पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101

देवास की जनता के पानी की सुविधा के लिए नगर निगम ने क्षिप्रा नदी पर बैराज (डेम) बनाया है, इसके रखरखाव पर खर्च भी देवास नगर पालिक निगम ही करता है, लेकिन इसका उपयोग एक निजी संस्था करती हैं और इसके लिए निजी संस्था नगर निगम को किसी प्रकार का कोई शुल्क भी नहीं दे रही हैं। यह क्रम बरसों से चला आ रहा है, कुल मिलाकर कहा जाए देवास नगर निगम, देवास की जनता का खून चूसकर धंधेबाजों को लाभान्वित कर रहा है। बैराज (डेम) के संधारण पर खर्च हो रही राशि को निजी संस्था से लिए जाने, पानी की दर कम करने एवं बिल माफी का संकल्प पारित किए जाने को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता ललित चौहान ने पिछले बुधवार को नगर निगम में आयोजित महापौर जनसनुवाई में गीता दुर्गेश अग्रवाल को आवेदन सौंपा हैं। ललित चौहान शहर का वो सामाजिक कार्यकर्ता है, जो दशकों से शहर हितों की लड़ाई लड़ रहा है, जिम्मेदारों को आवेदन देकर लिए गए निर्णयों का पुनरावलोकन करने का निवेदन कर रहा है, लेकिन शहर हित और जनहित पर कोई ध्यान देने को ही तैयार नहीं हैं। महापौर गीता अग्रवाल की जनसुनवाई में दिए आवेदन में सामाजिक कार्यकर्ता ललित चौहान ने बताया कि शहर की जनता के पानी की सुविधा के लिए नगर पालिक निगम देवास द्वारा निर्मित क्षिप्रा नदी पर क्षिप्रा बेराज/डेम का उपयोग निजि संस्था देवास वाटर प्रोजेक्ट कर रही है, वह भी नि:शुल्क। जिससे निगम को भारी आर्थिक हानि का सामना करना पड़ रहा है। वही राज्य शासन ने देवास वाटर प्रोजेक्ट को क्षिप्रा बेराज/डेम के उपयोग की नि:शुल्क अनुमति दी है, जिसकी वजह से वर्षा काल में डेम में जो पानी संग्रहित होता है, वह निजी संस्था के द्वारा पानी लेने की वजह से डेम का पानी जल्द खत्म हो जाता है, इसकी वजह से निगम देवास को नर्मदा विकास संभाग से पानी की डिमांड (मांग) जल्दी करना पड़ती है, जिसके कारण निगम पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। निगम देवास ने वर्ष 2023 में जनवरी माह से ही पानी की मांग करना शुरू कर दी थी। नर्मदा विकास संभाग से जिसका जनवरी माह का बिल तकरीबन 70 लाख के आसपास का बिल निगम देवास को दिया गया है, वहीं फरवरी माह का बिल करोड़ों में दिया गया, मात्र दो माह का बिल ही तकरीबन 3 करोड़ का बिल ही नर्मदा विकास संभाग से निगम देवास को दिया गया है। यह चिंता का विषय है, निगम को उपभोक्ताओं से जलकर राशि राजस्व के रूप में सालाना मात्र तकरीबन 7.5 करोड़ रूपये ही प्राप्त होती है, जो कि पिछले साल प्राप्त हुई थी। ऐसे में करोड़ो का पानी खरीदना निगम के हित मे नहीं है, जबकि वर्षाकालिन क्षिप्रा बेराज/डेम में जो पानी संग्रहित होता है, वह अधिक समय तक चलता है, लेकिन निजी संस्था के द्वारा डेम से पानी लेने की वजह से यह पानी शायद दिसंबर आखिर में ही खत्म होने लगता है, जबकि यह पानी तकरीबन अप्रैल-मई तक चलना चाहिए। निगम देवास को यहां दौहरी आर्थिक मार पड़ रही है, एक तो पानी जल्दी खरीदना पड़ रहा है, वहीं क्षिप्रा बेराज के डेम के संधारण पर भी निगम की अच्छी खासी मोटी रकम खर्च होती है। अभी वर्तमान में निगम देवास के ऊपर नर्मदा विकास संभाग का 4 सौ 96 करोड़ रूपये से अधिक का पानी बिल बकाया है एवं निगम देवास की जो दर तय की गई है पानी की रू. 22.60 प्रति हजार लीटर दर, वह भी ज्यादा है, दर मात्र 20 पैसे प्रति हजार लीटर होना चाहिए। नगर निगम में बैठने वाली नगर सरकार इन बातों पर ध्यान दें, देवास की जनता ने इसीलिए सरकार चुनी है। नगर सरकार के नुमाइंदों सहित देवास की जनता ने विधायक सांसद और उन राजनीतिक जनप्रतिनिधियों से सवाल करना चाहिए कि पानी के चार सौ छियानवे करोड़ रुपए का क्या होगा? क्या ये देवास की जनता से वसूले जाएंगे?
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