✍️पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101
सोशल मीडिया पर खातेगांव कन्नौद विधानसभा क्षेत्र इन दिनों चर्चा में है और भाजपा नेताओं द्वारा जनता के बीच भाजपा की कब्र खोदने को लेकर चर्चा में है। जिस पार्टी भाजपा ने इन नेताओं को मान दिया, सम्मान दिया, ये उसी पार्टी के नहीं हो रहे हैं तो ये आम जनता के क्या होंगे? इनसे जनता ने तो उम्मीद छोड़ ही देना चाहिए और लगता है खातेगांव कन्नौद विधानसभा क्षेत्र की जनता भाजपा नेताओं से उम्मीद छोड़ चुकी है। पीछे बहुत सी ऐसी घटनाएं हुई है, जिसमें खातेगांव कन्नौद विधानसभा क्षेत्र की जनता का विश्वास भाजपा को लेकर चकनाचूर हुआ है, क्योंकि जितनी भी घटनाएं हुई, जिससे प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं के नाम जुड़े रहे, उन्होंने भाजपा की छवि को आघात पहुंचाया है, जनता और भाजपा के बीच का विश्वास कमजोर किया है, अफसोस इस बात का कि इसकी रोकथाम के लिए ना तो क्षेत्रीय विधायक आशीष शर्मा ने कुछ किया और ना भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव खंडेलवाल ने कुछ किया। हाल ही में नेमावर मंडल अध्यक्ष अर्जुन पंवार ने क्षेत्र के पत्रकार हर्षित तिवारी को गला काट देने की धमकी दी, पत्रकार की गलती इतनी थी कि उसने पुलिस से मिली जानकारी को जनता के साथ शेयर किया, इस घटना के विरोध में क्षेत्र के अधिकांशतः पत्रकार साथी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) सूर्यकांत जी को ज्ञापन देने गए थे। यहां यह उल्लेख कर देना प्रासंगिक होगा कि ये वही अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक है, जिनको सोशल मीडिया पर चले वीडियो में जनता ने किसी नेता की जन्मदिन पार्टी में गाना गाते हुए देखा है “जान पे भी खेलेंगे तेरे लिए ले लेंगे सबसे दुश्मनी” जो अधिकारी, नेताओं की पार्टी में नेताओं से दोस्ती निभाने के लिए जान पर खेलने की बात करता हो, सबसे दुश्मनी ले लेने की बात करता हो, वह नेता के खिलाफ पत्रकारों की गुहार सुनेगा, संदेह नजर आता है। यदि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कर्तव्य को लेकर कहते कि जान पे भी खेलेंगे, तेरे लिए ले लेंगे सबसे दुश्मनी तो बात समझ में आती। पहले भी क्षेत्र के प्रखर पत्रकार चंचल भारती को जिला बदर करवा दिया गया और इसका आरोप विधायक आशीष शर्मा पर लगा, चंचल भारती विधायक जी की राजनीति को कितना भारी पड़ रहा है, यह विधायक बेहतर जानते होंगे? पत्रकारों से पंगे लेकर राजनीति की बात सोचना भी मूर्खता है। हां पत्तलकारों से पंगे लेकर राजनीति की जा सकती है, पत्रकारों से पंगे लेकर नहीं। मंडल अध्यक्ष ने पत्रकार को धमकी दी और जिला भाजपा अध्यक्ष ने मामला संज्ञान में लेना तक उचित नहीं समझा, क्या भाजपा जिलाध्यक्ष की सरपरस्ती में जिले के पदाधिकारी पत्रकारों को धमका रहे हैं? दूसरा मामला तो सीधा-सीधा भाजपा को कलंकित करने वाला है भाजपा जिला उपाध्यक्ष बलराम थोरी ने जगदीश पिता रामनारायण जाट नामक व्यक्ति को चाकू घोंप दिए, हाथ, हाथ का पोंचा घायल हो गया, पुलिस ने साधारण धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। भाजपा जिला उपाध्यक्ष बलराम थोरी ने जगदीश को जान से मारने की नीयत से चाकू घोंपे थे, लेकिन दिल जैसे नाजूक अंग को बचाने में जगदीश के हाथ जख्मी हुए हैं। नियमानुसार बलराम थोरी पर प्राणघातक हमले की धारा लगना चाहिए थी, क्योंकि उसने जगदीश को जान से मारने के लिए दिल पर वार किया था, लेकिन जगदीश ने दिल की रक्षा करने में हाथ घायल कर लिए। बेशर्मी की पराकाष्ठा यह कि भाजपा जिला उपाध्यक्ष बलराम थोरी कहते हैं जगदीश ने खुद चाकू मार लिए और मुझ पर इल्जाम लगा दिया, यदि ऐसी बात थी तो पुलिस ने प्रकरण क्यों दर्ज किया? आश्चर्य की बात है कि ऐसा व्यक्ति पद पर बना हुआ है और भाजपा चुनाव की तैयारी कर रही है। बलराम थोरी के बारे में बताया जाता है, वे मूल भाजपाई नहीं है, ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में आए हैं और गुंडे-बदमाश की तरह व्यवहार करके जनता के बीच भाजपा की छवि खराब कर रहे हैं। भाषण देता नेता तो जनता के गले उतर जाता है, लेकिन चाकूबाजी करते नेता को जनता गले कैसे उतारे? जहां तक खातेगांव कन्नौद विधानसभा क्षेत्र में तैनात पुलिस अधिकारियों की बात की जाए तो वे सत्तामद में मदमस्त नेताओं के निजी अफसर होकर कर्तव्य से विमुख हो गए हैं, इन्होंने जनता से सरोकार रखना छोड़ दिया है। आरोप लगाया जा रहा है भाजपा जिला उपाध्यक्ष बलराम थोरी के मामले में पुलिस ने मनमर्जी की रिपोर्ट लिखी है और इच्छा के विपरित फरियादी से हस्ताक्षर करा लिए हैं, अर्थात एक तरह से पुलिस ने बलराम को ऐसी हरकत करने से रोका नहीं, अपितु प्रोत्साहित किया है।
