पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101

विधानसभा चुनाव कदमताल करता हुआ निकट आता जा रहा है और नेता अपनी अपनी जमावट में लग से गए हैं, चुनाव लड़ने के इच्छुक नेता येन-केन-प्रकारेण जनमानस को लुभाने के लिए लचीले हो गए हैं, जनता को गुलाम, कीट-पतंगे की श्रेणी में देखते देखे गए, वे नेता भी विनम्र अपील की मुद्रा में नजर आने लगे हैं, कुल मिलाकर कहा जाए तो चुनाव की तेज कदमताल को नेताओं ने महसूस कर लिया है। कोई भगवन को अमीर बनाकर, खुद फकीरी का प्रदर्शन कर रहा है और कोई भोजन, भजन, भंडारें की आड़ में अपनी चुनावी इच्छा को छुपाने का असफल प्रयास कर रहा है। जनता सब जानती है और नेताओं की स्थिति अंधों जैसी है, अंधा जो भी करता है, उसे जमाना देखता है, लेकिन अंधा समझता है, उसे कोई नहीं देख रहा है। नेताओं की उठक-बैठक, उठा-पटक जनता देखती आई है, देख रही है और नेता समझ रहे हैं कि जनता बेवकूफ है, नासमझ है, जबकि जनता सब जानती है और वह समय, काल, परिस्थिति के अनुसार निर्णय लेना जानती है, बस जनता की याददाश्त थोड़ी कमजोर है, जो नेताओं के पुराने स्वार्थ आधारित कुकर्मों को भूल जाती हैं और चुनाव को ध्यान में रखकर की जाने वाली मीठी-मीठी बातों में फंस जाती हैं। खैर! यह जनता का भोलापन है और इसी का रोना है, जनता के इसी भोलेपन का लाभ उठाकर नेता राजनीति को धंधा बनाते चले जा रहे हैं। कोरोना काल के बाद यह पहला चुनाव है और कोरोना काल के जनहानि से अलंकृत जनता के कड़वे अनुभव शायद चुनाव में इस बार विचारणीय भूमिका निभाए, क्योंकि कोरोना काल में नेताओं की भूमिका बेहद नकारात्मक रही थी, उन्होंने जनता को अपने हाल पर छोड़ दिया था, नेता जनता के बीच से गायब हो गए थे,
वह पीड़ा शायद जनता को विचार पूर्वक विधायक चुनने को बाध्य करें? जनता दरबार में अनुमान लगाए जाते हैं, नेताओं की हरकतों के, बयानों के, क्षेत्र में उनकी चहलकदमी के अर्थ निकाले जाते हैं और तर्क-वितर्क के साथ बताया दिया जाता है कि नेता जी की बाडी लैंग्वेज क्या कहना चाहती हैं? इन दिनों देवास जिले की खातेगांव-कन्नौद विधानसभा सीट और बागली विधानसभा सीट राजनीतिक गतिविधियों की वजह से काफी चर्चा में हैं। खातेगांव-कन्नौद विधानसभा क्षेत्र से आशीष शर्मा विधायक हैं और बागली विधानसभा क्षेत्र से पहाड़ सिंह कन्नौजे विधायक हैं। जब से भाजपा के अंदरखाने से जनश्रुति चली है, निकली है कि 45 विधायकों के टिकट काटे जाएंगे तो चुगलखोर छुटभैयों ने कानाफूसी करना प्रारंभ कर दिया कि बागली और खातेगांव-कन्नौद विधानसभा क्षेत्र के विधायक भाजपा की कमजोर कड़ी है, क्योंकि खातेगांव-कन्नौद विधानसभा क्षेत्र में एक आदिवासी परिवार को मारकर जमीन में गाड़ दिया गया और डेढ़ पौने दो महीने तक इस सभ्य समाज की सुरक्षा करने वाली पुलिस को पता ही नहीं चला, इसी सभ्य समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले जनप्रतिनिधियों को अपनी जन जिम्मेदारी का अहसास ही नहीं हुआ। इस मामले की देशभर में चर्चा हुई है, इस विभत्स हत्याकांड को देशभर में नेमावर हत्याकांड के नाम से जाना गया है। इस पूरे मामले में क्षेत्रीय विधायक आशीष शर्मा की स्थिति उद्वेलित आदिवासी समाज को ढांढस बंधाने वाली नहीं रही हैं, कहा जा सकता है न्याय की गुहार लगाते आदिवासी समाज के प्रति विधायक आशीष शर्मा की उदासीनता, आदिवासी समाज को भाजपा से दूर करने वाली साबित हुई है, ऐसे कई उदाहरण है, जो जनता के बीच चलायमान हुए हैं और विधायक आशीष शर्मा को अलोकप्रिय बना गए हैं, इसलिए भी खातेगांव-कन्नौद विधायक आशीष शर्मा का टिकट कटा हुआ मानकर चल रहे हैं छुटभैये।
उस पर विनोद तापड़िया के सहारे क्षेत्र में पूर्व मंत्री दीपक जोशी की चहलकदमी ऐसी बातों को बल देती नजर आ रही है। उधर बागली विधानसभा क्षेत्र राजनीति के संत पूर्व मुख्यमंत्री स्व. श्री कैलाश जोशी की राजनीतिक तपोभूमि रही है, जो यहां से दशकों विधायक रहे। इस क्षेत्र के वर्तमान विधायक पहाड़ सिंह कन्नौजे ने उन्हीं कैलाश जोशी के बेटे दीपक जोशी के खिलाफ हाय-हाय के नारे लगाकर सारे क्षेत्र की जनभावना को आहत करने की मूर्खता की है। विधायक कन्नौजे क्यों भूल गए कि दीपक जोशी ने राजनीति का क ख ग बागली के ही आंगन में बैठकर सीखा है, वह भी अपने संत पिता के मार्गदर्शन में। दीपक जोशी ही क्यों, सारे जोशी परिवार का बागली से राजनीतिक नहीं, भावनात्मक रिश्ता है। बागली में प्रधानमंत्री आवास योजना में बेरहमी के साथ भ्रष्टाचार हुआ, जिले के तमाम भाजपा नेता मौन रहे, लेकिन दीपक जोशी ने आवाज उठाई, शायद इससे आहत होकर विधायक कैलाश जोशी के बेटे दीपक जोशी के खिलाफ हाय-हाय के नारे लगाने की मूर्खता कर बैठे? ऐसा करके विधायक ने अपनी भ्रष्टाचार संरक्षक की छवि बना ली है। इन सब बातों को ध्यान में रखकर यहां से भी छुटभैये, विधायक पहाड़ सिंह कन्नौजे का टिकट कटा हुआ मानकर चल रहे हैं। बागली में भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख जगाकर दीपक जोशी खातेगांव-कन्नौद क्षेत्र के सामाजिक सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं तो कहने वाले कह रहे हैं कि दीपक जोशी बागली में दबाव बनाकर खातेगांव-कन्नौद का टिकट कबाड़ना चाहते हैं? इधर एक बात और निकलकर आ रही है कि दीपक जोशी की आड़ लेकर विनोद तापड़िया अपनी जमीन तैयार कर रहे हैं, वैसे तापड़िया की धारा विधायक आशीष शर्मा की धारा से मेल खाती कभी नहीं देखी गई है और दीपक जोशी से तापड़िया की निकटता का यह मोटा कारण है। विनोद तापड़िया का साथ, खातेगांव-कन्नौद विधानसभा क्षेत्र में बाहरी कहला रहे दीपक जोशी के लिए वरदान साबित हुआ है। विधायक से ऐसे बहुत से नाराज लोग हैं, जो समय आने पर मुखर हो जाएंगे, सामने आ जाएंगे, ऐसा मानना है चुगलखोर छुटभैयों का। विनोद तापड़िया को अच्छा व्यक्ति बताया जा रहा है, जो धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं और हमेशा आयोजनों में रत रहते हैं, इन्हीं आयोजनों से तापड़िया का राजनीतिक हस्तियों से मेल-मिलाप होता रहता हैं और राजनीतिक दृष्टि से उनका कद बढ़ता रहता हैं।
इन दिनों दीपक जोशी और विनोद तापड़िया की राजनीतिक जुगलबंदी, खातेगांव कन्नौद विधानसभा क्षेत्र में चर्चित हो रही हैं, दोनों एक दूसरे से लाभान्वित होने का भाव रखते हैं और यह जनता को समझ में आ रहा है, उधर इन दोनों की सक्रियता से विधायक आशीष शर्मा की पेशानी पर बल भी जनता देख रही है। क्षेत्रीय जनता का मानना है तापड़िया विधायक बनने की लालसा तो रखते हैं, लेकिन बयां नहीं कर पा रहे हैं।
*************
