पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ 9009597101

आम आदमियों के बीच कहा जा रहा है कि देवास में पदस्थ जिला परिवहन अधिकारी, इन दिनों फावड़े से रुपया बटोरने में लगी है, ये सबला बनकर कर्तव्य का निर्वाह नहीं कर पा रही हैं, अपितु अनियमितता भ्रष्टाचार को प्रश्रय देते हुए अबला बनकर सहानुभूति बटोरने की जुगत में लगी रहती हैं। अधिकारी की ऊपरी अनैतिक आमदनी के चर्चे जब जनता के बीच होने लगे तो अनुमान लगाया जा सकता हैं कि अधिकारी ने कर्तव्य को हाशिए पर रखकर, उगाही करवाने पर ध्यान केंद्रित कर दिया है। देवास की परिवहन अधिकारी को इनके विभाग में फैली अनियमितता, भ्रष्टाचार के कारण जनता के बीच चर्चा मिलने लगी है और यह चर्चा नकारात्मक है, जिस पद पर ये महिला अधिकारी बैठी है, उस पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली हैं। सारा मीडिया परिवहन विभाग में फैली अनियमितता और भ्रष्टाचार के रोने रो रहा है, लेकिन किसी जिम्मेदार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही हैं। आश्चर्य तो देवास के जनप्रतिनिधियों पर होता है,


जो इन अनियमितता, भ्रष्टाचार पर मौन साधकर सरकारों को शर्मिंदा कर रहे हैं। आरटीओ कार्यालय में खुलेआम रिश्वत मांगी जा रही है और यहां महिला जिलाधिकारी जया वसावा पदस्थ हैं। यदि कार्यालय में रिश्वत मांगे जाने के आरोप लग रहे हैं तो या तो अधिकारी आइड साईड लोगों के कंधों पर बंदूक रखकर ऊपरी कमाई करने में लगी है या फिर उनसे विभाग संभल नहीं रहा है, वे अयोग्य साबित हो रही है, असक्षम साबित हो रही है, अकर्मण्य साबित हो रही हैं? मैडम जी एक बार अपना स्थानांतरण रुकवा चुकी है, शायद देवास में कर्तव्य के साथ उनके स्वार्थ संलग्न हो गए है, इसलिए वे देवास छोड़ना नहीं चाहती। आरटीओ कार्यालय में बेशर्मी के साथ पैसे मांगते दलाल (एजेंट) प्रमाण है कि परिवहन अधिकारी क्यों देवास नहीं छोड़ना चाहती? अभी एक युवक अपने वाहन के फिटनेस के लिए आरटीओ कार्यालय के चक्कर लगाता रहा, उसके साथ और भी लोग छोटे-मोटे कामों के लिए चक्कर लगाते रहे,

इन लोगों को चक्कर देने का एक ही मकसद कि ये परेशान होकर पैसे दे और काम कराए, जो आरटीओ कार्यालय की परिपाटी बन चुका है, परंपरा बन चुका है। बिना पैसे दिए आरटीओ कार्यालय में काम कराना, मैडम जी के कार्यकाल में संभव नहीं हो पा रहा है और यही बात शिकायतकर्ता ने मीडिया के सामने कहने की कोशिश की है, शिकायतकर्ता मीडिया के सामने स्पष्ट कह रहा है कि एजेंट सुभाष जैन फिटनेस प्रमाण पत्र देने अथवा दिलाने के एक हजार रुपए मांग रहा है। शिकायतकर्ता परेशान होकर कलेक्टर की जनसुनवाई में गया, वहां कलेक्टर तो नहीं मिले, देवास प्रशासन के सबसे विवादास्पद और उटपटांग अधिकारी एसडीएम प्रदीप सोनी से सामना हुआ, जिन्होंने अपनी अयोग्यता का परिचय देते हुए शिकायतकर्ता को पुनः आरटीओ से ही मिलने का मशविरा दे दिया, क्या एसडीएम में योग्यता का एकदम अभाव है, शिकायतकर्ता आरटीओ की शिकायत लेकर आया है, उसे वापस आरटीओ के पास भेजना कौन सी समझदारी है? कहा जा सकता है प्रदीप सोनी जैसे अधिकारी के वेतनादि पर खर्च किया जाने वाला जनता का पैसा, अपव्यय हैं। शिकायतकर्ता आरटीओ कार्यालय गया तो अपने लिए था, लेकिन अन्य लोगों को परेशान देखकर उसके अंदर का नागरिक जाग गया और वह आरटीओ कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने लगा। बताया जा रहा है आरटीओ कार्यालय के भ्रष्टाचार की फाइलें बरसों से एसडीएम कार्यालय में भी अटकी पड़ी है, क्या मान लिया जाए आरटीओ कार्यालय के भ्रष्टाचार को एसडीएम कार्यालय से प्रश्रय मिल रहा है? क्या इसीलिए एसडीएम शिकायतकर्ता को कलेक्टर तक ना जाने देते हुए, पुनः आरटीओ के पास भेजने की कोशिश करते दिखाई दिए? आरटीओ कार्यालय में एक एजेंट सुभाष जैन के बड़े चर्चे हैं, जो खुलेआम पैसे की मांग करता है? कौन हैं ये सुभाष जैन जिसका उल्लेख शिकायतकर्ता कर रहा है?
यह किसकी शह पर काम कराने के पैसे मांग रहा है? कार्यालय के अंदर खुलेआम पैसे मांगे जाए और अधिकारी की जानकारी में ना हो, ऐसा संभव ही नहीं, इसलिए सवाल खड़ा होता है कि आरटीओ कार्यालय में ये सुभाष जैन है कौन? जो कुछ ना होते हुए भी बहुत कुछ बना हुआ है और निर्भीकता के साथ पैसे मांग रहा है? देवास का परिवहन विभाग जनता के बीच चर्चा में बना हुआ है भ्रष्टाचार के लिए, अनियमितताओं के लिए, अधिकारी की अकर्मण्यता के लिए और परिवहन अधिकारी को कोई फर्क ही नहीं पड़ता। ***************
