पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ 9009597101

जैसे-जैसे चुनाव निकट आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे हाटपीपल्या विधायक मनोज चौधरी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं, जनता के बीच, भाजपा संगठन के बीच और सहज, सरल,सह्रदय ग्रामीणों के बीच विधायक मनोज चौधरी की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में खड़ी होती जा रही हैं। हाटपीपल्या विधायक मनोज चौधरी की राजनीति को मापने जाओ तो वह ज्योतिरादित्य सिंधिया से शुरू होती हैं और ज्योतिरादित्य सिंधिया पर ही जाकर समाप्त हो जाती हैं, अर्थात विधायक मनोज चौधरी का पृथक से अपना कोई अस्तित्व नहीं है,जन भाषा में कहा जाए तो मनोज चौधरी सिर्फ ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिछलग्गू है। उल्लेखनीय है मनोज चौधरी पिछला चुनाव कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में भाजपा के पूर्व मंत्री दीपक जोशी के खिलाफ लड़े थे और जीते थे, बाद में ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आ गए थे, उन समर्थक विधायकों में से एक मनोज चौधरी भी थे। उप चुनाव में मनोज चौधरी की जीत को राजा-महाराजाओं ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था और भाजपा को भी सत्ता का लालच था, इसलिए मनोज चौधरी को उप चुनाव जीतने में बिल्कुल मेहनत नहीं करना पड़ी थी तथा कांग्रेस उम्मीदवार के मंच पर भी साथ बैठकर जड़ खोदने वालों की भीड़ मनोज चौधरी के लिए फायदेमंद साबित हुई थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है और इसके संकेत मिलने लगे हैं। हाल ही में विधायक मनोज चौधरी के गृह ग्राम कैलोद में ग्रामीणों ने चुनरी यात्रा का आयोजन किया,आयोजक ग्रामीणों ने पूर्व मंत्री दीपक जोशी को बुलाया, कांग्रेस नेता राजवीर सिंह बघेल को बुलाया, लेकिन गांव के विधायक बेटे मनोज चौधरी को नहीं बुलाया, अर्थात इस बार उनका अपना गांव उन्हें सहयोग करने के मूड में नहीं है। जो भी कांग्रेसी विधायक ज्योतिरादित्य सिंधिया के पीछे भाजपा में आए हैं, उनकी बहुत बूरी गत होने वाली है, ज्योतिरादित्य सिंधिया तो महाराज से भाई साहब होकर भाजपा में सेट हो गए, लेकिन फजीहत मनोज चौधरी जैसे नेताओं की होना है, जो सिर्फ और सिर्फ ज्योतिरादित्य सिंधिया के भरोसे है। सही भी है ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में आए कांग्रेसी विधायक, अपने अपने क्षेत्र में भाजपा नेताओं के अधिकारों पर अतिक्रमण करके बैठे हैं, उस समय कमलनाथ की सरकार गिराकर भाजपा की सरकार बनाना थी, अब ऐसी कोई मजबूरी नहीं है तो क्यों झेलेंगे भाजपा नेता इन सिंधिया समर्थक कांग्रेसी नेताओं को? गांव की चुनरी यात्रा में मनोज चौधरी को नहीं बुलाया, ठीक उसके बाद अतिक्रमण हटाने का मामला सामने आया और पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने अतिक्रमण हटाने का विरोध किया। इस घटनाक्रम को विधायक की चुनरी यात्रा में उपेक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। पूर्व मंत्री दीपक जोशी को इस समय युद्ध स्तर पर राजनीतिक जमीन तलाशते देखा जा सकता है, वे बागली विधायक, खातेगांव कन्नौद विधायक के खिलाफ वातावरण बनाकर अब हाटपीपल्या विधायक के खिलाफ केन्द्रित हो जाना चाहते हैं। हाटपीपल्या से दीपक जोशी विधायक रहे हैं और मनोज चौधरी को कमजोर कड़ी माना जा रहा है, क्योंकि वे कांग्रेस से भाजपा में आए हैं। आम जनता एवं भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच कहा जा रहा है कि जो मनोज चौधरी कांग्रेस का नहीं हुआ,वह भाजपा का कैसे हो सकता है? वैसे भी ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेसी भाजपा में तो आ गए, लेकिन हमेशा पानी में तेल की तरह अलग ही तीरते रहे हैं, वे कभी भाजपा में घुल मिल नहीं पाए। आज जो हाटपीपल्या विधायक मनोज चौधरी को विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है,वह कांग्रेसी होने का खामियाजा है, जो उन्हें भुगतना ही हैं। ***************
