पंडित प्रदीप मोदी _(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)_ 9009597101

देवास के महात्मा गांधी बस स्टैंड पर आए दिन होने वाले झगड़े टंटे, कहीं शांतिप्रिय शहर देवास के लिए घातक साबित ना हो जाए। सवारी को लेकर झगड़े, समय को लेकर झगड़े, एजेंटी को लेकर झगड़े और कभी कभी तो बस के अंदर सामान बेचने को लेकर झगड़े हो जाते हैं। बस पर चलने वाले वाले मवालियों के यात्रियों से होने वाले झगड़े अलग है, बस पर चलने वाले लोगों की भाषा शैली किसी भी दृष्टि से कर्मचारियों जैसी नहीं है, इसलिए इन्हें मवाली कहना ही श्रेयस्कर है। इन मवालियों में कुछ अच्छे लोग भी बसों पर काम करते हैं, किन्तु उनकी तादाद न के बराबर है। मवालियों की तादाद ने देवास के बस स्टैंड को मवालियों का आंगन बना रखा हैं और इस आंगन में होने वाले झगड़ों से भय बना रहता हैं कि कहीं ये झगड़े शांतिप्रिय शहर देवास को दंगे की आग में ना झोंक दे, क्योंकि बस स्टैंड पर होने वाले झगड़ों में मवालियों से जुड़े मोहल्ले के मोहल्ले बस स्टैंड पर हाफ-हुप करने चले आते हैं। पुलिस और नेताओं का झुकाव हमेशा बस स्टैंड के मवालियों की ओर देखा गया है,
एजेंटी के चलते बस स्टैंड के मवाली पुलिस और नेताओं के कमाऊ पूत बने हुए हैं। पुलिस विभाग के नाकारेपन से देवास का जन जन परिचित हैं, लेकिन देवास का परिवहन विभाग भी नियम विरुद्ध चलने वाली बसों के प्रति निकम्मा बना हुआ है, आश्चर्य हैं। ये बस पर चलने वाले मवाली सम्मानित यात्रियों के बीच दबंगता पूर्वक कहते हैं कि हमारा ना तो पुलिस कुछ कर सकती है और ना परिवहन विभाग। ये मवाली ऐसा कह सकते हैं, क्योंकि देवास में तैनात भ्रष्ट अफसरों ने नैतिक रूप से पुलिस विभाग को तबाह कर दिया है और शर्म की बात यह है कि ये भ्रष्ट अफसर जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के लाड़ले बने हुए हैं। बस पर चलने वाले मवाली का अनुभव इस लेखक को भी हुआ है, जिसने कहा था पुलिस हमारा कुछ नहीं उखाड़ सकती, इसकी शिकायत मैंने कोतवाली थाना देवास पर की थी, कोई तिवारी नाम के एएसआई का फोन आया था बड़ी बड़ी बातें की थी, तिवारी ने कहा था वह आपसे माफ़ी मांगेंगा, उसके बाद मेरा आवेदन रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया, बात को चार पांच महीने हो गए। बाद में बस स्टैंड के मवालियों ने कहा देख लिया गुरुजी क्या उखाड़ लिया पुलिस ने? पुलिस के कमाऊ पूत इन मवालियों के बस स्टैंड पर जलवे हैं। बस में सफर करने वाली बहन-बेटियां भी मवालियों के मवालीपन से असुविधा महसूस करती हैं, लेकिन करें तो क्या करें? जब पुलिस इन मवालियों के खिलाफ कुछ कर ही नहीं सकती, इनका कुछ उखाड़ ही नहीं सकती तो शिकायत करने का औचित्य क्या, फायदा क्या? जब मेरे जैसे प्रतिक्रियावादी पत्रकार की शिकायत रद्दी की टोकरी में समा गई तो आम आदमी की शिकायत का क्या हाल करती होगी मवाली संरक्षक देवास पुलिस? अनुमान लगाया जा सकता है। इन दिनों बस स्टैंड पर झगड़े बढ़े हैं और इसका कारण बस मालिकों द्वारा बसों को बदमाश किस्म के मवालियों को ठेके पर दे देना है। ये मवाली अधिक से अधिक कमाई कर लेने के चक्कर में एक दूसरे से उलझते रहते हैं और बस मालिक बसों को ठेके पर देकर सिर्फ नोट गिन रहे हैं। मवालीपन से सराबोर हो चुके देवास बस स्टैंड के मवाली झगड़े, कहीं शांतिप्रिय शहर देवास की शांति और भाईचारे को ना खा जाए? पुलिस ने देवास के बस स्टैंड पर ध्यान देना चाहिए। **************
