पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101

आदिवासी बहुल धार जिले की कुक्षी तहसील में निसरपुर विकास खण्ड अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत लोहारी को तत्कालीन सरपंच और वर्तमान सचिव ने मिलकर भ्रष्टाचार का अखाड़ा बना दिया, लूटपाट का अड्डा बना दिया, कईं-कईं बार बिना काम किए, पंचायत ने बिलों का भुगतान कर दिया, जनधन के साथ किए गए इस अपराध में जनपद सीईओ माधवाचार्य संरक्षक की भूमिका में नजर आते हैं, बेशर्मी की पराकाष्ठा यह कि आज भी सीईओ घपले करने वाले लोगों को बचाते हुए नजर आते हैं, सीएम हेल्पलाइन लाईन पर झूठी जानकारी देकर मुख्यमंत्री का मुंह चिढ़ाने का दुस्साहस करते नजर आते हैं। पीछे जाकर देखें तो स्ट्रीट लाइट लगी नहीं और पैसे निकाल कर खा गए, कूट रचित दस्तावेज बनाए,भलते फोटो लगाए, इसी तरह गांव में नाली बनी नहीं, पैसा निकाल कर खा गए, सामुदायिक कचरा पेटी बनी नहीं पैसा निकाल कर खा गए, पंचायत सचिव मंसाराम पाटीदार ने लोहारी ग्राम पंचायत को भ्रष्टाचार की मुन्नी बनाकर बदनाम कर दिया और जनपद सीईओ माधवाचार्य इस भ्रष्ट पंचायत सचिव का उत्साहवर्धन करते रहे। आज भी सीईओ माधवाचार्य की भावना भ्रष्टों को सजा देने की नहीं, अपितु बचाने की है, जिससे प्रतीत होता है कि जनपद सीईओ माधवाचार्य ग्राम पंचायत लोहारी में हुए भ्रष्टाचार में बराबर के भागीदार है? पुराने सरपंच अनपढ़ गंवार थे, जिनका भ्रष्ट सचिव मंसाराम पाटीदार के माध्यम से लोग उपयोग कर लेते थे, लेकिन अब ग्राम पंचायत लोहारी के सरपंच अमरसिंह वास्केल है, जो शिक्षा अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त होकर सरपंच बने हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि मैं अपने कार्यकाल की देनदारियों के लिए जिम्मेदार रहूंगा और मेरे कार्यकाल में सबकुछ नियम से होगा, एक एक पैसे का हिसाब रखा जाएगा। ऐसे पढ़े-लिखे सरपंच के साथ काम करने में भ्रष्ट पंचायत सचिव मंसाराम पाटीदार असुविधा महसूस कर रहा है। गांव में एक किस्सा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, हुआ यूं कि विकास यात्रा के दौरान भाजपा नेताओं ने पंचायत सचिव मंसाराम से पन्द्रह हजार रुपए चंदा मांगा, मंसाराम ने यह कहकर मना कर दिया कि नया सरपंच पढ़ा लिखा है, एक एक पैसे का हिसाब मांगता है, मैं चंदा नहीं दे पाऊंगा। नये सरपंच अमरसिंह वास्केल का ध्येय सिर्फ गांव का विकास है और गांव वाले अपने सरपंच के कामकाजों से संतुष्ट हैं। वर्तमान सरपंच वास्केल गांव के विकास के लिए, गांव के लोगों की सुविधा के लिए कितने गंभीर है, इससे पता चलता है कि पूर्व सरपंच के कार्यकाल में बिना स्ट्रीट लाइट लगाए पैसा निकाल कर खा गए, लेकिन वर्तमान सरपंच ने गांव में लाइट की व्यवस्था की, इसी तरह नाली बनी नहीं और पैसा निकाल कर खा गए, लेकिन अब गांव में पानी की निकासी के लिए वर्तमान सरपंच नाली बनवा रहे हैं। नये सरपंच के आने के बाद ग्राम पंचायत लोहारी के तौर तरीके बदले हुए नजर आ रहे हैं, लेकिन अतीत में इस पंचायत में इतना काला धोला हो चुका है कि ग्राम पंचायत लोहारी को भ्रष्टाचार का अखाड़ा कहा जाने लगा और इसके लिए जिम्मेदार है जनपद सीईओ माधवाचार्य, क्योंकि ग्राम पंचायत लोहारी में जितने भी भ्रष्टाचार हुए,वे सब जनपद सीईओ माधवाचार्य के संरक्षण में हुए हैं।
