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Saturday, November 7, 2026
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प्रयोगशाला नहीं है देवास, नेता अधिकारी समझने की कोशिश करें, कोई बोलता नहीं इसका यह मतलब नहीं कि कुछ तो भी किया जाए

✍️पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101

नेताओं ने देवास को जबरदस्ती का पुल दिया है, जो एबी रोड पर राम नगर से बावड़िया तक स्थित है। इस पुल की देवास को बिल्कुल आवश्यकता नहीं थी, लेकिन नेताओं ने दिया, इसका विरोध भी बहुत हुआ, लेकिन नेताओं को पुल देना था और उन्होंने दिया, यह पुल देवास की जनता को जबरदस्ती दिया गया है, इसलिए इस पुल को जनता के बीच जबरिया पुल या जबरदस्ती का पुल कहा जाता है। कांग्रेस इस पुल की जनक तथा भाजपा इस पुल के स्थान परिवर्तन का कारक बनी है, कांग्रेस भाजपा दोनों ही पार्टियों का इस जबरदस्ती के पुल में जबरदस्ती का योगदान रहा है। इस पुल को बनाने में कोरोना काल जैसी विभत्स आपदा को असंवेदनशील अधिकारी नेताओं ने अवसर के रूप में देखा है। लाक डाउन के समय इस जबरदस्ती के पुल को बनाने के लिए दिन-रात काम चला है। कोरोना जैसी महामारी में जब लोग घरों में दुबके बैठे थे,तब जबरदस्ती के पुल का काम अनथक, बिना अवरोध चला है। देवास में फिलहाल तीन पुल है और तीनों पुल देवास के जिम्मेदारों की योग्यता एवं दूरदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं। ना तो व्यावहारिक दृष्टि से और ना तकनीकी दृष्टि से देवास के पुलों को सही कहा जा सकता है। कोई बोलने वाला नहीं है तो इसका ये मतलब नहीं कि भोले-भाले नागरिकों की देवास में कुछ तो भी करें, नेता अधिकारियों को समझने की कोशिश करना चाहिए कि देवास प्रयोगशाला नहीं है, जहां कुछ तो भी प्रयोग किए जाए। जबरदस्ती के पुल पर दो तीन दुर्घटनाएं हो गई, जिसमें कुछ गंभीर घायल हुए और एक दो मौत भी हो गई, यातायात पुलिस ने जबरदस्ती के पुल पर दो पहिया वाहनों का आना-जाना प्रतिबंधित कर दिया। सोशल मीडिया पर यातायात पुलिस के इस निर्णय पर काफी कुछ प्रतिक्रियाएं आई, अंततः यातायात डीएसपी किरण शर्मा मीडिया के माध्यम से जनता के सामने नुमाया हुए और कहने लगे लोगों की जान बचाने के लिए प्रयोग के तौर पर यह प्रतिबंध लगाया है। यह सही है कि नवनिर्मित जबरदस्ती का पुल सुरक्षा की दृष्टि से खामियों से भरा है, पुल पर डिवाइडर नहीं है और सबसे बड़ी बात इस पुल पर चढ़ते समय एवं उतरते समय हल्का सा अहसास होता है कि हम पुल पर चढ़ रहे हैं या उतर रहे हैं, अन्यथा पुल पर ऐसा लगता है कि हम सड़क पर ही चल रहे हैं, इसमें वाहन चालक ओवरटेक करता है और दुर्घटना का शिकार हो जाता हैं। यातायात पुलिस कहें या डीएसपी किरण शर्मा, इनका देवास के यातायात से कभी कोई लेना-देना नहीं रहा,अब ये लोगों की जान बचाने को जबरदस्ती के पुल पर दो पहिया वाहन प्रतिबंधित कर प्रयोग कर रहे हैं। जबरदस्ती के पुल पर प्रयोग की नहीं डिवाइडर की आवश्यकता है और वह अविलंब बनना चाहिए।

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