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Wednesday, April 15, 2026
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देवास प्रेस क्लब की सदस्य संख्या दशकों से नहीं बढ़ना, संदेह उत्पन्न करता हैं, जबकि शहर में दर्जनों युवा पत्रकार जिम्मेदारी के साथ पत्रकारिता कर रहे हैं,वे प्रेस क्लब के सदस्य क्यों नहीं बनते? या तो प्रेस क्लब के नाम पर जमकर उगाही हो रही हैं या फिर प्रेस क्लब के मठाधीश असुरक्षा के भाव से ग्रसित हैं ?

पंडित प्रदीप मोदी. (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101

   

देवास में ऐसे बहुत से युवा है, जिन्होंने पत्रकारिता क्षेत्र के ग्लैमर को देखकर, इसे अपना पेशा बनाया, उद्देश्य बनाया और इसमें अपना भविष्य तलाशने निकल पड़े, लेकिन अफसोस वे देवास प्रेस क्लब के सदस्य नहीं हैं। देवास प्रेस क्लब की सदस्य संख्या पचपन छप्पन से आगे बढ़ती ही नहीं, भाई क्यों नहीं बढ़ती? नवीन सदस्यता प्रदान करने में क्या आफत हैं? ये प्रतिभावान, विचारवान बच्चें पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने भविष्य को बनाना चाहते हैं तो इन्हें संगठन का हिस्सा क्यों नहीं बनाता देवास प्रेस क्लब? क्या प्रेस क्लब को मुट्ठीभर लोग संचालित कर रहे हैं? क्या वे प्रेस क्लब के नाम पर विभागों से उगाही कर रहे हैं? फिर कारण क्या है, नवीन सदस्यता प्रदान नहीं करने का, नए सदस्य नहीं बनाने का? या फिर यह मान लिया जाए कि देवास प्रेस क्लब के सदस्य पारंपरिक है, पुराने ढर्रे पर चलने वाले हैं, उस जमाने के है, जब हाकर, एजेंट और दलाल किस्म के लोग भी पत्रकारों के साथ रहकर पत्रकार कहला जाया करते थे? आखिर पता तो चले कि देवास प्रेस क्लब अन्य पत्रकारों के लिए अपनी सदस्यता के दरवाजे क्यों नहीं खोलता? प्रेस क्लब पर कुंडली मारकर बैठे मठाधीश प्रेस क्लब की सदस्य संख्या क्यों नहीं बढ़ने देते? ऐसे अनेक प्रतिभाशाली युवा पत्रकार हैं, जिन्होंने बिना प्रेस क्लब में शामिल हुए, एकला चलो की नीति पर अपना-अपना नाम बनाया है और इन सब की खासियत यह है कि ये सब आपस में आश्चर्यजनक रूप से संगठित हैं, प्रेस क्लब के मोहताज नहीं, हां प्रेस क्लब के बेमतलब के आंदोलन के समय प्रेस क्लब को जरुर इन पत्रकारों का मोहताज देखा गया है। अनुभवहीन अध्यक्ष अतुल बागलीकर ने प्रशासन के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया था, तब इन्हीं पत्रकारों ने प्रेस क्लब की लाज रखी थी, आधिकारियों से पत्रकारों को मैनेज करने के ठेके लेने वाले प्रेस क्लब के सम्मानित सदस्य गण तो आंदोलन से नदारद थे, ना जाने कहां मुंह छुपा कर बैठे थे? ऐसे सक्रिय प्रतिभावान पत्रकारों को सदस्य बनाकर देवास का प्रेस क्लब गौरवान्वित ही होगा। देवास प्रेस क्लब में ऐसे कई मठाधीश है, जिनको चार कालम की खबर लिखने का कह दोगे तो फुस्सी बम साबित हो जाएंगे और नई उम्र के युवा पत्रकार पत्रकारिता के हर फन को आत्मसात कर लेने को उतावले, इनको प्रेस क्लब की सदस्यता क्यों नहीं मिलना चाहिए? हालांकि तन्मयता से अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित इन पत्रकारों को किसी संगठन की आवश्यकता नहीं, लेकिन प्रेस क्लब से देवास का तथा देवास के लोगों का भावनात्मक रूप से जुड़ाव है और ये युवा बच्चें भी देवास के हैं। प्रेस क्लब दशकों पुराना संगठन है और देवास के पत्रकारों का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए भी ये प्रेस क्लब की ओर आकर्षित रहते हैं। अफसोस दशकों पुराना प्रेस क्लब,सीमित सदस्य संख्या होने के कारण चंद दलालों के उपयोग का साधन बनकर रह गया है। देवास प्रेस क्लब का दुर्भाग्य रहा है कि इसका सिर्फ उपयोग हुआ है, इसके लिए कभी कुछ नहीं किया गया। कितने शर्म की बात है कि देवास प्रेस क्लब के पास अपने बैठने तक की जगह नहीं है, देवास प्रेस क्लब बरसों से ठीए से संचालित हो रहा है। प्रेस क्लब के सदस्यों ने पत्रकारिता के नाम पर अपने केबिन कबाड़ लिए, लेकिन प्रेस क्लब के लिए, पत्रकार भवन के लिए जगह नहीं कबाड़ पाए। प्रेस क्लब पत्रकारिता को ऊंचाई देने के लिए होता है, उपयोग करके स्वार्थ साधने के लिए नहीं। श्रीकांत उपाध्याय ने अध्यक्ष बनकर दलाली की, हल्ला मचा तो अन्य दलाल चुनाव लड़ने से डर गए और अतुल बागलीकर अध्यक्ष बन गए। बागलीकर अध्यक्ष बने तो उम्मीद जागी कि शायद प्रेस क्लब का भला हो, लेकिन अतुल बागलीकर दलाल विशेष के मोहरे बनकर दम तोड़ गए। अब बागलीकर की ओर से खबरें आ रही है कि वे तो प्रेस क्लब की सदस्य संख्या बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन सचिव चेतन राठौर रुचि नहीं दिखा रहे हैं और सदस्यता के लिए सचिव का सक्रिय होना जरूरी है। प्रेस क्लब सचिव क्यों रुचि नहीं दिखा रहे हैं? वे कौन से दलाल के कहने में है? सदस्यता ग्रहण करने के इच्छुक पत्रकारों को इन सवालों के जवाब मिलना चाहिए।
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