✍️पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101
देवास की जनता ने एसडीएम प्रदीप सोनी को राजनीतिक एवं प्रशासनिक खिलौने के रूप में देखा है, जिसने स्वविवेक से कभी लेना-देना ही नहीं रखा, हमेशा दूसरों के विवेक से चलते रहे, दूसरों का साधन बनते रहे, लोग इनसे खेलते रहे। प्रशासनिक दृष्टि से देखा जाए तो प्रदीप सोनी का भ्रष्टाचार के लिए सिर्फ उपयोग हुआ है, प्रदीप सोनी खुद भ्रष्टाचार के लिए कोई आपराधिक कृत्य करें, यह आज भी मन मानने को तैयार नहीं, खैर लोकायुक्त में प्रकरण दर्ज हुआ है, लांछन तो लगा है, एसडीएम पद से हटाए भी गए हैं, प्रशासनिक गलियारों में बाबू बनाकर बिठा दिए गए हैं, वैसे तो प्रशासन में कोई काम बेकार के नहीं होते, लेकिन रुतबा, झांकी के साथ मलाई खाने के आदतन अधिकारियों के लिए वे सब बेकार के काम होते हैं, ऐसे काम प्रदीप सोनी को दे दिए गए हैं, कुल मिलाकर कहा जाए तो अफसरी अहंकार में हमेशा तने हुए ठूंठ की तरह घूमनेवाले इस अधिकारी को अपमानित करके कोने में बिठा दिया गया हैं और इनकी जगह बागली से नये एसडीएम आ गए हैं, जो मुकाती बाबू से एसडीएम कार्यालय का क ख ग सीख रहे होंगे। प्रदीप सोनी पूर्व कलेक्टर चंद्रमौली शुक्ला के कार्यकाल में महत्वपूर्ण अधिकारी रहे, जो मन में आया वह किया, नेताओं को खुश करने के लिए इस अधिकारी ने संवेदनाओं एवं संविधान से परे जाकर काम करने से भी परहेज नहीं किया। चंद्रमौली शुक्ला एक अयोग्य कलेक्टर थे, इसलिए उन्होंने अयोग्य अधिकारी प्रदीप सोनी को महत्वपूर्ण बना दिया था, लेकिन ऋषव गुप्ता के आने के बाद प्रदीप सोनी का नाम कम सुनाई देने लगा था, अर्थात ऋषव गुप्ता एक योग्य अधिकारी हैं, योग्य कलेक्टर है, जिन्होंने आते ही समझ लिया कि एसडीएम प्रदीप सोनी किसी काम का अधिकारी नहीं है। पूर्व कलेक्टर चंद्रमौली शुक्ला के समय यही प्रदीप सोनी सारा प्रशासन अपने माथे पर लिए-लिए घूमते थे, अपनी बाल सुलभ प्रशासनिक हरकतों से अनेक बार प्रशासन को निंदा एवं हंसी का पात्र बनाया था। मधुर स्वीट्स पर कार्रवाई करने दल बल के साथ गए तो एक साधारण से दुकानदार ने इन्हें दुत्कार कर भगा दिया था और ये कुछ नहीं कर पाए थे, प्रशासन की इस सार्वजनिक दुर्गति पर देवास ने, देवास की जनता ने सारे जनप्रतिनिधियों को भी मौन देखा था। एक घटना में एसडीएम रहते हुए प्रदीप सोनी स्वयं पत्ती बाजार स्थित जुएं के अड्डे पर दबिश देने पहुंच गए थे, इस दबिश का शायद पुलिस रिकार्ड में कोई उल्लेख नहीं होगा, क्योंकि उस समय किसी पत्रकार ने सीएसपी विवेक सिंह से पूछा था तो उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में जवाब दिया था कि जिसने दबिश दी है, वह रिपोर्ट लिखाने तो आए, पुलिस रिपोर्ट भी लिखेगी। उस समय नगर ने जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को बड़ी ही हास्यास्पद स्थिति में देखा था, सारे शहर में संदेश गया था कि जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन में तालमेल का अभाव है। यों प्रायः जुएं सट्टे के अड्डों पर पुलिस दबिश देती फिरती है, मां चामुण्डा की नगरी देवास ने एसडीएम को जुएं के अड्डे पर दबिश देते देखा है और सीएसपी ने शायद अप्रत्यक्ष रूप से घोषणा की थी कि पत्ती बाजार के अड्डे को पुलिसात्मक मान्यता मिली हुई है? कोरोना काल में बावड़िया स्थित श्मशान हटाने वाला काम, प्रदीप सोनी का सबसे राक्षसी और असंवेदनशील काम रहा, ऐसे समय में जब लाशें जलाने को श्मशान कम पड़ रहे थे, तब नेताओं का साधन बनकर इस अधिकारी ने श्मशान हटवाया। उस कृत्य ने देवास की जनता को बता दिया कि प्रदीप सोनी दूसरों की बुद्धि से चलनेवाला अविवेकी अधिकारी हैं, इसमें संवेदनाओं का अभाव है। नेताओं के कहने पर कांग्रेस नेता शिवा चौधरी पर कार्रवाइयां यहां तक तो ठीक था, दशकों से निकलने वाली भगवान केदारेश्वर की सवारी को नहीं निकलने देना, प्रदीप सोनी का बेहद निंदनीय कार्य रहा। सारे देवास की आस्था माता तुलजा भवानी के मंदिर में जूतों से घूमना और अपनी उपस्थिति में भवानी स्वरूपा सम्मानित महिला को महिला पुलिस से लाक डाउन के समय बीच सड़क पर पिटवाना, प्रदीप सोनी के निहायत शर्मनाक कामों में शुमार रहे। प्रदीप सोनी में देवास वासियों ने कभी भी अधिकारी वाली गरिमा नहीं देखी, मैं पीछे अनेक बार प्रदीप सोनी को “बाल सुलभ अहंकार से अलंकृत अधिकारी” लिखता आया हूं। इस अधिकारी में देवास ने अपने पद को लेकर बच्चे जैसा अहंकार देखा है, जो कदम-कदम पर अपने अहंकार के वशीभूत सबको कहने की कोशिश करता है कि हें हें देखो, मैं अफसर बन गया, देवास ने लोकायुक्त में फंसे प्रदीप सोनी को कुछ इसी हाल में देखा है। बाल सुलभ अहंकार से अलंकृत इस अधिकारी के इस हश्र पर किसीको कोई आश्चर्य नहीं हुआ, दूसरों के विवेक से चलने वाले लोगों का यही हश्र होता है। हां इतना जरूर कहा जा सकता है किसी नेता को खुश करने के चक्कर में यह बालबुद्धि अधिकारी लपेटे में आ गया है, वरना भ्रष्टाचार के लिए प्रदीप सोनी केरियर पर दाग लगाए? मन अभी भी नहीं मानता।
