पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ 9009597101

कलेक्टर चंद्रमौली शुक्ला और एसपी शिवदयाल सिंह के स्थानांतर के बाद देवास ने प्रशासनिक स्तर पर राहत महसूस की है। इन दोनों अकर्मण्य अधिकारियों के जाने के बाद देवास ने कलेक्टर के रूप में ऋषभ गुप्ता को पाया और एसपी के रूप में सम्पत उपाध्याय को। देवास की जनता कलेक्टर ऋषभ गुप्ता को असुविधाओं के बीच सुविधाजनक ढंग से काम करने की कोशिश करते हुए देख रही है और उम्मीद कर रही है कि जनप्रतिनिधि अपने निहित राजनीतिक स्वार्थों से ऊपर उठकर इस कलेक्टर को सही दिशा में काम करने दे तो यह देवास में प्रशासनिक आदर्श स्थापित कर सकता है। देवास की जनता कलेक्टर को गंभीरता पूर्वक प्रशासनिक कर्तव्य निभाते हुए देख रही हैं, लेकिन अभी एसपी सम्पत उपाध्याय के कर्तव्य एवं व्यवहार से परिचित होना बाकी है। जहां तक कलेक्टर ऋषभ गुप्ता की बात है, वे अपने स्तर पर, अपने अधिनस्थ अधिकारी कर्मचारियों पर लापरवाही के लिए, निष्क्रियता के लिए कार्रवाई कर रहे हैं, दण्डित कर रहे हैं और प्रशासन को जनहितैषी, जनता के प्रति जवाबदेह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। देवास कलेक्टर लापरवाह, निष्क्रिय अधिकारी कर्मचारियों की वेतन वृद्धि रोक रहे हैं, वेतन रोक रहे हैं, वेतन काट रहे हैं, सस्पेंड कर रहे और यही उनके हाथ में है, ताकि कर्मचारियों में अनुशासनात्मक भय स्थापित हो, वे जनता के प्रति जवाबदार बने। कलेक्टर की अपने अधिनस्थों पर की जाने वाली कार्रवाईयां साहसिक है, प्रशंसनीय है, साहसिक इसलिए कि हर दूसरा तीसरा अधिकारी कर्मचारी, नेताओं की चौखट पर लोट लगाने का आदी हैं, ऐसे में कलेक्टर का कार्रवाई करना साहसिक कदम ही कहा जाएगा। प्रायः देखने में यह आया है कि अधिकारी तो नियमानुसार जनहित में काम करना चाहते हैं, लेकिन जनता के चुने हुए प्रतिनिधि ही अपने निहित स्वार्थों के चलते अधिकारियों को काम नहीं करने देते हैं, जनप्रतिनिधि काम करने वाले अधिकारी कर्मचारियों को हाशिए पर और निकम्मे चापलूस अधिकारी कर्मचारियों को मैदान में रखने का दबाव बनाते हैं। देवास कलेक्टर ऋषभ गुप्ता को भी राजनीतिक दबाव एवं प्रभाव का सामना करते हुए अपने कर्तव्य का निर्वहन करना पड़ रहा है, इस बात को जनता समझ रही हैं और इसीलिए कहा जा रहा है कि कलेक्टर ऋषभ गुप्ता असुविधाओं के बीच सुविधाजनक ढंग से काम करने की कोशिश कर रहे हैं। ऋषभ गुप्ता युवा हैं, पहली बार कलेक्टर के रूप में किसी जिले की जिम्मेदारी संभाल रहे है, उनमें काम करने का जुनून एवं जज्बा है, लेकिन स्वार्थी नेताओं से अपेक्षित सहयोग मिलेगा, काम करने की स्वतंत्रता मिलेगी, इसमें संदेह है, बावजूद ऋषभ गुप्ता आम जन का दिल जीतने में कामयाब होते नजर आ रहे हैं, अपनी कार्यशैली से जनता को प्रभावित करते नजर आ रहे हैं। देवास की जनता के मन में कलेक्टर ऋषभ गुप्ता के प्रति एक प्रकार की सहानुभूति है, क्योंकि उन्होंने चंद्रमौली शुक्ला जैसे नेताओं के गुलाम अकर्मण्य कलेक्टर के बाद देवास की जिम्मेदारी संभाली है, इसलिए जनता समझ रही हैं कि चंद्रमौली शुक्ला ऋषभ गुप्ता के लिए प्रशासन के नाम पर कबाड़खाना छोड़कर गए हैं, अभी तो ऋषभ गुप्ता देवास की जनता को चंद्रमौली शुक्ला द्वारा फैलाए गए रायते को सोरते (समेटते) नजर आ रहे हैं, कबाड़ को समेटते नजर आ रहे हैं। किसी भी कलेक्टर के व्यक्तित्व का परिचय जनसुनवाई में उसकी भागीदारी और गंभीरता से मिल जाता है, जनसुनवाई से लोटने वाले आम नागरिक कलेक्टर ऋषभ गुप्ता की प्रशंसा कर रहे हैं। देवास की जनता अपने जनप्रतिनिधियों को जानती है, उन्हें अधिकारी अपनी सेवा में तैनात चाहिए, जनता की भावनाओं एवं परेशानियों से उन्हें कोई लेना-देना नहीं रहा है। चंद्रमौली शुक्ला और शिवदयाल सिंह जनप्रतिनिधियों की सेवा में तैनात रहने वाले अधिकारी थे,इन अधिकारियों ने जनता और जनभावना से कभी कोई लेना-देना नहीं रखा, लेकिन कलेक्टर ऋषभ गुप्ता मतलबपरस्त जनप्रतिनिधियों से समन्वय स्थापित करते हुए, आम जनता को भी संतुष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं, इसीलिए जनता के बीच कहा जा रहा है कि देवास कलेक्टर असुविधाओं के बीच सुविधाजनक ढंग से काम करने की कोशिश कर रहे हैं, यदि जनप्रतिनिधि इन्हें काम करने की स्वतंत्रता दे, स्वविवेक से काम करने दे तो यह अधिकारी देवास में प्रशासनिक आदर्श स्थापित कर सकता है, क्या देवास के जनप्रतिनिधि जनभावना का सम्मान करते हुए इस कलेक्टर को काम करने की स्वतंत्रता देंगे?काम करने का वातावरण देंगे? **************
