✍️पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101
खातेगांव कन्नौद विधानसभा क्षेत्र ब्राह्मण बाहुल्य विधानसभा क्षेत्र है और यहां से ब्राह्मण मतदाताओं को ध्यान में रखकर ही राजनीतिक पार्टियां टिकटों का निर्धारण किया करती हैं। क्षेत्रीय विधायक आशीष शर्मा ब्राह्मण है और ब्राह्मण मतदाताओं की कृपा एवं आशीर्वाद से ही वे दो बार से विधायक चुने जाते रहे हैं, आशीष शर्मा के पिता स्व. गोविंद शर्मा भी ब्राह्मण मतदाताओं की कृपा से विधायक रहे हैं। इस विधानसभा क्षेत्र ने अनेक ब्राह्मण विधायक दिए हैं, नर्मदाप्रसाद किंकर, गोविंद शर्मा, कैलाश कुंडल, आशीष शर्मा आदि। विधानसभा क्षेत्र के ब्राह्मण बंधु, ब्राह्मण विधायक चुनने के लिए जितने गंभीर, तत्पर, आतुर रहे, क्या चुने हुए ब्राह्मण विधायक क्षेत्र के ब्राह्मणों का जीवन स्तर ऊंचा उठाने के लिए, उनके वाजिब हक दिलाने के लिए उतने गंभीर, तत्पर, आतुर रहे? वर्तमान विधायक आशीष शर्मा को ही लो, इन्होंने भोपाल में 4 जून को लगने वाले ब्राह्मण कुंभ में शामिल होने के लिए ब्राह्मणों का आव्हान किया है और क्षेत्र में चलो भोपाल के पोस्टर लगाए हैं, जिसमें अपने फोटो के नीचे कर्म योद्धा की स्वयंभू उपाधि से स्वयं को विभूषित किया है। भोपाल ब्राह्मण महाकुंभ में शामिल होने से पहले क्षेत्र के ब्राह्मण बंधु अपने कर्म योद्धा विधायक से पूछना चाहते हैं कि प्रतिवर्ष ब्राह्मण कुलालंकार कुलाधिपति भगवान परशुराम जयंती पर निकलने वाली शोर्य यात्रा, इस वर्ष क्यों नहीं निकली? दूसरी बात स्थानीय निकाय चुनाव में इस बार कन्नौद नगर परिषद अध्यक्ष पद सामान्य महिला के लिए था, अनारक्षित था तो फिर पिछड़ा वर्ग से आने वाली जाट समाज की महिला, श्रीमती गायत्री जाट भाजपा पार्षदों के समर्थन से निर्विरोध अध्यक्ष कैसे बन गई? जबकि सदन में ब्राह्मण महिला पार्षद भी जनता ने चुनकर भेजी थी, उसे अध्यक्ष वाला सम्मान क्यों नहीं मिला? वैधानिक रूप से अध्यक्ष पद पर उसी का अधिकार था। विधायक आशीष शर्मा ने ब्राह्मण बेटी को उसका हक दिलाने में दिलचस्पी क्यों नहीं दिखाई? क्या मान लिया जाए कि विधायक आशीष शर्मा अपने जाति बंधुओं के प्रति इमानदार नहीं है या फिर कन्नौद नगर परिषद के भाजपा पार्षद, विधायक आशीष शर्मा को ना इंच में समझते हैं ना फीट में? जाति की गरिमा का ध्यान रखते हुए क्षेत्र के ब्राह्मण विधायक से इन सवालों के जवाब सार्वजनिक रूप से नहीं मांगते, लेकिन उनके मन में सवाल तो खड़े होते हैं।
