पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101

इन दिनों देवास की कांग्रेस राजनीति में पूर्व मंत्री सोनकच्छ विधायक सज्जन वर्मा की सह्रदयता के बड़े चर्चे हैं, उन्होंने खुलेआम घोषणा कर दी कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेता राजवीर सिंह बघेल हाटपीपल्या विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार होंगे। कांग्रेसी गलियारों में आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है कि अपने सारे राजनीतिक जीवन में बघेल परिवार से वैचारिक मतभेद रखने वाले, खुन्नस रखने वाले सज्जन वर्मा, बघेल परिवार के प्रति अचानक इतने सह्रदय कैसे हो गए कि ना पीसीसी की चिंता पाली,ना पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ की बात का मान रखा और कह दिया कि आगामी विधानसभा चुनाव में हाटपीपल्या विधानसभा क्षेत्र से राजवीर सिंह बघेल उम्मीदवार होंगे? उल्लेखनीय है हाल ही में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी कांग्रेस नेता अपने आपको उम्मीदवार घोषित कर जनता के बीच व्यवहार ना करें, अन्यथा कुछ समय पहले तक देवास की जाजम पर कांग्रेस नेता प्रवेश अग्रवाल और प्रदीप चौधरी उम्मीदवार बनकर ही गली-गली चुनावी गीत गा रहे थे। बड़े निवेशक बनकर प्रवेश एवं प्रदीप राजनीति में बड़ा निवेश कर चुके हैं, लेकिन कमलनाथ के प्रदेश संदेश के बाद ये दोनों मौन है तो सज्जन वर्मा ने राजवीर सिंह बघेल को हाटपीपल्या विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार घोषित कैसे कर दिया? दरअसल वेंटीलेटर पर पड़ी देवास कांग्रेस में पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा ने अपने आपको स्वयंभू सुप्रीम नेता घोषित कर लिया है, सज्जन वर्मा देवास कांग्रेस अध्यक्ष मनोज राजानी के अतिरिक्त किसी पर विश्वास नहीं करते, उनके लिए राजानी को छोड़कर, देवास का हर कांग्रेसी उपयोग करके फैंक देने की वस्तु है और मनोज राजानी के लिए सज्जन वर्मा ही कांग्रेस है। देवास की जनता ने महसूस किया है सज्जन वर्मा ने हमेशा अपने हितों को सर्वोपरि माना है, कांग्रेस हितों को नहीं। सवाल किया जा रहा है राजवीर सिंह बघेल को हाटपीपल्या से उम्मीदवार बनाने में पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा के कौन से हित सध रहे हैं? क्या कांग्रेस नेता प्रदीप चौधरी का बढ़ता विशाल कद, भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस नेता सज्जन वर्मा को भी परेशान कर रहा है? यह सही है प्रदीप चौधरी ने आम जनता के बीच बहुत लोकप्रियता अर्जित की है। कोरोना काल में कीट पतंगों की तरह मरती जनता,विलाप करती जनता के बीच एकमात्र प्रदीप चौधरी ऐसा नेता था, जो देवास की जनता को तन-मन-धन से ढांढस बंधा रहा था, बाकी नेता गधे के सिर से सिंग की तरह गायब हो गए थे, ये बात परिजन, प्रियजन खोने वाले देवास के लोग कैसे भूल सकते हैं? जीवन रक्षक इंजेक्शन की कालाबाजारी, आक्सीजन बेचने की निर्लज्जता जैसे किस्से भी उस समय बहुत चलायमान रहे, ऐसे समय में टीम प्रदीप चौधरी ने जनता के बीच जो काम किया उसने उनका कद विशाल से भी विशालतम बना दिया है और चौधरी का यह कद, कांग्रेस भाजपा के नेताओं को परेशान कर रहा है। अंतिम कतार में खड़े देवास के किसी भी व्यक्ति से पूछ लेना, यदि कांग्रेस प्रदीप चौधरी को टिकट देती है तो ? वह यही कहेगा कि कांग्रेस के पास प्रदीप चौधरी के अलावा दूसरा कोई उम्मीदवार ही नहीं है और फिर प्रदीप चौधरी देवास की जनता के दिलों पर राज करता है। जनता कांग्रेस के अन्य नेताओं को भी देखती है, जो सिर्फ खुद के लिए राजनीति करते हैं, लेकिन प्रदीप चौधरी को जनता ने जनता के लिए राजनीति करते देखा है। प्रदीप चौधरी को रोकने के लिए इंदौरी नेता प्रवेश अग्रवाल को देवास में लाया गया, ताकि पवार राजघराने के सामने कमजोर उम्मीदवार खड़ा करके राजघराने के राजनीतिक हितों की रक्षा की जा सके, क्योंकि कोरोना काल में प्रदीप चौधरी की सेवाओं ने प्रतिमान रचे हैं और उन्हें राजघराने के सामने प्रभावशाली राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बनाकर खड़ा किया है। देवास की जनता दशकों से देख रही है राजघराना कांग्रेस भाजपा दोनों में समान रूप से प्रभावशाली रहा है, उसने देवास में कांग्रेस के टिकट वितरण को प्रभावित किया है। जनता के बीच कहा जा रहा है कि कांग्रेस प्रदीप चौधरी को हाटपीपल्या से उम्मीदवार बनाना चाहती है और प्रदीप चौधरी देवास से चुनाव लड़ना चाहते हैं, जबकि प्रदीप चौधरी को कोरोना काल में की गई समर्पित सेवाओं ने देवास जिले का नेता बना दिया है। सज्जन वर्मा की समस्या यह है कि वे अंधों में काने राजा बने रहना चाहते हैं, देवास से उनके अलावा कोई विधायक नहीं होना चाहिए और प्रदीप चौधरी की यह स्थिति है कि उन्हें हाटपीपल्या से टिकट मिले या देवास से, वे प्रभावशाली प्रदर्शन करेंगे। हाटपीपल्या से राजवीर सिंह बघेल का नाम उछालने के पीछे सज्जन वर्मा की मंशा यही नजर आती है कि प्रदीप चौधरी को रोका जाए और राजवीर सिंह बघेल की कमजोरी है उन्हें विरासत में मिला अहंकार।
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