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उज्जैन, 17सितंबर 25/शासकीय संस्कृत महाविद्यालय, उज्जैन में बुधवार को आन्तरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के अन्तर्गत भारतीय ज्ञान-परम्परा प्रकोष्ठ, स्मृतिविज्ञान अवन्तिका शोधसमिति (रजि.) उज्जैन तथा पूर्वछात्रपरिषद् के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक – 12 से 16 सितम्बर 2025 तक कुण्डमण्डपसिद्धि ग्रन्थ पर केन्द्रित पाँच दिवसीय कार्यशाला का समापन समारोह आयोजित किया गया । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद् सदस्य, गौरव धाकड़ थे। उन्होंने उपस्थित अध्येताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि शास्त्रीय विषयों के बारे चलाये जा रहे मिथ्या प्रवादों का खण्डन करना और भारतीय ज्ञान-परम्परा का मंडन करना, आज हम सभी का परम दायित्व है। साथ ही उन्होंने वैदिक विधियों की वैज्ञानिकता को भी विश्व भर में पहुंचाने की बात कही। कार्यक्रम के सारस्वत अतिथि ओमप्रकाश शर्मा ‘उमेशगुरुजी’ ने अपने उद्बोधन में कहा कि वैदिक विधि से किये गये अनुष्ठान निश्चित ही सफलता को प्रदान करते हैं। वैश्विकस्तर पर हो रहे शोधकार्य इस बात प्रमाणित कर रहे हैं। मुख्य वक्ता एवं कार्यशाला के विषयविशेषज्ञ डॉ. गोपालकृष्ण शुक्ल ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज हमें भारतीय ज्ञान-परम्परा के याज्ञिक-पक्ष को समझने और उसे जनसामान्य में व्यवस्थित रूप से पहुँचाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. सीमा शर्मा ने कहा कि हमें अपनी ज्ञान-परम्परा पर गौरव की अनुभूति होनी चाहिये । यज्ञशाला की सम्पूर्ण संरचना प्राचीन भारत के उन्नत गणितीय और ज्यामितीय ज्ञान का उत्कृष्ट उदाहरण है । कार्यशाला समन्वयक डॉ. श्रेयस कोरान्ने ने बताया कि कुण्डमण्डपसिद्धि याज्ञिक-परम्परा का श्रेष्ठ ग्रन्थ है। जिसका लेखन आचार्य विठ्ठल दीक्षित द्वारा सत्रहवीं शताब्दी में किया गया था। कार्यशाला के मुख्य विषय-विशेषज्ञ संस्कृत, ज्योतिर्विज्ञान एवं वेद अध्ययनशाला, सम्राट् विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के आचार्य डॉ. गोपालकृष्ण शुक्ल ने विभिन्न तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों को उक्त ग्रन्थ का अध्ययन कराया । साथ ही उन्होंने प्रतिभागियों को यज्ञमण्डप और कुण्डों की निर्माण विधि के प्रायोगिक-पक्ष से भी अवगत कराया। कार्यशाला के संयोजक यश शर्मा ने आयोजन के सम्बन्ध मे जानकारी देते हुए बताया कि राज्यस्तरीय इस कार्यशाला में 200 से अधिक प्रतिभागी जुड़े। विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधार्थी भी कार्यशाला में सम्मिलित हुए। साथ ही भोपाल, पन्ना, इंदौर, शाजापुर और स्थानीय प्राध्यापकों ने भी विभिन्न व्याख्या सत्रों में अपने व्याख्यान प्रस्तुत किये। कार्यशाला में कुल पाँच तकनीकी सत्र और दो व्याख्या सत्रों का आयोजन हुआ। समापन सत्र का संचालन डॉ. गणेश प्रसाद द्विवेदी ने किया और आभार सुरितराम ध्रुव ने माना । इस अवसर पर महाविद्यालय के डॉ. सदानन्द त्रिपाठी, डॉ. ममता मलिक, डॉ. भवानीशंकर भारती, डॉ. महिमा शास्त्री, डॉ. जयकुमार, डॉ. कंचन तिलवानी, श्री रामप्रसाद पंवार, श्री रमाशंकर कोल, श्रीमती नीता पंड्या, श्री शैलेश दुबे आदि स्टाफ सदस्य और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
