचास से सौ साल पुराने फलदार आम के वृक्षों की भी बलि चढ़ाई जाएगी। इनमें एक किसान तो भूमिहीन ही हो जाएगा और एक किसान की स्थिति तो ऐसी है कि पूर्व में निकाले गए सरदारपुर बदनावर मार्ग में जिस खेत में से सरकार ने बिना मुआवजा दिए मार्ग निकाला था उसी खेत के दूसरे छोर से फिर फोरलेन के लिए जमीन छीनने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि या तो पुराने मार्ग पर से ही फोरलेन मार्ग निकाला जाए अन्यथा उन्हें मुआवजा बाजार के भाव से दिया जाय। ऐसा नहीं होने की दशा में किसानों द्वारा बड़ा कदम भी उठाए जाने की चर्चा बनी हुई है।
