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Saturday, April 18, 2026
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मुख्यमंत्री शिवराज जी ये तो वही बात हुई, चोर से कहो चोरी करो साहूकार से कहो लठ्ठ तैयार रखना, यार अधिकारियों की भी विवशता समझो

✍️पं. प्रदीप मोदी(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का सम्मान रखने को दारू पीने के अहाते बंद किए तो लोग ढाबे-होटलों में पीने लगे, अब मुख्यमंत्री पुलिस से कहते हैं अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई करो और पुलिस बेचारी जनता के सामने हास्यास्पद स्थिति में खड़ी है, आबकारी विभाग हास्यास्पद स्थिति में खड़ा है। पत्रकार बंधु चीख पुकार मचा रहे हैं कि मुख्यमंत्री द्वारा सार्वजनिक मंच से सख्ती बरतने की बात कही जाने के बाद भी पुलिस विभाग और आबकारी विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा, अब सरकारी ओहदों पर बैठे अधिकारी जनता को कैसे समझाए कि मुख्यमंत्री का इस प्रकार भाषण देना जनता को बरगलाना है, वे कार्रवाई करने जाएंगे तो उन्हीं की पार्टी के नेता अधिकारियों को कायरे कायरे (गुस्से में) देखने लगेंगे। पहले भी मुख्यमंत्री शिवराज जी माफियाओं को दो फीट या दस फीट जमीन में गाड़ने की बात कह चुके हैं, क्या कोई भी माफिया जमीन में गाड़ा गया? इसलिए अवैध दारू, ढाबे होटल पर दारू पीने के खिलाफ सख्ती की बात को गंभीरता से लेना बेचारे अधिकारियों को धर्मसंकट में डालना है। देवास में भाजपा के नेताओं को कभी इन धंधों के खिलाफ आवाज उठाते किसी ने देखा या सुना? फिर मुख्यमंत्री द्वारा कही गई सख्ती की बात पर हो-हल्ला मचाना बेमानी है। यहां सीमेंट की कट्टी में रखकर तो खुलेआम गांजे की पुड़िया बेची जाती हैं, खुलेआम सट्टा लिखा जाता है, जुआ खिलाया जाता है, अवैध नशीले पदार्थ बेचे जाते हैं, जब जनता को सब दिखता है तो क्या अधिकारियों को नहीं दिखता होगा? दिखता होगा, लेकिन बेचारों की विवशता है। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने दारू की दुकानें बंद कराने के लिए शराब की दुकानों में पत्थर फेंकने जैसे पागलपन किए,उमा भारती पूर्व मुख्यमंत्री है, उन्हें शांत करने को कुछ तो करना था, सो दारू की दुकानें तो नहीं, दारू पीने के अहाते बंद करा दिए। अब दारू पीने वाले कहीं तो बैठकर पियेंगे, यदि ये लोग ढाबे-होटलों में नहीं पियेंगे तो क्या सार्वजनिक स्थानों पर बैठकर पियेंगे? घर में बैठकर पियेंगे तो मुख्यमंत्री के ये दारूकुट्टे जीयाजी घर में मुख्यमंत्री की लाड़ली बहनों को तलेंगे। मुख्यमंत्री शिवराज इस समय चुनावी मोड पर है, उन्हें बोलना है, लोक लुभावन बोलना है, लेकिन सत्तारूढ़ पार्टी के स्थानीय नेताओं के साथ समन्वय तो अधिकारियों को स्थापित करके चलना है, अवैध धंधे, गतिविधियों के मौन समर्थक, संरक्षक स्थानीय नेता क्या ऐसा चाहते हैं तो हम अधिकारियों से किसी प्रकार की कोई उम्मीद करें? मुख्यमंत्री द्वारा बोली गई बात पर विश्वास करें? सत्तारूढ़ पार्टी के नेता चाहते हैं तो ये सब धंधे चलते हैं, पार्टी के नेता नहीं चाहे तो इन अधिकारियों की क्या मजाल? मुख्यमंत्री तो इस समय पूरी तरह चुनावी रंग में है, उन्हें तो बोलना है और वे कुछ तो भी बोलेंगे, सोनकच्छ में आए मुख्यमंत्री को लोगों ने अवैध दारू, अहाते के अभाव में ढाबों होटलों में पी जाने वाली शराब की बात बताई, मुख्यमंत्री चुनावी रंग में थे, मंच से कह गए पुलिस अधिकारी अवैध शराब के खिलाफ कदम उठाए। अवैध गतिविधियों के खिलाफ अधिकारियों को कदम उठाना होते, वे उठा सकते तो शिकायत का मौका ही क्यों देते? मुख्यमंत्री के वक्तव्य को आधार बनाकर अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करने वाले पत्रकार बंधु अधिकारियों की विवशता को भी समझे। स्थानीय भाजपा नेताओं से सवाल किए जाने चाहिए कि आम जनता को दिखाई दे रही हैं नगर में चलती हुई अवैध गतिविधियां, उन्हें क्यों नहीं दिखाई दे रही है? अधिकारियों को अपनी उंगली के इशारे पर नचाने वाले सत्तारूढ़ पार्टी के नेता नगर में चलने वाली अवैध गतिविधियों के लिए अधिकारियों को क्यों नहीं डपटते? इसका तो यही अर्थ निकलता है कि तमाम गतिविधियां नेताओं के संरक्षण में चल रही है और मुख्यमंत्री बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं। पत्रकार बंधु भी नेताओं से जवाब मांगने की बजाय अधिकारियों पर रीस (गुस्सा) उतारकर मन हल्का कर रहे हैं। सोनकच्छ में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अवैध शराब के मामले में जो भी कहा, वह उस कहावत को चरितार्थ करता है कि चोर से कहो चोरी करो और साहूकार से कहो लठ्ठ तैयार रखना।

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