✍️बदनावर जगदीश चौधरी ।
जो कर्मो से अपने धंधो से लगे हों और फिर कभी कभी कथा पांडाल मे आकर बैठ गए, जिस भक्त के कानो मे ये भगवान की कथा के वाक्य शब्द पडेगे तो समझो ये शब्द शब्द ब्रम्हा हो गए और शब्द ब्रम्हा है तो हमारे पास अन्तः करण मे गुजर जाएगा। शब्द को बार बार हमारे ऊपर संचार होगा तो समझो हमारे ऊपर शब्द का लाभ होगा। उक्त उद्वार गुमानपुरा गाँव मे चल रही सवाई भोज महाराज बगडावत भारत श्रीमद् देवनारायण भागवत कथा मे संत श्री गोपाल जी महाराज ने कहे। आपने श्रीमद् देवनारायण भागवत कथा के दूसरे दिन बागा जी गुर्जर का भोलेनाथ के प्रति तपस्या का प्रसंग बताया
भगवान की कथा के दौरान मंदसौर के प्रसिद्ध कथा वाचक संत गोपाल जी महाराज ने बागा जी गुर्जर के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि बागा जी गुर्जर का 12 रानियों से विवाह हुआ। श्री गुर्जर पर भगवान की असीम कृपा से सभी रानियों को 24 बगड़ावतों की प्राप्ति हुई और बागा गुर्जर की भगवान शिव की तपस्या के प्रतिफल स्वरूप यश कीर्ति चारो दिशा मे फैली, धन (माया) प्राप्त की, दिन मे दो गुनी व रात मे चार गुनी का वरदान प्राप्त कर भोलानाथ ने ये धर्म के कार्य के लिए बागा जी गुर्जर को वरदान स्वरूप दिया। यहा कथा में प्रति दिन बडी सख्या मे भक्त गाँव व आसपास क्षेत्र से गुमानपुरा पहुंचकर कथा श्रवण का लाभ ले रहे है। वही शाम चार बजे महाआरती के पश्चात प्रशादी वितरण की गई।
