✍️जगदीश चौधरी बदनावर।
धार जिले में सरदारपुर तहसील के गांव अमझेरा को तहसील में बदलने की कवायद ज्यो ज्यो बढ़ती जा रही है त्यों त्यों टप्पा दसई तथा टप्पा लाबरिया के ग्रामीण लोग इस फरमान पर अपनी नाराजगी जाहिर करते नजर आ रहे है। सूत्रों की माने तो नाराजगी इतनी बढ़ती जा रही है कि उक्त दोनों टप्पा दसई तथा लाबरिया के ग्रामीण शोशल मीडिया पर आगामी विधानसभा के चुनाव तक को बहिष्कार करने की साफ साफ बाते करते नजर आ रहे है। ज्ञात हो कि अमझेरा की भौगोलिक स्थिति धार जिले की सरदारपुर तहसील के अंतिम छोर पर है क्योकि अमझेरा से महज कुछ ही दूरी पर गंधवानी तहसील शुरू हो जाती है और प्रारूप के अनुसार इसमे जुड़ने वाली ग्राम पंचायत सरदारपुर के दूसरे छोर से जोड़ी जा रही है जो टप्पा दसई के अंतर्गत जिससे जो कि इसे तहसील के रूप में निर्धारित करने पर अन्य ग्रामीणों को फजीहत में डालने जैसा है।
अमझेरा घाट एवं वन क्षेत्र होने से बुजुर्गो में बना रहे भय
जैसे जैसे कुछ सरदारपुर तहसील के ग्रामो में अमझेरा के तहसील बनने की खबर और उनके ग्राम को तहसील अमझेरा में मिलाने की बात फैल रही है कुछ ग्रामीणों को भय सा लगने लगा कईं वृद्ध ग्रामीण जो सरदारपुर के एक छोर पर है वे अपने आप को तहसील मुख्यालय सरदारपुर जाने में सुरक्षित महसूस करते है क्योंकि यहाँ पर सुगम आवागमन के साथ साथ किसी भी प्रकार की एवं अवांछनीय घटना होने की कोई संभावना ही नही है जिसके चलते वे वृद्ध किसी भी समय अपने ग्राम से सरदारपुर पहुँच सकते है अमझेरा को तहसील में शामिल होने पर भय के बारे में जानने की कोशिश की गई तो नाम नही छपने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया कि हमें अमझेरा से भय नही है हम रात-बेरात सरदारपुर से तो आ सकते है लेकिन अमझेरा से नही आ पाएंगे क्योकि इसके दो कारण है एक कि अमझेरा हमारे गांव से दूर है और दूसरा यह कि अमझेरा के आसपास काफी मात्रा में वन क्षेत्र है जहाँ हम अपने आप को सुरक्षित नही समझ सकते इस पर और बताते हुए वृद्ध बोले कि जब तहसील न्यायालय बनेगा तब जाहिर सी बात है कि काम के चलते देरी भी होगी और रात में हम जंगल क्षेत्र होने से अपने आप को सुरक्षित नही मानते। वही उक्त वृद्धजन के समूह ने शासन के इस फैसले को जनहित के बारे में सही नही बताते हुए पुनः मंथन करने का आग्रह किया है।
