पं. प्रदीप मोदी की कलम से - BebakAzad https://bebakazad.in Azad Khabar Tue, 25 Nov 2025 16:33:28 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://bebakazad.in/wp-content/uploads/2022/02/cropped-1643887222331-scaled-1-32x32.jpg पं. प्रदीप मोदी की कलम से - BebakAzad https://bebakazad.in 32 32 ब्राह्मण बेटियों का अपमान करने वाले अपनी हद में रहे..गौर https://bebakazad.in/%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a3-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%ae%e0%a4%be/ https://bebakazad.in/%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a3-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%ae%e0%a4%be/#respond Tue, 25 Nov 2025 16:33:27 +0000 https://bebakazad.in/?p=13736 बेबाक आजाद न्यूज 9993756976 परशुराम सेना के पूर्व जिला महामंत्री अभिषेक गौर ने बताया कि ब्राह्मण समाज बखतगढ़ ने प्रदेश के मुखिया माननीय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र लिखकर यह मांग की है कि आजाक्स संगठन के नवनिर्वाचित प्रांतीय अध्यक्ष और आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के विवादित बयान से पूरे ब्राह्मण समाज में भारी […]

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हटाए गए एसडीएम प्रदीप सोनी पर लोकायुक्त में प्रकरण दर्ज हुआ, किसीको आश्चर्य नहीं हुआ, पराये विवेक से चलने वाले अधिकारी का यही हश्र होता है https://bebakazad.in/%e0%a4%b9%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%8f-%e0%a4%97%e0%a4%8f-%e0%a4%8f%e0%a4%b8%e0%a4%a1%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%ae-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%aa-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%a8/ https://bebakazad.in/%e0%a4%b9%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%8f-%e0%a4%97%e0%a4%8f-%e0%a4%8f%e0%a4%b8%e0%a4%a1%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%ae-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%aa-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%a8/#respond Sun, 16 Jul 2023 16:01:22 +0000 https://bebakazad.in/?p=12409 ✍️पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101 देवास की जनता ने एसडीएम प्रदीप सोनी को राजनीतिक एवं प्रशासनिक खिलौने के रूप में देखा है, जिसने स्वविवेक से कभी लेना-देना ही नहीं रखा, हमेशा दूसरों के विवेक से चलते रहे, दूसरों का साधन बनते रहे, लोग इनसे खेलते रहे। प्रशासनिक दृष्टि से देखा जाए तो प्रदीप सोनी […]

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✍पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101

देवास की जनता ने एसडीएम प्रदीप सोनी को राजनीतिक एवं प्रशासनिक खिलौने के रूप में देखा है, जिसने स्वविवेक से कभी लेना-देना ही नहीं रखा, हमेशा दूसरों के विवेक से चलते रहे, दूसरों का साधन बनते रहे, लोग इनसे खेलते रहे। प्रशासनिक दृष्टि से देखा जाए तो प्रदीप सोनी का भ्रष्टाचार के लिए सिर्फ उपयोग हुआ है, प्रदीप सोनी खुद भ्रष्टाचार के लिए कोई आपराधिक कृत्य करें, यह आज भी मन मानने को तैयार नहीं, खैर लोकायुक्त में प्रकरण दर्ज हुआ है, लांछन तो लगा है, एसडीएम पद से हटाए भी गए हैं, प्रशासनिक गलियारों में बाबू बनाकर बिठा दिए गए हैं, वैसे तो प्रशासन में कोई काम बेकार के नहीं होते, लेकिन रुतबा, झांकी के साथ मलाई खाने के आदतन अधिकारियों के लिए वे सब बेकार के काम होते हैं, ऐसे काम प्रदीप सोनी को दे दिए गए हैं, कुल मिलाकर कहा जाए तो अफसरी अहंकार में हमेशा तने हुए ठूंठ की तरह घूमनेवाले इस अधिकारी को अपमानित करके कोने में बिठा दिया गया हैं और इनकी जगह बागली से नये एसडीएम आ गए हैं, जो मुकाती बाबू से एसडीएम कार्यालय का क ख ग सीख रहे होंगे। प्रदीप सोनी पूर्व कलेक्टर चंद्रमौली शुक्ला के कार्यकाल में महत्वपूर्ण अधिकारी रहे, जो मन में आया वह किया, नेताओं को खुश करने के लिए इस अधिकारी ने संवेदनाओं एवं संविधान से परे जाकर काम करने से भी परहेज नहीं किया। चंद्रमौली शुक्ला एक अयोग्य कलेक्टर थे, इसलिए उन्होंने अयोग्य अधिकारी प्रदीप सोनी को महत्वपूर्ण बना दिया था, लेकिन ऋषव गुप्ता के आने के बाद प्रदीप सोनी का नाम कम सुनाई देने लगा था, अर्थात ऋषव गुप्ता एक योग्य अधिकारी हैं, योग्य कलेक्टर है, जिन्होंने आते ही समझ लिया कि एसडीएम प्रदीप सोनी किसी काम का अधिकारी नहीं है। पूर्व कलेक्टर चंद्रमौली शुक्ला के समय यही प्रदीप सोनी सारा प्रशासन अपने माथे पर लिए-लिए घूमते थे, अपनी बाल सुलभ प्रशासनिक हरकतों से अनेक बार प्रशासन को निंदा एवं हंसी का पात्र बनाया था। मधुर स्वीट्स पर कार्रवाई करने दल बल के साथ गए तो एक साधारण से दुकानदार ने इन्हें दुत्कार कर भगा दिया था और ये कुछ नहीं कर पाए थे, प्रशासन की इस सार्वजनिक दुर्गति पर देवास ने, देवास की जनता ने सारे जनप्रतिनिधियों को भी मौन देखा था। एक घटना में एसडीएम रहते हुए प्रदीप सोनी स्वयं पत्ती बाजार स्थित जुएं के अड्डे पर दबिश देने पहुंच गए थे, इस दबिश का शायद पुलिस रिकार्ड में कोई उल्लेख नहीं होगा, क्योंकि उस समय किसी पत्रकार ने सीएसपी विवेक सिंह से पूछा था तो उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में जवाब दिया था कि जिसने दबिश दी है, वह रिपोर्ट लिखाने तो आए, पुलिस रिपोर्ट भी लिखेगी। उस समय नगर ने जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को बड़ी ही हास्यास्पद स्थिति में देखा था, सारे शहर में संदेश गया था कि जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन में तालमेल का अभाव है। यों प्रायः जुएं सट्टे के अड्डों पर पुलिस दबिश देती फिरती है, मां चामुण्डा की नगरी देवास ने एसडीएम को जुएं के अड्डे पर दबिश देते देखा है और सीएसपी ने शायद अप्रत्यक्ष रूप से घोषणा की थी कि पत्ती बाजार के अड्डे को पुलिसात्मक मान्यता मिली हुई है? कोरोना काल में बावड़िया स्थित श्मशान हटाने वाला काम, प्रदीप सोनी का सबसे राक्षसी और असंवेदनशील काम रहा, ऐसे समय में जब लाशें जलाने को श्मशान कम पड़ रहे थे, तब नेताओं का साधन बनकर इस अधिकारी ने श्मशान हटवाया। उस कृत्य ने देवास की जनता को बता दिया कि प्रदीप सोनी दूसरों की बुद्धि से चलनेवाला अविवेकी अधिकारी हैं, इसमें संवेदनाओं का अभाव है। नेताओं के कहने पर कांग्रेस नेता शिवा चौधरी पर कार्रवाइयां यहां तक तो ठीक था, दशकों से निकलने वाली भगवान केदारेश्वर की सवारी को नहीं निकलने देना, प्रदीप सोनी का बेहद निंदनीय कार्य रहा। सारे देवास की आस्था माता तुलजा भवानी के मंदिर में जूतों से घूमना और अपनी उपस्थिति में भवानी स्वरूपा सम्मानित महिला को महिला पुलिस से लाक डाउन के समय बीच सड़क पर पिटवाना, प्रदीप सोनी के निहायत शर्मनाक कामों में शुमार रहे। प्रदीप सोनी में देवास वासियों ने कभी भी अधिकारी वाली गरिमा नहीं देखी, मैं पीछे अनेक बार प्रदीप सोनी को “बाल सुलभ अहंकार से अलंकृत अधिकारी” लिखता आया हूं। इस अधिकारी में देवास ने अपने पद को लेकर बच्चे जैसा अहंकार देखा है, जो कदम-कदम पर अपने अहंकार के वशीभूत सबको कहने की कोशिश करता है कि हें हें देखो, मैं अफसर बन गया, देवास ने लोकायुक्त में फंसे प्रदीप सोनी को कुछ इसी हाल में देखा है। बाल सुलभ अहंकार से अलंकृत इस अधिकारी के इस हश्र पर किसीको कोई आश्चर्य नहीं हुआ, दूसरों के विवेक से चलने वाले लोगों का यही हश्र होता है। हां इतना जरूर कहा जा सकता है किसी नेता को खुश करने के चक्कर में यह बालबुद्धि अधिकारी लपेटे में आ गया है, वरना भ्रष्टाचार के लिए प्रदीप सोनी केरियर पर दाग लगाए? मन अभी भी नहीं मानता।

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एसपी सम्पत उपाध्याय ने पुलिस प्रशासन की पीड़ा को व्यक्त किया है, कितने जनप्रतिनिधि और पत्रकारों ने समझने की कोशिश की? https://bebakazad.in/%e0%a4%8f%e0%a4%b8%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%a4-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%af-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%81/ https://bebakazad.in/%e0%a4%8f%e0%a4%b8%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%a4-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%af-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%81/#respond Fri, 14 Jul 2023 01:45:42 +0000 https://bebakazad.in/?p=12405 ✍️पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101 प्रायः पुलिस अधीक्षकों से पत्रकार सवाल करते हैं तो पुलिस अधीक्षक गोलमाल जवाब देकर सवालों से पल्ला झाड़ने की कोशिश करते हैं और जवाब भी देते हैं तो ऐसे कि कोई भी जिम्मेदार कटघरे में खड़ा ना हो। पहले तो पत्रकार सवाल करते ही नहीं और करते भी हैं […]

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✍पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101

प्रायः पुलिस अधीक्षकों से पत्रकार सवाल करते हैं तो पुलिस अधीक्षक गोलमाल जवाब देकर सवालों से पल्ला झाड़ने की कोशिश करते हैं और जवाब भी देते हैं तो ऐसे कि कोई भी जिम्मेदार कटघरे में खड़ा ना हो। पहले तो पत्रकार सवाल करते ही नहीं और करते भी हैं तो इस बात का ध्यान रखते हैं कि उनके सवालों से एसपी साहब नाराज ना हो जाए। ज्यादातर मौकों पर देखा गया है पत्रकारों का अधिकारियों से मिलना खुद के संबंध प्रगाढ़ता के साथ विकसित करने के लिए होता है, जनसमस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए नहीं। पिछले दिनों जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के पत्रकार देवास मुख्यालय पर आकर एसपी सम्पत उपाध्याय से मिले और बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अपराध गुणात्मक रूप से बढ़ रहे हैं, आम आदमी की जान एवं माल खतरे में है। बताया जाता है एएसपी ग्रामीण ट्रेनिंग पर गए हुए थे और अपराधों का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा था इसी संदर्भ में पत्रकार एसपी से मिलने जिला मुख्यालय पहुंचे थे। यह बात अलग है कि आम आदमी अपराध से रूबरू हो तो पत्रकार बंधुओं को कोई फर्क नहीं पड़ता, खबर लिखकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं, लेकिन जब पत्रकार बंधु भी अपराध से रूबरू होते हैं, प्रभावित होते हैं तो उन्हें ज्ञात होता है, उन्हें पता चलता है कि अपराधों का ग्राफ बढ़ गया है, पत्रकार एसपी से मिलकर बढ़ते अपराध पर चिंता जताते हैं, यहां भी यही हुआ है। पत्रकारों का एसपी से मिलना जनता के लिए नहीं था, पत्रकारों के लिए था। एसपी सम्पत उपाध्याय के बारे में बताया जाता हैं कि वे बेहद सहज-सरल और प्रायोगिक अधिकारी है, उन्हें सच कहने में, सच स्वीकार करने में संकोच नहीं होता। शायद यही कारण रहा कि इस सरल अधिकारी ने सहजता से पत्रकारों के सामने स्वीकार कर लिया कि एक तो पुलिस के पास बल की कमी, उस पर पुलिस को व्यवस्था संभालने के नाम पर इतने काम सौंप दिए जाते हैं कि वह अपना मूल काम अपराधों पर नियंत्रण करना, गंभीरता से कर ही नहीं पाती। एसपी सम्पत उपाध्याय के स्थान पर कोई अन्य अधिकारी होता तो गोलमाल जवाब देकर अपनी विभागीय कमजोरियों को ढांकने की कोशिश करता, लेकिन सम्पत उपाध्याय ने ऐसा नहीं किया है, जो बताता है यह अधिकारी चाहे ज्यादा नहीं, लेकिन थोड़ा तो सच के निकट हैं। क्या मिलने वाले पत्रकारों ने एसपी की भावनाओं को समझने का प्रयास किया, क्या पुलिस विभाग के अभाव, परेशानियों को समझने का प्रयास किया, या फिर एसपी को हताश, कर्तव्य से बचने के लिए बहाने बनाने वाला अधिकारी समझ लिया? ऐसा हो सकता हैं, क्योंकि पत्रकारों को एसपी जैसे अधिकारी से ऐसे जवाब सुनने की आदत ही नहीं। एसपी ने पत्रकारों के सामने यह सोचकर मन खोलकर रख दिया कि शायद ये कलम चलाए और पुलिस विभाग का भला हो, पत्रकार पुलिस विभाग को कटघरे में तो खड़ा करते हैं, लेकिन उनके विभाग की परेशानियों को व्यक्त नहीं करते। पुलिस बल की कमी का रोना हमेशा से रोया जाता रहा है, उस पर एकात्रे (एक दिन छोड़कर आने वाला बुखार) की तरह आने वाले वीआईपी, सामाजिक धार्मिक आयोजनों की व्यवस्था संभालना, तीज-त्योहार, सबकुछ तो पुलिस के माथे हैं, पूरे पांच साल चलने वाले छोटे-बड़े चुनाव, वे भी पुलिस के माथे ही है, अब इन सब से समय बचे तो पुलिस अपराध पर नियंत्रण करें, एसपी सम्पत उपाध्याय ने क्या गलत कहा? ये छाती पर मूंग दलते वीआईपी, धर्म के नाम पर एक दूसरे को देखकर गुर्राने वाले राजनीति से प्रभावित नागरिकों के जलसे-आयोजन पुलिस को समय दे तो पुलिस अपराध नियंत्रण और जनसुरक्षा की बात करें। एसपी सम्पत उपाध्याय ने सरलता और सहजता से बड़ी बात कह दी है, क्या एसपी से मिलने वाले पत्रकार उनके द्वारा कही गई बात की गंभीरता को समझ पाएंगे? उनके द्वारा कही गई बात के पीछे छुपी पुलिस विभाग की विवशता को समझकर विश्लेषित कर पाएंगे? राजनीति में विचरण करने वाले लोगों ने अपनी-अपनी पसंद के टीआई थानों पर तैनात करा रखे हैं, हर तरफ से तो नेताओं ने पुलिस विभाग को जकड़ रखा है, वह काम करे तो कैसे, निष्पक्ष रहे तो कैसे? सब जानते हैं राजनीतिक लोगों के संरक्षण में जमानेभर के अवैध काम होते हैं, अपराध पलते हैं, पत्रकार बंधु भी जानते हैं, वे जनता के प्रतिनिधि बनकर राजनीतिक लोगों से सवाल क्यों नहीं करते कि ये सब क्या लगा रखा है? यदि राजनीतिक लोग पुलिस को काम ही नहीं करने देंगे तो पुलिस करेगी क्या? बधाई एसपी सम्पत उपाध्याय यह नैसर्गिक सहजता और सरलता बनाए रखना।

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स्कूल बदलने के नाम पर माता-पिता अपने बच्चों की ग्रोथ एवं संवेदनशील भावनाओं से खिलवाड़ ना करें https://bebakazad.in/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%82%e0%a4%b2-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be/ https://bebakazad.in/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%82%e0%a4%b2-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be/#respond Sun, 02 Jul 2023 03:43:17 +0000 https://bebakazad.in/?p=12400 ✍️पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101 प्रायः देखने में आता है कि माता-पिता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के नाम पर उनके स्कूल बदल दिया करते हैं। बच्चा कुछ साल एक स्कूल में पढ़ता है और माता-पिता अच्छी शिक्षा दिलाने के नाम पर उसे दूसरे किसी अच्छे स्कूल में डालने का जतन करते हैं,अच्छे […]

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✍पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101

प्रायः देखने में आता है कि माता-पिता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के नाम पर उनके स्कूल बदल दिया करते हैं। बच्चा कुछ साल एक स्कूल में पढ़ता है और माता-पिता अच्छी शिक्षा दिलाने के नाम पर उसे दूसरे किसी अच्छे स्कूल में डालने का जतन करते हैं,अच्छे स्कूल से तात्पर्य महंगे स्कूल से। हो सकता है बच्चे को स्कूल में डालते समय माता-पिता की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं रही हो, कुछ समय बाद आर्थिक स्थिति सुधर जाती है तो वे बच्चे को अच्छे महंगे स्कूल में डालने की तैयारी करने लगते हैं, कहीं-कहीं माता-पिता को लगता है स्कूल में अच्छी पढ़ाई नहीं हो रही है, इसलिए वे बच्चे का स्कूल बदलने के विकल्प पर विचार करने लगते हैं, कहीं तो समाज में कालर ऊंची करने के चक्कर में, यह दिखाने के लिए कि हमारे बच्चे महंगे स्कूल में पढ़ते हैं, बच्चों के स्कूल बदल दिए जाते हैं, इसके दीगर और भी कारण हो सकते हैं बच्चों के स्कूल बदल देने के। माता-पिता बच्चे का स्कूल बदलने का निष्ठुर निर्णय, नवीन शिक्षा सत्र प्रारंभ होने पर लेते हैं और यह समय वही है, नवीन शिक्षा सत्र प्रारंभ हुआ ही है। माता-पिता द्वारा बच्चों का स्कूल बदलने का निर्णय, उनका अपना होता है, उसमें बच्चों की सहमति शामिल नहीं होती हैं। माता-पिता अपनी संतुष्टि के लिए, अपने बदलते जीवन स्तर को ध्यान में रखते हुए बच्चे का स्कूल बदल देते हैं, लेकिन इस बदलाव का बच्चे के कोमल मन पर क्या असर पड़ता हैं? इसका ध्यान नहीं रखते। जब बच्चे का स्कूल बदला जाता है तो बच्चे के मन की क्या स्थिति होती है, प्रतिस्पर्धा की हाय-बाप में आपा-धापी की हद तक विक्षप्त हो चुके माता-पिता समझने की कोशिश ही नहीं करते। स्कूल बदले जाने की स्थिति में बच्चे के मन में सैकड़ों शंका-कुशंका और भय, कुंडली मारकर बैठ जाते हैं। नया परिवेश, नया वातावरण, नए शिक्षक, नए मित्र और उस बच्चे की स्थिति की तो कल्पना करके मन सिहर उठता है, जिसे नया विद्यालय अपने शिक्षा स्तर को बनाए रखने के नाम पर एक दो क्लास नीचे एडमिशन देता है। विद्यालय शिक्षा की दुकानें हैं और दुकानों में संवेदनाओं की कोई जगह नहीं होती, बच्चों के प्रति संवेदनशील माता-पिता को ही होना पड़ेगा, बच्चों का मनोविज्ञान, बच्चों की भावनाओं को जितने अच्छे तरीके से माता-पिता समझ सकते हैं, विद्यालय नहीं। स्कूल के स्टेटस के नाम पर नीचे की क्लास में अवनत किया गया बच्चा हीन भावना का शिकार होता है तो वहीं कईं माता-पिता पैसे के दम पर अपने बच्चे को नए स्कूल में आगे की क्लास में दाखिला करा देते हैं, ऐसे बच्चे की शैक्षणिक बुनियाद कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है। नीचे की कक्षा में अवनत किया गया बच्चा और ऊपर की क्लास में पदोन्नत किया गया बच्चा, दोनों नए विद्यालय में असुविधा महसूस करते है, इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे अपने अहम को तुष्ट करने के लिए स्कूल बदलकर बच्चों की ग्रोथ, उनकी भावनाओं से खिलवाड़ करने की कोशिश ना करें।

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साइंस कालेज के बच्चों के माध्यम से देवास वासियों के दिलों पर प्रवेश अग्रवाल की प्रभावशाली दस्तक https://bebakazad.in/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%82%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%9c-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae/ https://bebakazad.in/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%82%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%9c-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae/#respond Thu, 29 Jun 2023 15:44:38 +0000 https://bebakazad.in/?p=12394 ✍️पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101 यह चुनावी समय है और चुनाव लड़ने का अभिलाषी प्रत्येक नेता अपने आपको जनता के सामने एवं अपनी पार्टी के सामने प्रभावशाली ढंग से रखने की कोशिश कर रहा है, जद्दोजहद कर रहा है। बात करें देवास की तो सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा यहां तीन दशक से काबिज है, पहले […]

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✍पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101

यह चुनावी समय है और चुनाव लड़ने का अभिलाषी प्रत्येक नेता अपने आपको जनता के सामने एवं अपनी पार्टी के सामने प्रभावशाली ढंग से रखने की कोशिश कर रहा है, जद्दोजहद कर रहा है। बात करें देवास की तो सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा यहां तीन दशक से काबिज है, पहले अपराजेय स्वर्गीय महाराज श्रीमंत तुकोजीराव पवार और अब उनकी अर्द्धांगिनी श्रीमंत राजमाता गायत्रीराजे पवार यहां से विधायक हैं। भाजपा निश्चिंत है कि अभी देवास में जनता के पास श्रीमंत राजमाता का कोई विकल्प नहीं है,दूसरी तरफ कांग्रेस है, जो हर चुनाव में राजघराने के खिलाफ अलग-अलग नेता आजमाती है और उन्हें हरल्लों की जमात में शामिल करती चली जाती हैं। देवास मुख्यालय पर कांग्रेस के पास हरल्लों की लंबी फेहरिस्त है,अब तो ये हाल है कि कांग्रेसी, राजघराने के खिलाफ चुनाव लड़ने से भी घबराते हैं,यह सोचकर कि कौन चुनाव हारकर हरल्लों की जमात में शामिल हो और यह सब स्वर्गीय महाराज श्रीमंत तुकोजीराव पवार के “व्यवहार प्रताप” का फल है। बावजूद देखने में आ रहा है कि कांग्रेस के दो युवा नेता चुनाव लड़ने की अभिलाषा लेकर देवास के सामने अपने आपको लंबे समय से प्रस्तुत कर रहे हैं, प्रवेश अग्रवाल और प्रदीप चौधरी। देवास को परभोगी कहा जाता है, भाजपा के पास राजघराना है और राजघराने के प्रति देवास की जनता श्रद्धानवत है, यही कारण है कि भाजपा की ओर से कोई भी बाहरी नेता देवास में राजनीति करने का साहस एवं प्रयास नहीं कर पाया। भाजपा में एक बार ऐसा हुआ है,जब पूर्व सांसद स्वर्गीय फूलचंद वर्मा को माध्यम बनाकर इंदौर के भाजपा नेता स्वर्गीय विष्णु प्रसाद शुक्ला ने देवास में राजनीतिक मजमा जमाने की कोशिश की थी, लेकिन महाराज श्रीमंत तुकोजीराव पवार के आभामंडल के आगे उनकी कोशिश दम तोड़ गई थी,तब से भाजपा के किसी बाहरी नेता ने देवास पर ध्यान देने की हिम्मत नहीं की है। इधर कांग्रेस के पास ऐसा कोई नेता ही नहीं बचा, जो मजबूत राजघराने से किला लड़ा सके, इस बार दो युवा नेता चुनाव लड़ने की मंशा लेकर देवास की जनता के बीच घूम रहे हैं और राजनीति के नाम पर अच्छा-खासा धन भी निवेश कर चुके हैं। किसान से कालोनाइजर बनते प्रदीप चौधरी देवास के है और प्रवेश अग्रवाल इंदौर से आते हैं। देवास की जनता का मानना है कि कांग्रेस प्रदीप चौधरी को टिकट नहीं देगी, इसका कारण बताया जा रहा है कि देवास का राजघराना कांग्रेस में भी उतना ही प्रभावशाली है, जितना भाजपा में, शायद यही कारण है कि कांग्रेस ने प्रदीप चौधरी को संगठन के काम पर लगा दिया है और वे इन दिनों वार्ड-वार्ड परिवर्तन यात्रा निकाल रहे हैं। प्रवेश अग्रवाल का नाम देवास की जनता ने विस्तृत रूप से नगर निगम चुनाव के समय सुना था, लेकिन आज देवास के लिए प्रवेश अग्रवाल का नाम नया नहीं है, जाना-पहचाना है, प्रवेश अग्रवाल नाम देवास के जन-जन में विस्तारित हो चुका है। विजयागंज मंडी जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रवेश अग्रवाल का नाम सुनाई देने लगा है और देवास में तो प्रवेश का नाम प्रभावशाली ढंग से प्रवेश कर ही चुका है। अभी तक प्रवेश अग्रवाल इवेंट के रूप में अपने आपको प्रस्तुत कर रहे थे, लेकिन साइंस कालेज के बच्चों के बीच प्रवेश की तत्परता जनता और जमीन से जोड़ने वाली साबित हुई है। हुआ यूं कि देवास में नया कलेक्टर कार्यालय बन रहा है, इसलिए बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित करते हुए कलेक्टर कार्यालय साइंस कालेज में शिफ्ट कर दिया और साइंस कालेज को शहर से लगे ग्रामीण क्षेत्र में धकेल दिया। इस बदलाव का बच्चों ने विरोध किया था, लेकिन गुंडे-मवालियों को महत्व देने वाले जनप्रतिनिधियों ने शिक्षा के लिए लालायित बच्चों की परेशानी को महत्व नहीं दिया। हाल ही में परीक्षा वाले दिन पानी गिर जाने से साइंस कालेज का मार्ग चलने लायक नहीं रहा, बच्चे परीक्षा देने कैसे पहुंचे,यह बात प्रवेश अग्रवाल को पता चली तो उन्होंने बच्चों के लिए आवागमन का निःशुल्क साधन उपलब्ध करा दिया। प्रवेश अग्रवाल की यह बात देवास वासियों के दिलों पर दस्तक देने वाली साबित हुई है।

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खातेगांव कन्नौद विधानसभा क्षेत्र के लिए क्या नीलेश जोशी की ओर आकर्षित हो रही है भाजपा? ब्राह्मणों की चौपाल पर उछलने लगा है प्रश्न https://bebakazad.in/%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a5%8c%e0%a4%a6-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%ad-6/ https://bebakazad.in/%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a5%8c%e0%a4%a6-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%ad-6/#respond Sun, 25 Jun 2023 16:33:40 +0000 https://bebakazad.in/?p=12382 ✍️पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101 खातेगांव-कन्नौद विधानसभा क्षेत्र विधायक आशीष शर्मा से क्षेत्र का ब्राह्मण तबका भी निराश हुआ है, चूंकि खातेगांव कन्नौद विधानसभा क्षेत्र ब्राह्मण बाहुल्य क्षेत्र है, इसलिए भाजपा का ब्राह्मण उम्मीदवार अथवा वैश्य उम्मीदवार पर ही ध्यान केन्द्रित रहा है। वर्तमान विधायक आशीष शर्मा दो बार के विधायक हैं और भाजपा […]

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✍पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101

खातेगांव-कन्नौद विधानसभा क्षेत्र विधायक आशीष शर्मा से क्षेत्र का ब्राह्मण तबका भी निराश हुआ है, चूंकि खातेगांव कन्नौद विधानसभा क्षेत्र ब्राह्मण बाहुल्य क्षेत्र है, इसलिए भाजपा का ब्राह्मण उम्मीदवार अथवा वैश्य उम्मीदवार पर ही ध्यान केन्द्रित रहा है। वर्तमान विधायक आशीष शर्मा दो बार के विधायक हैं और भाजपा पुनः उन्हें टिकट देती है तो वे तीसरी बार क्षेत्र की जनता से जनादेश मांगने जाएंगे, वैसे क्षेत्र में माना जा रहा है कि यदि भाजपा आशीष शर्मा को पुनः टिकट देती है तो वह अपनी पारंपरिक सीट खातेगांव कन्नौद, खो देगी। क्षेत्र की जनता में जितनी नाराजगी विधायक आशीष शर्मा से नहीं है, उससे कहीं ज्यादा नाराजगी, उनके आसपास बिखरे लोगों और उनके अनुज रूपेश शर्मा के सत्ताजनित अहंकार से है। खातेगांव कन्नौद विधानसभा क्षेत्र में अधिकारियों का आम जनता से मुंह मोड़कर, विधायक के इर्द-गिर्द घूमते लोगों एवं विधायक के भाई के प्रति समर्पित हो जाना, नाराजगी का मोटा कारण रहा है। विधायक के आसपास रहने वाले लोग और उनके भाई ने अधिकारियों के अधिकारों का मनमाने ढंग से उपयोग किया है तथा आम आदमी को तला है। विधायक आशीष शर्मा के इस कार्यकाल में कुछ काण्ड ऐसे हो गए हैं, जिनसे विधायक आशीष शर्मा की जनता के बीच बनी छवि को मोटा नुकसान पहुंचा है। एक उनके विधानसभा क्षेत्र में आदिवासी परिवार को मारकर जमीन में गाड़ देना और लगभग पचास दिन बाद उस परिवार के कंकालों का जमीन के उपर आना। इस लोमहर्षक घटनाक्रम से सारा प्रदेश सिहर उठा था, सारा आदिवासी वर्ग आन्दोलित हो उठा था, उस परिवार की बची बेटी आज भी सोशल मीडिया पर कराहती नजर आ जाती हैं। इस घटना ने एक बहुत बड़े आदिवासी वर्ग को भाजपा से दूर किया, कारण रहा विधायक आशीष शर्मा ने पुलिस प्रशासन के सूचना तंत्र के फेल हो जाने पर पुलिस अधिकारियों को कटघरे में खड़ा नहीं किया। दूसरी घटना मरते हुए युवक का विधायक के भाई पर जहर दिलवाने का आरोप लगाना, ये दो घटनाक्रम ऐसे थे, जो जनता के सामने थे, जिससे चारों तरफ यह संदेश संप्रेषित हुआ कि विधायक के आसपास रहने वाले लोग और उनके भाई सत्ता के मद में मदांध हो गए हैं, बाकी मां नर्मदा की छाती छलनी करके रेत के कारोबार को लेकर तो रोज ही सोशल मीडिया पर रोने रोए जाते हैं, लेकिन इस पर विधायक का मौन भी जनता की नाराजगी का कारण बना हुआ है। रही बात क्षेत्र के बहुसंख्यक ब्राह्मण समाज की तो वह विवेकशील विश्वास का स्वामी होता है, अंधा विश्वास करना ब्राह्मण समाज का स्वभाव ही नहीं होता। खातेगांव कन्नौद विधानसभा क्षेत्र का बहुसंख्यक ब्राह्मण समाज भी विधायक आशीष शर्मा से निराश हुआ है। इस वर्ग का मानना है कि हर वर्ग के लिए राजनीति में आरक्षण है, लेकिन सामान्य वर्ग के लिए पद आरक्षण कभी-कभी मिलता है तो उसे उसका हक मिलना चाहिए। कन्नौद नगरीय निकाय चुनाव में सामान्य वर्ग की, विशेषकर ब्राह्मण वर्ग की महिला को अध्यक्ष बनाने के लिए प्रयास ना कर विधायक आशीष शर्मा ने ब्राह्मणों को निराश किया है, मर्यादा में बंधा ब्राह्मण मुखर नहीं होता, लेकिन अवसर आने पर वह अपनी निराशा का प्रदर्शन अवश्य करता है। विधायक आशीष शर्मा के विधानसभा क्षेत्र की ब्राह्मण चौपालों पर अब निराश ब्राह्मण, खातेगांव के नीलेश जोशी का नाम लेने लगे हैं, वे उनमें संभावना तलाशने लगे हैं, लेकिन एक बड़ा वर्ग यह भी स्वीकार करता है कि नीलेश जोशी में आशीष शर्मा के आगे आकर अपने आपको प्रस्तुत करने का साहस नहीं है और वैसे भी जिनके नाम जनता के बीच लिए जाने लगते है, भाजपा उनको टिकट नहीं देती? क्या नीलेश जोशी को संभावित उम्मीदवार मानकर उनका नाम चलाने की कोशिश की जा रही हैं, ताकि भाजपा के शीर्ष नेता उनके नाम पर विचार ही ना करें? क्योंकि कुछ समय से खातेगांव से उम्मीदवार बनाने की आवाज तेज हुई है और वर्तमान विधायक आशीष शर्मा कन्नौद से आते हैं। विधानसभा क्षेत्र को क्षेत्रफल की दृष्टि से देखें तो खातेगांव कन्नौद विधानसभा क्षेत्र का अधिकांशतः क्षेत्रफल खातेगांव के हिस्से में आता है, नीलेश जोशी की बनने वाली संभावना को क्षीण करने के लिए उनका नाम उछाला जा रहा है? आशीष शर्मा से दबे हुए नीलेश जोशी आगे नहीं आएंगे तो आशीष शर्मा का विकल्प कौन? क्या भाजपा एक बार फिर क्षेत्र के सम्मानित विधायक रहे वयोवृद्ध ब्रजमोहन धूत की ओर आकर्षित होगी और उनसे सलाह मशविरा करके किसी वैश्य युवा को आगामी चुनाव में प्रस्तुत करेगी?

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आओ हम बदलाव करें, सब एक दूजे के घाव भरे । https://bebakazad.in/%e0%a4%86%e0%a4%93-%e0%a4%b9%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%ac-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a5%87/ https://bebakazad.in/%e0%a4%86%e0%a4%93-%e0%a4%b9%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%ac-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a5%87/#respond Sat, 24 Jun 2023 18:09:10 +0000 https://bebakazad.in/?p=12378 ✍️पंडित प्रदीप मोदी आओ हम बदलाव करें,सब एक दूजे के घाव भरे ।सत्ता मद में मदमस्त हुए जो,उनको टा-टा बाय-बाय कहें।हालत नगर की देख रहे हो,कब से सबकुछ भोग रहे हो।नगर वासियों अब जाग उठो,इतना हो गया क्या सोच रहे हो।भ्रष्टाचार भरा ये करें विकासपग-पग छला गया जनविश्वास ।इस बार बना ले मन अपना,मदमस्तों को […]

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✍पंडित प्रदीप मोदी

आओ हम बदलाव करें,
सब एक दूजे के घाव भरे ।
सत्ता मद में मदमस्त हुए जो,
उनको टा-टा बाय-बाय कहें।
हालत नगर की देख रहे हो,
कब से सबकुछ भोग रहे हो।
नगर वासियों अब जाग उठो,
इतना हो गया क्या सोच रहे हो।
भ्रष्टाचार भरा ये करें विकास
पग-पग छला गया जनविश्वास ।
इस बार बना ले मन अपना,
मदमस्तों को करा दे अहसास।
चेहरे मोहरों में बदलाव करें
आत्ममुग्धों से सवाल करें।
आओ हम हम बदलाव करें
सब एक दूजे के घाव भरे।

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धार जिले के भाजपा नेता भ्रष्टाचार के यार, इनके आगे भाजपा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री भी लाचार, चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे ग्राम पंचायत लोहारी के भ्रष्टाचार https://bebakazad.in/%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0/ https://bebakazad.in/%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0/#respond Tue, 20 Jun 2023 03:40:36 +0000 https://bebakazad.in/?p=12373 ✍️पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101 आदिवासी बहुल धार जिले में कुक्षी तहसील की ग्राम पंचायत लोहारी भ्रष्टाचार का अखाड़ा बना दी गई, लेकिन धार जिले का एक भाजपा नेता लोहारी में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने को तैयार नहीं हैं,ऐसा लगता है भ्रष्टाचार का पैसा सभी ने मिलकर खाया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हाथ […]

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✍पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101

आदिवासी बहुल धार जिले में कुक्षी तहसील की ग्राम पंचायत लोहारी भ्रष्टाचार का अखाड़ा बना दी गई, लेकिन धार जिले का एक भाजपा नेता लोहारी में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने को तैयार नहीं हैं,ऐसा लगता है भ्रष्टाचार का पैसा सभी ने मिलकर खाया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हाथ उठा-उठाकर कह रहे हैं “ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा”। ग्राम पंचायत लोहारी में हुए भ्रष्टाचार के कारण जनता के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वी.डी.शर्मा लाचार नजर आ रहे हैं, क्योंकि धार जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को तथा मौन साधकर बैठे धार जिले के भाजपा नेताओं ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को लाचार बना दिया है। भ्रष्टों के आगे लाचार सत्ता प्रमुख और संगठन प्रमुख, एक बार फिर जनता से जनादेश मांगने की तैयारी कर रहे हैं,यह शर्म की बात है या गर्व की? मुख्यमंत्री शिवराज एवं भाजपा अध्यक्ष वी.डी.शर्मा पहले इस पर विचार करें, उसके बाद पुनः जनादेश मांगने की तैयारी करें और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी ध्यान दे कि जमीन पर उन्हीं की पार्टी के नेता, उनके द्वारा कही गई बातों का मान नहीं रख पा रहे हैं, वे जनता के पैसे को खा भी रहे हैं और खिला भी रहे हैं। ग्राम पंचायत लोहारी निसरपुर विकास खण्ड अंतर्गत आती हैं और इस विकास खण्ड में जनपद सीईओ माधवाचार्य हैं, जनपद सीईओ माधवाचार्य की छवि झूठे, मक्कार और भ्रष्ट अधिकारी की बन चुकी है, जो सीएम हेल्पलाइन पर झूठी जानकारी देकर मुख्यमंत्री शिवराज का भी मुंह चिढ़ाने से बाज नहीं आता। उल्लेखनीय है, जब एक आम आदमी सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करता है तो वह मान लेता है कि उसने सीधे प्रदेश के मुख्यमंत्री को शिकायत कर दी है और उसी हेल्पलाइन पर कोई अधिकारी झूठी जानकारी देकर अपने पाप छुपाने की कोशिश करता है तो आम आदमी को यही लगता है कि ये तो मुख्यमंत्री को भी कुछ नहीं समझ रहा है, क्षेत्र में यही हाल है जनपद सीईओ माधवाचार्य के, मुख्यमंत्री और उनकी हेल्पलाइन के। यह सब क्षेत्र के भाजपा नेता जानते हैं, ग्राम पंचायत लोहारी में हुए भ्रष्टाचार के बारे में जानते हैं, लेकिन बोलने को तैयार नहीं, जिससे आम जनता के बीच धार जिले के भाजपा नेता भ्रष्टाचार के यार घोषित हो रहे हैं। कहने को भ्रष्टाचार का अखाड़ा बना दी गई ग्राम पंचायत लोहारी, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष डाक्टर राज बरफा का गृह ग्राम है, कुक्षी में ओजस्वी वक्ता, विद्वान भाजपा नेता भूतपूर्व जिलाध्यक्ष रमेश धाड़ीवाल निवास करते हैं, पूर्व केबिनेट मंत्री रंजना बघेल कुक्षी की है, इनके पति भाजपा नेता मुकाम सिंह किराड़े कुक्षी में है और भी कईं छोटे-मोटे चिरकुट नेता हैं, जो भाजपा के झण्डे उठाते हैं और सोशल मीडिया पर मोदी शिवराज के गुण गाते है, लेकिन एक भी लोहारी ग्राम पंचायत में हुए भ्रष्टाचार पर मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं, भ्रष्ट अफसरों से सवाल जवाब करने को तैयार नहीं हैं। धार जिले के भाजपा नेताओं के मौन से जनता के बीच भाजपा की छवि धूल धूसरित हो रही हैं। ग्राम पंचायत लोहारी में एक से अधिक बार बिना विकास कार्य किए राशि निकाल कर डकार ली गई और सारी भाजपा जन-धन की लूट करने वाले भ्रष्टों को बचाती हुई नजर आ रही हैं। वैसे तो इस ग्राम पंचायत में कईं मामले हैं, जिनमें जनपद सीईओ माधवाचार्य ने झूठी जानकारी देकर मु्ख्यमंत्री और जनता को बरगलाने की कोशिश की है, लेकिन आज यहां एक मामले का उल्लेख किया जा रहा है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत क्रमांक 21740883 दिनांक 11/04/2023 शिकायत का विवरण, ग्राम पंचायत लोहारी विकास खण्ड निसरपुर द्वारा वर्ष 2017 में नाली निर्माण निंबोल फाटा से पुलिया तक कुल लागत 3,50,000 (तीन लाख पचास हजार रुपए) स्वीकृत हुआ था, लेकिन तत्कालीन सरपंच सचिव ने जनपद सीईओ माधवाचार्य की सरपरस्ती में बिना काम किए निकाल लिए, उचित जांच कर सरपंच सचिव के खिलाफ कार्रवाई की जाए,निकाली गई राशि वसूल की जाए। इस शिकायत पर लेवल वन अधिकारी जनपद सीईओ माधवाचार्य मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर 26 मई 2023 को जवाब देते हैं कि प्रतिवेदन अनुसार शिकायतकर्ता की शिकायत का परीक्षण किया गया, प्रतिवेदन अनुसार वर्ष 2017-18 में जनभागीदारी मद से नाली निर्माण निंबोल फाटे से पुलिया तक स्वीकृत किया गया था,जिसकी तकनीकी स्वीकृति क्रमांक 20 दिनांक 18/08/2017 एवं प्रशासकीय स्वीकृति क्रमांक 2355 दिनांक 25/09/2017 स्वीकृत राशि 3.50 लाख है,मुल्यांकन अनुसार राशि रूपए 2,99,500 का व्यय माप पुस्तिका क्रमांक 0887 के पृष्ठ क्रमांक 21 पर दर्ज है एवं उक्त नाली निर्माण कार्य पूर्ण होकर पूर्णता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है, यह जवाब देने के बाद 26 मई 2023 को ही शिकायतकर्ता को बिना बताए शिकायत बंद कर दी गई। शिकायतकर्ता ने इसी शिकायत को बिना किसी प्रकार का कोई बदलाव किए 30/05/2023 को पुनः मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर अपलोड कर दी, जिसका शिकायत क्रमांक 22442988 है। उसी शिकायत का लेवल वन अधिकारी जनपद सीईओ माधवाचार्य 12 जून 2023 को अलग जवाब देते हैं और लगभग स्वीकार करते हैं कि शिकायतकर्ता की शिकायत का परीक्षण किया गया वर्ष 2017-18 में निंबोल फाटे से पुलिया हाइवे रोड तक कोई भी नाली निर्माण कार्य स्वीकृत नहीं हुआ है और ना ही किसी प्रकार की राशि व्यय की गई है, शिकायतकर्ता को अवगत करा दिया गया है, शिकायत विलोपन योग्य हैं। जनपद सीईओ माधवाचार्य कैसे अधिकारी हैं 26 मई को क्या जवाब देते हैं और 12 जून को क्या जवाब देते हैं? उनके कौन से जवाब को सही माना जाए? ऐसे झूठे अधिकारी के पास जिले की तीन-तीन जनपद का प्रभार हैं, समझा जा सकता है इस मक्कार अधिकारी ने अपने प्रभार की जनपदों में आने वाली ग्राम पंचायतों की क्या हालत कर रखी होगी? माधवाचार्य के ऐसे-ऐसे कारनामों पर भी मौन धारण कर बैठे धार जिले के भाजपा नेता, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का सम्मान नहीं बढ़ा रहे हैं, अपितु उनकी छवि पर कालिख पोतने का काम कर रहे हैं, यदि धार भाजपा के नेता जनता के प्रति, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति, अपनी पार्टी भाजपा के प्रति इमानदार है तो उन्होंने ग्राम पंचायत लोहारी में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर होना चाहिए, अपना मुंह खोलना चाहिए।

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प्रयोगशाला नहीं है देवास, नेता अधिकारी समझने की कोशिश करें, कोई बोलता नहीं इसका यह मतलब नहीं कि कुछ तो भी किया जाए https://bebakazad.in/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b8/ https://bebakazad.in/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b8/#respond Wed, 14 Jun 2023 15:20:01 +0000 https://bebakazad.in/?p=12362 ✍️पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101 नेताओं ने देवास को जबरदस्ती का पुल दिया है, जो एबी रोड पर राम नगर से बावड़िया तक स्थित है। इस पुल की देवास को बिल्कुल आवश्यकता नहीं थी, लेकिन नेताओं ने दिया, इसका विरोध भी बहुत हुआ, लेकिन नेताओं को पुल देना था और उन्होंने दिया, यह पुल […]

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✍पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101

नेताओं ने देवास को जबरदस्ती का पुल दिया है, जो एबी रोड पर राम नगर से बावड़िया तक स्थित है। इस पुल की देवास को बिल्कुल आवश्यकता नहीं थी, लेकिन नेताओं ने दिया, इसका विरोध भी बहुत हुआ, लेकिन नेताओं को पुल देना था और उन्होंने दिया, यह पुल देवास की जनता को जबरदस्ती दिया गया है, इसलिए इस पुल को जनता के बीच जबरिया पुल या जबरदस्ती का पुल कहा जाता है। कांग्रेस इस पुल की जनक तथा भाजपा इस पुल के स्थान परिवर्तन का कारक बनी है, कांग्रेस भाजपा दोनों ही पार्टियों का इस जबरदस्ती के पुल में जबरदस्ती का योगदान रहा है। इस पुल को बनाने में कोरोना काल जैसी विभत्स आपदा को असंवेदनशील अधिकारी नेताओं ने अवसर के रूप में देखा है। लाक डाउन के समय इस जबरदस्ती के पुल को बनाने के लिए दिन-रात काम चला है। कोरोना जैसी महामारी में जब लोग घरों में दुबके बैठे थे,तब जबरदस्ती के पुल का काम अनथक, बिना अवरोध चला है। देवास में फिलहाल तीन पुल है और तीनों पुल देवास के जिम्मेदारों की योग्यता एवं दूरदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं। ना तो व्यावहारिक दृष्टि से और ना तकनीकी दृष्टि से देवास के पुलों को सही कहा जा सकता है। कोई बोलने वाला नहीं है तो इसका ये मतलब नहीं कि भोले-भाले नागरिकों की देवास में कुछ तो भी करें, नेता अधिकारियों को समझने की कोशिश करना चाहिए कि देवास प्रयोगशाला नहीं है, जहां कुछ तो भी प्रयोग किए जाए। जबरदस्ती के पुल पर दो तीन दुर्घटनाएं हो गई, जिसमें कुछ गंभीर घायल हुए और एक दो मौत भी हो गई, यातायात पुलिस ने जबरदस्ती के पुल पर दो पहिया वाहनों का आना-जाना प्रतिबंधित कर दिया। सोशल मीडिया पर यातायात पुलिस के इस निर्णय पर काफी कुछ प्रतिक्रियाएं आई, अंततः यातायात डीएसपी किरण शर्मा मीडिया के माध्यम से जनता के सामने नुमाया हुए और कहने लगे लोगों की जान बचाने के लिए प्रयोग के तौर पर यह प्रतिबंध लगाया है। यह सही है कि नवनिर्मित जबरदस्ती का पुल सुरक्षा की दृष्टि से खामियों से भरा है, पुल पर डिवाइडर नहीं है और सबसे बड़ी बात इस पुल पर चढ़ते समय एवं उतरते समय हल्का सा अहसास होता है कि हम पुल पर चढ़ रहे हैं या उतर रहे हैं, अन्यथा पुल पर ऐसा लगता है कि हम सड़क पर ही चल रहे हैं, इसमें वाहन चालक ओवरटेक करता है और दुर्घटना का शिकार हो जाता हैं। यातायात पुलिस कहें या डीएसपी किरण शर्मा, इनका देवास के यातायात से कभी कोई लेना-देना नहीं रहा,अब ये लोगों की जान बचाने को जबरदस्ती के पुल पर दो पहिया वाहन प्रतिबंधित कर प्रयोग कर रहे हैं। जबरदस्ती के पुल पर प्रयोग की नहीं डिवाइडर की आवश्यकता है और वह अविलंब बनना चाहिए।

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अब प्रशासनिक बदलाव का नगर में प्रभाव नजर नहीं आता, कितने ही अधिकारियों की तो उपस्थिति ही नजर नहीं आती नगर में, तो इनके बदलाव का प्रभाव क्या खाक नजर आएगा जनता के बीच? https://bebakazad.in/%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0/ https://bebakazad.in/%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0/#respond Fri, 09 Jun 2023 16:07:20 +0000 https://bebakazad.in/?p=12359 ✍️पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101 पहले अधिकारी बदलते थे तो नगर में उनके बदलाव का प्रभाव नजर आता था, जनता बदलाव के प्रभाव को महसूस करती थी, अधिकारी के जनता के बीच किए गए काम उसकी उपस्थिति को महसूस कराते थे, लेकिन आजकल अधिकारी बदल जाते हैं,नए अधिकारी आ जाते हैं, जनता को पता […]

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✍पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) 9009597101

पहले अधिकारी बदलते थे तो नगर में उनके बदलाव का प्रभाव नजर आता था, जनता बदलाव के प्रभाव को महसूस करती थी, अधिकारी के जनता के बीच किए गए काम उसकी उपस्थिति को महसूस कराते थे, लेकिन आजकल अधिकारी बदल जाते हैं,नए अधिकारी आ जाते हैं, जनता को पता ही नहीं चलता। ऐसा शायद इसलिए कि आजकल अधिकारी आते नहीं,लाए जाते हैं, आने वाले (नियम से चलने वाले) अधिकारी तो लूप लाइन में सड़ रहे हैं, लाए गए अधिकारी शहर के माथे पर थोपे जा रहे हैं। लाए गए अधिकारी लाने वाले के प्रति जवाबदेह होते हैं, जनता के प्रति नहीं? लंबे समय से देवास में यही हो रहा है, यही कारण है कि अधिकारी भी सोचते हैं कि जो उनको लाए हैं, बस उनकी जी-हुजूरी करो, उनके पट्ठों, उनके चाटूकारों की गुलामी करो, बाकी जनता जाए भाड़ में, इसलिए अधिकारी अपने कार्यालय की कुर्सी से चिपकर रह जाते हैं, वे जनता से रूबरू हो ही नहीं पाते हैं। पूर्व कलेक्टर चंद्रमौली शुक्ला और एसपी शिवदयाल सिंह देवास के निष्क्रिय कलेक्टर एसपी के रूप में लंबे समय तक याद किए जाते रहेंगे। दोनों का कार्यकाल, प्रशासन को नैतिक रूप से तबाह करने वाला साबित हुआ, चंद्रमौली शुक्ला के लिए निगमायुक्त विशाल सिंह बैसाखी बने तथा एसपी शिवदयाल सिंह के लिए डीएसपी किरण शर्मा। कलेक्टर चंद्रमौली शुक्ला के बाद ऋषव गुप्ता कलेक्टर के रूप में आए तो जनता को लगा कलेक्टर बदलाए है,वह भी इसलिए कि ऋषव गुप्ता ने पहली बार कलेक्टर पद की जिम्मेदारी संभाली है, देवास में एसपी भी बदलाए है, शिवदयाल सिंह के स्थान पर संपत उपाध्याय आए हैं, लेकिन अभी तक एसपी बदलाव का प्रभाव नगर में नजर नहीं आया है। ना तो थानों के कामकाजों के ढर्रे में कोई परिवर्तन आया है, ना क्रिया-कलापों में, ना नगर में चलने वाली अवैध एवं आपराधिक गतिविधियों में कोई परिवर्तन नजर आया है, ऐसा लगता है मानो शिवदयाल गए और संपत उपाध्याय के रूप में पुनः शिवदयाल ही वापस देवास आ गए। एसपी बदलाव का असर नजर नहीं आना चुगली करता है, एसपी साहब आए नहीं, लाए गए हैं।

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