✍️पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101
पहले अधिकारी बदलते थे तो नगर में उनके बदलाव का प्रभाव नजर आता था, जनता बदलाव के प्रभाव को महसूस करती थी, अधिकारी के जनता के बीच किए गए काम उसकी उपस्थिति को महसूस कराते थे, लेकिन आजकल अधिकारी बदल जाते हैं,नए अधिकारी आ जाते हैं, जनता को पता ही नहीं चलता। ऐसा शायद इसलिए कि आजकल अधिकारी आते नहीं,लाए जाते हैं, आने वाले (नियम से चलने वाले) अधिकारी तो लूप लाइन में सड़ रहे हैं, लाए गए अधिकारी शहर के माथे पर थोपे जा रहे हैं। लाए गए अधिकारी लाने वाले के प्रति जवाबदेह होते हैं, जनता के प्रति नहीं? लंबे समय से देवास में यही हो रहा है, यही कारण है कि अधिकारी भी सोचते हैं कि जो उनको लाए हैं, बस उनकी जी-हुजूरी करो, उनके पट्ठों, उनके चाटूकारों की गुलामी करो, बाकी जनता जाए भाड़ में, इसलिए अधिकारी अपने कार्यालय की कुर्सी से चिपकर रह जाते हैं, वे जनता से रूबरू हो ही नहीं पाते हैं। पूर्व कलेक्टर चंद्रमौली शुक्ला और एसपी शिवदयाल सिंह देवास के निष्क्रिय कलेक्टर एसपी के रूप में लंबे समय तक याद किए जाते रहेंगे। दोनों का कार्यकाल, प्रशासन को नैतिक रूप से तबाह करने वाला साबित हुआ, चंद्रमौली शुक्ला के लिए निगमायुक्त विशाल सिंह बैसाखी बने तथा एसपी शिवदयाल सिंह के लिए डीएसपी किरण शर्मा। कलेक्टर चंद्रमौली शुक्ला के बाद ऋषव गुप्ता कलेक्टर के रूप में आए तो जनता को लगा कलेक्टर बदलाए है,वह भी इसलिए कि ऋषव गुप्ता ने पहली बार कलेक्टर पद की जिम्मेदारी संभाली है, देवास में एसपी भी बदलाए है, शिवदयाल सिंह के स्थान पर संपत उपाध्याय आए हैं, लेकिन अभी तक एसपी बदलाव का प्रभाव नगर में नजर नहीं आया है। ना तो थानों के कामकाजों के ढर्रे में कोई परिवर्तन आया है, ना क्रिया-कलापों में, ना नगर में चलने वाली अवैध एवं आपराधिक गतिविधियों में कोई परिवर्तन नजर आया है, ऐसा लगता है मानो शिवदयाल गए और संपत उपाध्याय के रूप में पुनः शिवदयाल ही वापस देवास आ गए। एसपी बदलाव का असर नजर नहीं आना चुगली करता है, एसपी साहब आए नहीं, लाए गए हैं।
