✍️पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101
देवास के सयाजी द्वार इन्दिरा गांधी प्रतिमा चौराहा स्थित खनूजा पैट्रोल पंप और उज्जैन रोड चौराहा एसपी आफिस से लगा हुआ पेट्रोल पंप, देवास के पुराने पेट्रोल पंप है, जो कभी शहर के बाहर स्थित हुआ करते थे, लेकिन अब ये शहर के बीचोबीच है। पहले देवास चार दरवाजों के अंदर सिमटा हुआ था,एबी रोड शहर के बाहर से निकला करता था,एबी रोड के पार रेलवे स्टेशन रोड पर मात्र एक कर्मचारी कालोनी हुआ करती थी, जो देवास की पाश कालोनी में शुमार होती थी। यह सारा रहवासी क्षेत्र बैंक नोट मुद्रणालय की स्थापना के बाद विकसित हुआ है, कहने का तात्पर्य कस्बा कहे जाने वाले देवास में उज्जैन रोड चौराहे का पेट्रोल पंप एवं इन्दिरा गांधी प्रतिमा चौराहा पर स्थित खनूजा पैट्रोल पंप शहर के बाहर हुआ करते थे, लेकिन तेजी से विकसित होते देवास में दोनों पेट्रोल पंप आज शहर के बीचोबीच आ गए हैं। ये पेट्रोल पंप शहर के मध्य है और लापरवाही पूर्वक संचालित हो रहे हैं, सुरक्षा के मापदंडों का कहीं कोई पालन नहीं किया जा रहा है तथा संबंधित जिला खाद्य अधिकारी का इस ओर कोई ध्यान नहीं,हर बात के लिए कलेक्टर के आगे रोने रोए, अच्छी बात नहीं। विभागीय अधिकारियों की निष्क्रियता एवं निकम्मापन कलेक्टर के काम के बोझ को और बढ़ा जाता है। जिम्मेदार अधिकारी होने के नाते जन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खाद्य अधिकारी ने इन दोनों पेट्रोल पंपों पर विशेष ध्यान देना चाहिए, यहां की लापरवाहियों का संज्ञान लेना चाहिए,यहां सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित किया जाना चाहिए, यहां के कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर पेट्रोल पंप मालिक को हिदायत देना चाहिए, लेकिन अफसोस की बात है कि अधिकांशतः जनता जानती ही नहीं कि देवास में खाद्य अधिकारी कौन हैं? अधिकारी कार्यालय की कुर्सी छोड़कर मैदान में आए, अनियमितता, अव्यवस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई करें तो जनता को पता चले कि किस विभाग में कौन अधिकारी है और वह जनता के लिए क्या कर रहा है? यदि खाद्य अधिकारी की सक्रियता जनता को नजर नहीं आ रही तो यही कहा जाएगा कि देवास में पदस्थ खाद्य अधिकारी निबंधात्मक है, प्रयोगात्मक नहीं, प्रयोग धर्मी अधिकारी ही जनता के बीच लोकप्रिय हुआ करते है। उज्जैन रोड चौराहा स्थित पेट्रोल पंप तो पुलिस अधीक्षक कार्यालय से लगा हुआ है, अर्थात जिस पुलिस कप्तान के जिम्मे सारे जिले की सुरक्षा है, उनका ही कार्यालय सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। खनूजा पैट्रोल पंप की अव्यवस्था और लापरवाहियां तो खतरे के निशान से ऊपर चल रही हैं, यहां के कर्मचारियों का व्यवहार भी शालीन नहीं है, इस पेट्रोल पंप के मालिक भी उपभोक्ता को संतुष्ट करने की बजाय कर्मचारियों का पक्ष लेने के पक्षधर नजर आते हैं। सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं, खनूजा पैट्रोल पंप पर यात्रियों से भरी बसों में डीजल डालते हुए सामान्य रूप से देखा जा सकता है,रात को खनूजा पैट्रोल पंप बस अड्डा बन जाता है, खनूजा पैट्रोल पंप पर रात में खड़ी बसों में बस पर काम करने वाले ड्रायवर कन्डेक्टर को सोते हुए भी देखा जा सकता है। विचार किया जा सकता है, क्या रात बस में गुजारने वाले कर्मचारी सकने बैठते होंगे? क्या ये शराबखोरी के साथ बीड़ी सिगरेट नहीं पीते होंगे? यदि किसी दिन कोई हादसा हो गया तो? नहीं भुला जाना चाहिए कि खनूजा पैट्रोल पंप के पीछे लगा हुआ जीवन बीमा निगम का आफिस है, सामने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया है, इधर आओ तो सलूजा हास्पिटल है, खनूजा पैट्रोल पंप के साइड में पाकीजा माल है,उसी से लगा राजोले मार्केट है और सामने हमेशा चौबीसों घण्टे गतिमान रहने वाला एबी रोड है। उल्लेखनीय है अभी कुछ महीने पहले खनूजा पैट्रोल पंप जीवन बीमा निगम के अधिकारियों की शिकायत पर कुछ दिनों बंद रहा है, बताया जाता है खनूजा पैट्रोल पंप के टैंक लीकेज थे, जो जीवन बीमा निगम कार्यालय स्थित नलकूप के जल को दूषित कर रहे थे। देवास के पुराने जमाने के ये पेट्रोल पंप अपने ही अंदाज में संचालित हो रहे हैं और बड़ी दुर्घटना का संशय बने हुए हैं। इस पेट्रोल पंप की अनियमितता अव्यवस्था ने यदि हादसे को जन्म दिया तो इसके लिए सिर्फ और सिर्फ प्रशासनिक निष्क्रियता ही जिम्मेदार होगी।
